🏃मुसाफिर🕴️कमल भंसाली

शिर्षक: मुसाफिर

सफर के साथी कहाँ तक साथ निभाओगे
मंजिल तुम्हारी आते ही तुम उतर जाओगे
न भूलना कभी भी, जिंदगी मुसाफिर खाना
सफर हमारा- तुम्हारा सदा रहे योहिं सुहावना

आज साथ है, कल शायद बिछड़ जायेंगे
बीते हुए पल कभी तो हमें याद ही आयेंगे
एक फूल थे गुलदस्ते के हम, मुरझा जाएंगे
सफल होगा सफर, जब- तब हम मुस्करायेंगे

अफसोस को नहीं खुशयों को जग जाहिर करेंगे
फिर कभी मिले तो फूलों की तरह खिल जायेंगे
न भी मिले तो सह-असितत्व की ईंट बन जायेंगे
एक सुनहरे जग की कल्पना, साकार कर जायेंगे

फूल है हम, काँटो के सँग भी कभी रहना होगा
दौर सफर का है, दर्द भी कभी-कभी सहना होगा
ख्याल इतना ही रखना, मंजिल तक साथ निभाना
तुम और मैं कहकर बीच सफर उदास न उतर जाना
✍️ कमल भंसाली