🙏कुछ बात तो तुम में है जिंदगी💃कमल भंसाली

कुछ बात तो तुम में है जिंदगी
जो उदासियों में भी मुस्करा लेती
रिश्तों के दिए नादां दर्द को
हंस कर सहन कर लेती
कुछ….

गम गैर के दिये हो तो न घबराती
पर सवाल जब अपनों का आता
तो शांत हो उन्हें दिल मे समा लेती
टीस का अनुभव कर पीठ घुमा लेती
कुछ…..

कल की आशा में अपने आज को पूरा ही लूटा देती
मोह की कूचिका से सपनों की तस्वीर भी बना लेती
आशा की कलियों से उनमें चाहत के सब रंग भर देती
जब तस्वीर कभी बिगड़ भी जाती तो मंद मुस्करा देती
कुछ…

तूं कितनी खूबसूरत जानकर भी अनजान बन रहती
दूसरों के वजूद के लिए अपना संवरना भी भूल जाती
फूल आंगन के जब कभी सुख जाते आँचल फैला देती
मरती आशा को भी झूठे दिलाशो से वापस प्राण देती
कुछ बात…

सच है जिंदगी तू अनूठी और है अलबेली
कभी सहज कभी न समझ आनेवाली पहेली
कभी तू लगती दुश्मन कभी तू बन जाती सहेली
कभी चार दिन की चांदनी कभी अमावस की दिवाली
कुछ बात…..

हकीकत यही सब की तू है राज दुलारी
प्यार तेरी कमजोरी वफ़ा तेरी है मजबूरी
सांस अंतिम जब लेती तब सब वापस कर जाती
जग का समान जग को सांसे भी प्रभु को लौटा जाती
कुछ बात…..

रचियता✍ कमल भंसाली✍

👒 मुस्करा मन मुस्करा👒कमल भंसाली

मुस्करा मन मेरे जरा मुस्करा
दूर कर आसपास का अँधेरा
आशाओं का दीप जला जरा
आगे तेरे खड़ा है सुनहरा सवेरा
मुस्करा मन…

मन मेरे, जरा सीख ले मुस्कराना
गा जरा कोई उमंगों भरा तराना
क्या परवाह दुनिया के नखरों की
क्यों परवाह करे अपने अधरों की
मुस्करा मन…

सागर की उछलती लहरों संग बह
किनारों से टकराने की चोट सह
सहने में ही जिंदगी की हर लय
न कर भय, तेरी मुस्कराहट अक्षय
मुस्करा मन…

कौन अपना कौन पराया
जिंदगी पर मौत का साया
पल की सांस में कैसा दावा
मुस्करा मन बन बहती हवा
मुस्करा मन…

रंगमंच है यह दुनिया
यहां सब है कलाकार
अभिनय कर मस्त मस्त
न कर तुम इससे इंकार
मुस्करा मन…

अहंकार खलनायकी किरदार
न निभाना इसे एक भी वार
मृदुलता के छेड़ सारे तार
जीवन नहीं मिलता बार बार
मुस्करा मन…

एक मुस्कराहट तेरी करेगी जब स्वर्ण झंकार
मान मेरी, उठेगा, खिलखिलाहटों का ज्वार
हलचल मच जायेगी, धुर्वी फूल खिलेंगे बेशूमार
खुशबूओं में निहित तुम्हे मिलेगा प्यार ही प्यार
मुस्करा मन…..