🙏सांसारिक महासागर 🙏कमल भंसाली

संसार के महासागर की कहानी बड़ी विचित्र
प्यार और स्वार्थ से अभिनीत इसके सब पात्र
हकीकत और छलावा खींचते रहते नये चित्र
कसमें वादों का संसार न कोई दोस्त, न मित्र

दुनियादारी में सब कुछ तय होता
जो सही होता बस वही नहीं होता
दिखावा में समाया हर रिश्ता नाता
पवित्र बन्धनों बंधा आडम्बर खोजता

कहने को बहुत कुछ कह देते
पर हकीकत यही है कहती
प्यार शब्दों का मोहताज नहीं
जहां शब्द वहां प्यार रहता नहीं

क्यों कोई किसी के लिए जिए
क्यों कोई किसी के लिए मरे
कहने की बात है इसलिए कह देते
सच कहे हकीकत में सब मरने से डरते

अफसानों से गुजरती जिंदगी
सच कहने से हर पल डरती
अवसर झूठ तले पले जिंदगी
कम ही जीतती, अक्सर हारती

माना संसार सब रस का एक सागर
अति सुख दुःख से भरी एक गागर
मोह के जाल के हजारो होते आकार
उलझ जाता जिसमें दो साँसों का तार

असयंमित संभावनाओं की तलाश
गहन स्वार्थ संक्रमण त्रस्तयुक्त प्रयास
विचलित से अनुभव में मुक्ति का तनाव
कृत्रम अलंकारों के श्रृंगार का नव मानव
आवरणहीन समाज का यही है स्वभाव

सहज सरल जीवन निर्माण
जिसमें सत्य का हो प्रमाण
अति उत्तम ज्ञान प्रव्यक्त जीवन
आधुनिक उपकरणों से कहां आसान

पथ, अपथ विचलत होती जीवन लहरे
उत्थान पतन जीवन सागर के दो किनारे
टकराना तय, परिणाम समय के बहते धारे
धर्मस्व जीवन नैया, सही मंजिल दूर से पुकारे…..

रचियता ****कमल भंसाली

वो, ख़ुशी कहां से लाऊं

ऐ मेरे दिल
तू ही बता
वो, ख़ुशी कहां से लाऊं
जिससे तेरा मन बहलाऊं

आग जो तेरे सीने में जलती
वही चेहरे पर मुस्कराती
तू बता मेरे दिल
किस नीर से तेरी
ये आग बुझाऊं
बता ना, ऐ मेरे दिल..

दस्तूर तू गम का जाने
प्रेम का बदलता रंग जाने
आशा में जीने की सजा जाने
जीना है, जीने का खौफ न कर
ऐ मेरे नादान दिल
मुझे यह बता जरा
कौन सी मरहम लगाऊं
तेरे सारे घाव भर जाए
सदा तू, खिलता ही जाए
बता ना, ऐ मेरे दिल..

देख, दुनिया की विचित्र तस्वीर
न हो मायूस, न ही बदल ढंग
लोगों की परवाह करके
निराशा का बादल न बन
तू तो है,मेरा मन उपवन
बता वो कौनसी शक्ति
जिससे तुम्हे फिर सजाऊं
बता ना, ऐ मेरे दिल..

आरजू, इतनी ही तुमसे
दिल तोड़ने वालों का
कभी जिक्र न कर
मौहब्बत के मैदान में
हार की फ़िक्र न कर
जिन्दादिली तेरी फितरत
उस पर शंका न कर
बता वो कौनसी बाजी
जीत कर दिखाऊं
जिससे तेरी ख़ुशी वापस लाऊं
बता ना, ए मेरे दिल…

【कमल भंसाली 】

कमल भंसाली