🕴️आहट 🕴️कमल भंसाली

शिर्षक: आहट
धरा पर फूल होंगे, नभ में चाँद और सितारे होंगे
कल हम नहीं होंगे, पर चर्चे कहीं हमारे भी होंगे

गुजरा वक्त किसी के साथ, कहीं किस्सा बनेगा
कभी, कहीं, झुकी हुई पलको का हिस्सा बनगा

कहाँ जायेगे कह नही सकते, पर दिलों में रहेंगे
ये सोच के हम मुस्करा लेते, याद हम भी आयेंगे

तमाम उम्र गुम हो गयी, मंजिले तो वहीं ही रही
बहुत कुछ खो गया, फिर भी उम्मीदें हँसती रही

क्या कहता जिंदगी को जिसे रुलाने की आदत रही
था कभी, अब ये बात वक्त की बहती हवाओं में रही

कल कौन रहेगा ? ये सिर्फ अब राहत की बात रही
अफसोस की चौखट पर मृत्यु की आहट बेजुबान रही
✍️ कमल भंसाली

सम्बन्ध……कमल भंसाली

न आस्मां मेरा, न जग तेरा, फिर क्या तेरा मेरा
जीवन की धूप में ऐसे कभी नहीं आता, सवेरा
उजालों की परवाह न कर, पर अंधेरों से डर
तय कर जिधर जा रहा, क्या वही है, तेरा घर

असत्य की वेदी पर, कितने सत्यों की दी बलि
तू कहता मोह करने, से जीवन फलता फुलता
मेरा तो मानना है, आडम्बरों में जीवन खोता
सच्चा प्रेम ही, जीवन को तत्वपूर्ण पथ दिखाता

प्रेममय है प्रभु, जीवनमयी है, अनिश्चित सांस
फिर क्यों छाए निराशा, जगा जरा सोई आश
मरीचिका के जंगल में मायावी होता सबकुछ
समझ,कुछ भी लालसाओं से नहीं होता तुच्छ

अनगनित के चक्कर में रहे,सारे सवाल अधूरे
उत्तर की चिंता में हमने, कितने जीवन गुजारे
क्या अच्छा नहीं होगा, जरा,इस जन्म को संवारे
परीक्षा लेने नहीं, श्रेष्ठ अंक देने स्वंय प्रभु पधारे

मर्म यही है, सार भी यही, मेरे दोस्त
जीवन मृत्यु दोनों ही हमारे, तुम्हारे
रैनबसेरा के साथी, आज मिले, कल बिछड़ेंगे
बता, तुम्हारे हमारे सम्बन्ध किस जन्म में सुधरेंगे ?……कमल भंसाली