👨‍❤️‍👨तेरी जुदाई✍️कमल भंसाली

वक्त की रुसवाई और तुम्हारी बेवफाई
सनम मेरे दिल को दे रही दर्दीली तन्हाई
हालात बदल गये हो गई हमारी जुदाई
खाई कसमों को मौहब्बत रास न आई
वक्त…

मौसम का मिजाज भी काफी बिगड़ गया
चांद भी गम के काले बादलों में छिप गया
तन्हा हो दिल तेरे इश्क में बदनाम हो गया
प्यार का तुम्हारा तौहफा दिल को रुला गया
वक्त…

कल तूं जब कभी किसी गैर के आलिंगन में होगी
कसम से हमारी राहे उस दिन से अलग अलग होगी
वो शायद जिंदगी की आखरी जज्बाती रात होगी
जिसमें बेवफा कहकर ही दिल को सांत्वना मिलेगी
वक्त….

जिसकी भी बनो तुम उसकी ही रहना
अब कभी पहलू बदल न बदनाम होना
कल मेहंदी जिसके भी नाम की रचाना
उसको ही जन्म भर का प्रियतमा बनाना
वक्त…

टूटा दिल भी अजीब सी आरजू करता रहता
झूठी मौहब्बत के लिए सदा ही इबादत करता
दिल देकर दर्द के मंजर के इर्द गिर्द ही घूमता
अपनी हस्ती भूल परवाना बन कर जल जाता
वक्त…

रचियता ✍️ कमल भंसाली

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💑अधूरी चाहते💑 शायरी युक्त कविता✍ कमल भंसाली

दोस्तों,
आज के युग में “प्रेम” की स्थिति बड़ी दयनीय सी महसूस हो रही है। अर्थ और आधुनिक साधनों के महत्व के विस्तार के साथ दिमागी तेजी ने प्रेम पोषक सरल तत्व को स्वीकार करना छोड़ दिया है। प्रेम की राह के हमसफर बनकर भी लोग अपनी निजी सुविधाओं का ज्यादा ख्याल रखते है। “त्याग” और “संयम” की जगह लोग इल्जाम और बदनामी का सहारा लेकर “प्यार” की पवित्रता को नष्ट कर रहे है। आप इसे उर्दू और हिंदी शब्दों के संगम से बनीे शायरी युक्त कविता कह सकते है। प्रयास यही है कि हम समझे कि”प्रेम” आज भी इंसान की नहीं खत्म होने वाली “चाहत” है। लेखक व रचियता : कमल भंसाली

मेहरबानी ही थी उनकी जो कभी प्यार किया
हमें बेवफाई का सौदाई कहा स्वीकार किया
हमने माना खुद को हमने ही बदनाम किया
इल्जाम उनका दिल से हम ने स्वीकार किया

पर उन्हें न कभी मायूसी का आलम दिया
जहर जुदाई का चुपचाप सहा और पिया
आरजू हमारी उनके कदमों की पायल रही
जब मन किया उनका पहन कर उतार दिया

बेवफा हमें वो कहे इस रस्म का निर्वाह करना होगा
दिल किसी का टूटे ये “प्यार” का कोई दस्तूर होगा
पर ख्यालात हमारी मौहब्बत का तो है कुछ और
महसूस कर लो “समझ मौहब्बत” की होती कुछ और

सुरमई रोशन हो जाती कभी कोई शाम
दिल की महफिल सजती उनके ही नाम
अब तो अँधेरों की ही तलाश सदा रहती
अधूरी प्रेम कहानी सब कुछ छिपा जाती

उनकी तस्वीर को सदा भीगी पलकों से छुआ
खुद को खोकर उन्हें अपनी धड़कनों में पाया
प्रेमित हुए फूलों के हर रंग से चेहरा चित्रित किया
तस्वीर अधूरी रही फिर भी इसे “प्रेम” नाम ही दिया

कुछ बैचेनिया आज भी उदासियां दे देती
जब उनमें किसी पलकों की झुकावट होती
बिंदिया उनकी जब भी पसीने से बिखर जाती
आंसूं की बूंद बन मेरे तसव्वुर से निखर जाती

बड़ी बेबाक होती जिंदगी की अजीब राहें
पता नहीं ये किसे कब चाहे कब भूल जाये
प्रीतम से सितमगर तक का दस्तूर निभाये
इनायत की राह में कांटो की चुभन सह जाये

नहीं कहता प्यार में सदा हमारा इकरार रहे
पर इजहार से हर मौसम में सदा बहार रहे
आरजू इतनी समझें कि वफा सदा बेकरार रहे
आलमे तसब्बुर हो जहां की निगाहों में वजूद रहे

✍💖 रचियता 💕कमल भंसाली

💖हमराही💖कमल भंसाली

दोस्तों,
प्यार जिंदगी की असाधारण जरुरत है, जन्म से दिल को इसकी जरुरत महसूस होती है। प्यार अनेक सम्बन्धों में रहकर भी अपने आपको सदा अधूरा ही समझता है। व्यवहारिक और आधुनिक जीवन में प्यार भी कुछ अलग से नकारत्मक तत्वों के कारण अक्सर बीमार ही रहता है। वास्तिवकता के दृष्टिकोण से देखा जाय तो हर रिश्ते का प्यार आजकल ज्यादातर बीमार ही रहता है। परन्तु जीवन है जब तक प्यार की सलामती जरुरी है। पति- पत्नी, प्रेमी प्रेमिका और दोस्ती के रिश्ते स्वार्थ के वशीभूत रहते हुए भी आज वक्त के महत्वपूर्ण साथी है। आर्थिक युग में ये रिश्ते तभी जीवन भर साथ निभा सकते है, जब इंसान झुठ, स्वार्थ, लालच,धोखा और चालाकी से दूर हो अपने द्वारा दिये जानेवाला (हर रिश्तें को उसकी गरिमा अनुकूल) प्रेम, स्नेह और सम्मान को कभी न भूले। प्रस्तुत है, इसी संदर्भ में यह कविता।
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मौहब्बत तो तुमसे ही कि हमने सनम
तुमसे ही निभाई हमनें रुठने की रस्म
खफा जब भी तुम होते तो हम मुस्करा लेते
गैर से लगने वाले अहसासों को भी अपना लेते
💘
खता कहते हो तब तक सितम सब सह लेते
पर बेवफाई का दाग न देना सांसे सहम जाती
इल्जाम तो दर्द के फूल बन सिर्फ महक ही छोड़ते
बेवफा कहते तो जिंदगी निशब्द हो बिखर जाती
💟
जब भी मैने अपने आप को तेरे प्यार में डुबाया
सतह पर तैरती चाहत पर बहुत ही तरस आया
स्पर्श की बेकरारी ने हसरतों की झील में नहाया
तो तल में बसा प्यार हर आलिंगन में उभर आया
💖
तेरे इकरार को ही सिर्फ प्यार नहीं कहता
अपने हर एतवार को में हर क्षण समझाता
संगम जिस्म का नहीं दिल की लहरों का होता
अंदर की रुह तक का यह सफर सुहाना होता
💝
आ चल कसम लेते चाहे युग बदल जाये
सब कुछ बदले पर कदम न हम बहकाये
हमसाया बन एक मंजिल के राही कहलाये
हमराही बन जग में प्यार के फूल ही खिलाये
💔💓💟💖💕
रचियता✍💖 कमल भंसाली

💜अगर तुम💜बनते बिगड़ते सम्बन्धों की कविता✍ कमल भंसाली

जाने से पहले अगर एक बार मुड़कर देख लेते
दिल को शुकुन देते वक्त को गुनहगार न कहते
कल कुछ न बदलेगा कहकर जरा तसल्ली कर लेते
प्यार कभी नहीं मरता ये सोच फिर दरखास्त करते
💅💅💅
धुंधली होती यादें एकदिन सब कुछ भूल जाएगी चौराहे पर साथ खड़े थे उड़ती हुई धूल कह जाएगी
क्षीण होती मुस्कराहट कहीं सिमट कर रह जायेगी
दिल की गहराइयों में बिखरी स्मृतिया लौट आयेगी
💕💕💕
ऐसा क्या हुआ तुम्हारा दिल कभी न स्वीकार पाया
कदम थम गये जब भी नाम तेरा हवाओं में लहराया
तुम्हारे आँचल में सिमटी मजबूरियां बन गई दूरियां
आरजुओं में न होगी फिर हसीन प्यार की ये वादियां
💘💘💘
तुम्हारी मायूस आहटे सन्नाटों को पसन्द नहीं आई
खुश्क दिल से इल्जामों की गूंज दूर तक चली गई
भूली बिसरे स्पर्शो में इंतहा मौहब्बत है जो समाई
बेरुखी ही सही तेरी पर दिल न समझे इसे रुसवाई
💟💟💟
जाना ही तय है अगर दिल की महफ़िल से
तो इतना ही कहेंगे जाना पर आहिस्ता से
नयनों से फिर कहीं भी झांकना विश्वास से
प्यार कोई खेल नहीं समझना इसे सरलता से
💜💜💜
अब भी कहते रुक कर मुड़ जाओं एक बार फिर से
फलसफा प्रेम का जिंदगी को समझाओं एतवार से
प्यार कभी मरता नहीं सदाबहार बनाओं इसे फिर से
टूटे ना आशियाना दिल का गले लग कहो इशरत से
💝💝💝
रचियता✍💖 कमल भंसाली💖

💓दर्द ए वफ़ा 💓कमल भंसाली

अब दिल की नगरी में कोई गली ऐसी नहीं मिलती
जिनमें से होकर तेरी यादों की खुशबू नहीं गुजरती
प्रेम की कुछ निशानियां आज भी अहसास कराती
जिंदगी कुछ लम्हों की नरगिसी नूर बन मुस्कराती
अब…

वक्त कभी हवाओं के संग बहार बन छाया
आज वो ही जुदाई का सदमा सह न पाया
खता उससे कहीं तो हुई पर समझ न पाया
नयनों में तेरे अजनबी सायों को देख न पाया
अब..

तुझे सितमगर कह दूं आज भी ख्याल कोई न आया
रुसवा हुई तेरी मौहब्बत ये दिल कभी मान नहीं पाया
खफा हो फिर भी मनाने का बहाना दिल ढूंढ न पाया
जो बसे धड़कनों में उनकी ही मौहब्बत समझ न पाया
अब…

जाने जा चमन में फूल “कमल” से भी और बेहतर होंगे
पर प्यार के कीचड़ में खिलने की ताकत सब में न होगी
जुनून के फलक में चाहत के सितारे सदा झिलमिलाते रहेंगे
पर सफर ए गर्दीशी रातों में एक चाँद की ख्वाइस सदा रहेगी
अब…

यकीन कर जाने मन सच्चा प्यार कभी भी नहीं मरता
रंग बदलती दुनिया में ईमान बदलते देरी नहीं करता
सच्ची मौहब्बत में हुस्न भी कोई मायना नहीं रखता
दर्द तुमने ही दिया इसलिये आज भी दिल याद करता
अब…

खता ही कह लो पर जरा अपने जज्बात से बात कर लो
अपने खिताबी नयनो को कदर ए मौहब्बत भी समझा दो
दस्तूरी यार जब बेवफा हो जाये तो जिंदगी बेमुराद हो जाये
गम के वीरानों में “दर्द ए वफ़ा ” ही फसलें वुसूक बन जाये
अब…

असहिष्णुता●●●कमल भंसाली

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दोस्तों, आज देश काफी कुछ विषम परिस्थियों से गुजर रहा है, देश में कुछ ऐसा हो रहा है, जो कभी नहीं होना चाहिए। कभी कभी अपने आप से यह प्रश्न पूछने का मन करता है, क्या इतना कुछ देने वाले देश से हम दिल से प्यार करते है ? अगर हाँ कहे, तो फिर हम आपसी प्रेम में नफरत क्यों पाल रहे, शब्दों पर संयम क्यों नही रख रहे, किसी के गलत विचारों को ज्यादा महत्व क्यों दे रहे है। देश हमारा है, इसे सुरक्षित और शांत रखने वाले काम करे, क्या यह हमारा देश के प्रति कर्तव्य नहीं है ? देशप्रेमी वहीं है, जो देश को अशांति, असन्तोष, कलह और हिंसा से दूर रखे। इन सबके लिए जरुरी है, हमारे दिल में देश के प्रति प्यार और मौहब्बत सदा आत्मा में रहे, हम देश की निगाहे दुनिया में न झुकने दे।यह कविता एक छोटी सी मेरी कोशिश है, कवि नहीं हूं, गलती होनी स्वभाविक है, माफ़ करे। प्रार्थना है, हमारा प्रिय देश सदा शांत और खुशहाल रहे।

अंदाज जब मौहब्बत का बदल जाता
खताओं का सिलसिला शुरु हो जाता
गुलो जैसा उम्र भर का मासूम प्यार
अग्नि बन सब कुछ भस्म कर जाता

मौहब्बत का इतना सा ही है, फ़साना
मौहब्बत में ही जीना, उसी में मर जाना
जिसमे हो शंका, वो है, और कोई तराना
टुटा तार दिल का गाता दर्द भरे अफ़साना

हर बन्धन मौहब्बत का ही मोहताज होता
जिससे साँसों को प्यार का अहसास होता
सिर्फ खुदा की मौहब्बत में शुद्ध विश्वाश होता
मौहब्बत नहीं, तो कहां जिंदगी का सारांश होता

हर इंसान प्यार की इबादत का सुनहरा फल
प्यार और मौहब्बत से ही होता जीवन सफल
शंका और खताओं में न खो जाए आज और कल
कहते है ज्ञानी, जो है, आज, अभी, और यह पल

मौहब्बत करने वालों से करनी, इतनी ही आरजू
शब्दों का मूल्यांकन करना, सही जब हो तराजू
इजहार में प्यार हो, व्यवहार में, सही आंकलन
नफरत का एक शब्द, बदल देता हर कोई का ईमान

क्या सही, क्या गलत प्यार नहीं बनाता परिभाषा
मौहब्बत और प्रेम दोनों से जगती सुंदर सी आशा
देश में नफरत के जो बीज बो रहे, उन्हें हो निराशा
भारत के अस्तित्व में जग ने सदा शांति को तलाशा

रखनी है, अगर अपनी स्वतन्त्रता हमें सदा बरकार
समझना जरुरी,प्यार बढ़े,न की नफरत का आकार

★★जय हिन्द
☺☺ कमल भंसाली☺☺