आना पड़ेगा बार बार

मत साबित कीजिये, दुनियांअहसासों से बनती
मेरा तो मानना यह ही है, यह प्रयासों से चलती
मत मानिए, भाग्य जीवन निर्माता हो सकता
आंकलन कहता, मनुष्य स्वयं ही भाग्य निर्माता

अच्छाईयों का गुणगान करते सदा, सच्चे इंसान
देह धर्म तो इकठ्ठा करता,रोजमर्रा का सामान
आत्मा की पुष्टि से ही तैयार होती, अच्छी नीति
प्रकृति तो गुण और अवगुण दोनों को देती, सहमती

सम्पन्नता का सार दान और जन कल्याण
मानव तो होता चंद दिनों का, तय मेहमान
जीवन को सही सलीके से जीना है, ज्ञान
हमारे ह्रदय की धड़कन में ही बसते,भगवान

अंहकार, चालाकी और झूठ है, मीठा जहर
पीने के बाद घूमते ही रहते, हमारे अंदर, बाहर
सत्य ही एक औषध, एक मात्र पूर्ण समाधान
मंथन कर अपनी आलोचना खुद करे, वही इन्सान

संयम और मृदुलता मन की, है आत्मिक पवित्र वन्दन
अनाम शक्ति की पहचान ही, सात्विक जीवन स्पंदन
जागकर अपने को पहचाने, यही है जीवन अभीसार
सच, है जीवन-नैया चलेगी, हमारे दिशा निर्देशानुसार
सही तो उस पार, नही आना पड़ेगा वापस बार बार…
【कमल भंसाली】

कमल भंसाली