😍अपनी ही फिक्र कर😍 कमल भंसाली

शीर्षक: अपनी ही फिक्र कर

सच्ची मोहब्बत जहाँ में मिलनी कहाँ आसान होती
कुछ कहानियाँ ही उनकी अब किताबों में मिलती

हीर-रांझा, शीरी-फरियाद भूले हुए किस्से हो गये
मकसद मोहब्बत के कागजी बदरंगी फूल हो गये

प्यार अब जिस्म के मिलन का खिलौन भर रह गया
दावा पाक मोहब्बत का जिस्म के बाजार में बिक गया

रुसवाइयों के बाजार में सब कुछ बदला हुआ लगता
रुतबा दिल का नाकामी का टँगा हुआ औजार लगता

गली कूंचों में प्यार के हजारों इश्तहार छाये रहते है
मायूसियों के फंदे में मरे हुए इश्क के साये दिखते है

“कमल” दौर सिर्फ प्यार का मोहब्बत की बात न कर
चाहतों के आशियाने में जायज है अपनी ही फिक्र कर
✍️ कमल भंसाली

शराबी जिंदगी ♀कमल भंसाली

अरमानों के मदिरालय में
खब्बाबों के पैमाने
जज्बातों की मदिरा में
गुजर गई तमाम उम्र
फिर, भी फिक्र नहीं करती, जिंदगी
बता, क्या तू संसारिक नशे में डूब गई
है, किसी को जबाब देना
शायद, यह बात तुम भूल गई

कुछ तो ख्याल कर अपनी औकात का
लड़खड़ाते पैर तेरे
गुणगान कर रहे, तेरी ताकत का
क्या थी क्या, हो गई
रिश्ते, बन्धनों के अंधेरो में
तूं, गिरकर बदनाम हो गई
लोग कहते है, किस्से तेरे बदनामी के
इज्जत की कमीज पर
नशे में कितने दाग लगा गई

मोह, मौहब्बत, प्यार
दुश्मन है, मेरे यार
नशा जितना भी होता मादक
उतना ही है, घातक
संभल जा, कुछ वक्त के लिए
दोष जमाने को न देना
जमाने को वक्त नहीं, तेरे लिए
मान मेरी बात
पीना है, तो पी,
पर जब जग में तूं आई
तो, कुछ अपनी
आत्मा के लिये, जी
तोड़ नशे के सारे बन्धन
पकड़ मेरा हाथ
आ, फिर,
एक बार चलते
कोई नए, उज्ज्वल पथ पर
तुम और मैं, साथ, साथ…..कमल भंसाली

कमल भंसाली