🌻आत्मिक प्रार्थना🌻कमल भंसाली🌻

जानता हूं प्रभु
तुम आये थे कई बार
मेरे आत्म द्वार
खटखटाया, बार बार
पर मै नादां
संशय में रहा हर बार
कौन होगा
तमस भरी अंधियारी
बिन चिंतन की रातों में
उलझा ही रहा
अपने सांसारिक जज्बातों में
भूल हुई, प्रभु
माफ कर देना
हो सके तो इस बार मुझे
जरा जगा देना
चेतनामय बना देना
एक नई जीवन भोर का
वरदान देकर जाना
यह जीवन तुमको ही वापस करना
जब चाहे वापस ले लेना
पर उससे पहले
हुए जग के सारे अहसान
वापस लौटाने का सामर्थ्य दे जाना
मेरा सर्व आत्मिक उद्धार कर देना
दुनियादारी के दस्तूर निभाते
मन हुआ मेरा अति मेला कुचैला
अगर कहीं कोई दाग रह भी जाये
तो भी मुझे स्वीकार कर लेना
अपने चरणों का एक कण बना
अपने में ही सम्माहित कर लेना
जन्मों के बंधन से मुक्त कर
मुक्ति पथ मेरा सहज सरल कर देना…..
रचियता 🌺 कमल भंसाली🌺