🌷जीवन मुक्तक 🌷कमल भंसाली

कहा है किसी ने इच्छाओं का कोई अंत नही होता
इस जग में ना इच्छा के तो कोई संत भी नहीं होता
दो पल की जिंदगी में क्या से क्या क्या नहीं होता
आदमी आज में भी अनजाने कल के लिए जीता
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जो है वो कम है यह सोच जो जीवन से घबराता
इस कशमकश में बहुत कुछ छोड़ आगे बढ़ जाता
मंजिल पास ही है पर असंतोष से उसे देख न पाता
इच्छीत यात्रा के अंतिम क्षोर पर कभी न पँहुच पाता
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रिश्ते जीवन की बुनियाद ये रखता जो याद
“प्रेम साँसों की सरगम” बजती बिन किसी वाद
उम्र की दहलीज के पास ही होता मृत्यु का वास
आत्मा की करुणता में ही है विधाता का निवास
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मधुरता जीवन की प्रसन्नता का अनमोल प्रकाश
शब्दों में नम्रता का प्रवेश सही शुकून की तलाश
व्यवहार की दुनिया में सम्बन्धों का अपना इतिहास
स्वयं को जो सुधारे व्यक्तित्व का हो यही हो प्रयास
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जीवन अनुपम होता उम्र के गुलदस्ते में सजता
शोभा जग की बन अपने अंदाज में ही लहराता
प्रेम की पगडंडिया पर फूल कांटो दोनों बिछाता
जीवन की विशेषता सुख और दुःख दोनों बताता
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रचयिता ✍🌺 कमल भंसाली🌺

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