🌷जीवन मुक्तक 🌷कमल भंसाली

कहा है किसी ने इच्छाओं का कोई अंत नही होता
इस जग में ना इच्छा के तो कोई संत भी नहीं होता
दो पल की जिंदगी में क्या से क्या क्या नहीं होता
आदमी आज में भी अनजाने कल के लिए जीता
🌸🌸🌸
जो है वो कम है यह सोच जो जीवन से घबराता
इस कशमकश में बहुत कुछ छोड़ आगे बढ़ जाता
मंजिल पास ही है पर असंतोष से उसे देख न पाता
इच्छीत यात्रा के अंतिम क्षोर पर कभी न पँहुच पाता
🌺🌺🌺
रिश्ते जीवन की बुनियाद ये रखता जो याद
“प्रेम साँसों की सरगम” बजती बिन किसी वाद
उम्र की दहलीज के पास ही होता मृत्यु का वास
आत्मा की करुणता में ही है विधाता का निवास
🌹🌹🌹
मधुरता जीवन की प्रसन्नता का अनमोल प्रकाश
शब्दों में नम्रता का प्रवेश सही शुकून की तलाश
व्यवहार की दुनिया में सम्बन्धों का अपना इतिहास
स्वयं को जो सुधारे व्यक्तित्व का हो यही हो प्रयास
🌷🌷🌷
जीवन अनुपम होता उम्र के गुलदस्ते में सजता
शोभा जग की बन अपने अंदाज में ही लहराता
प्रेम की पगडंडिया पर फूल कांटो दोनों बिछाता
जीवन की विशेषता सुख और दुःख दोनों बताता
🌻🌻🌻
रचयिता ✍🌺 कमल भंसाली🌺

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दुनियादारी या लाचारी ?……कमल भंसाली

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लाचार होकर दुनियादारी
सामने आई, जब बन मजबूरी
अपनों के बाजार में
छिपा रही, अपनी कमजोरी
बड़ी अजीब बात
जिनको अपना कहती
उनसे ही, खुद को छिपाती
जरा सा फिसला आँचल
पकड़कर संभालती

छिपने की कोई राह नहीं
रस्मों रिवाजों को बिन निभाये
जीने का कोई विकल्प नहीं
बाहर सभी सही दिखाए
ध्यान रहे, दर्द दिल के
नयनों से छलक न जाए

दुनियादारी की बुनियाद
जीना है, अगर समाज के साथ
तो, हर रिश्तों को रखना याद
समय पर निभाना जरुरी
होता, हर रीती रिवाज
भीतर का प्यार देगा आवाज
रिश्तों से बनता, आखिर समाज

बड़ी अजीब है, बात
दुःख में हर रिश्ता
रहने लगता, दूर दूर
तब दिल को नहीं अच्छी लगती
दुनियादारी की तीमारदारी
फिर भी, निभाने में समझदारी
आखिर, अपने ही अपने होते
उनके बिना सपने
कहां, सुहाने दिल में जगते

थोड़ी समझ रख, निभाये दुनियादारी
यही है, समझदारी
समाज में होती, सभी की भागीदारी
चाहे हमें लगे खारी, या प्यारी
जय हो तुम्हारी, दुनियादारी……..कमल भंसाली