👉मायूसी👈 ♿कमल भंसाली

क्यों ख़फ़ा सी रहती जिंदगी
क्या हुआ ऐसा तेरे साथ
जो मायूसियों की
तस्वीर तुम में दिखती
उदासिया
चेहरे की सरजमीं पर
हर रोज
गश्त लगाती

तुम सबको बेवफा, खुद को
वफ़ा का वरदान समझती
सँभल जरा
हकीकत कुछ और कहती
जिंदगी
तुम्हारी ना समझी से नहीं
समझदारी से आगे बढ़ती

सोच जरा
अंधेरों में ही शंकित जुगनू चमकते
जरा उजाले की तलाश कर
जिन्हें तू कांटे कहती
वो ही सच्चाई के फूल
जरा मेरा विश्वास कर
इस पल को ही जी
आगे की अभी बात न कर
अपनी असफलताओं को
सरे आम बदनाम न कर
क्यों खफा….

जरूरी नहीं
संसार में हर रिश्ता हो अपना
हर एक को समझ भुला सपना
फलसफा यही है जीने का
जो तेरा
वो ही है यथार्थ
बाकी का चिंतन भी व्यर्थ
समझले तो
बन जाएगी तूं सक्षम, समर्थ

लग रहा
कहीं न कहीं तेरा स्वार्थ
तुझको नया पाठ पढ़ा रहा
गलत सबक
तुझे याद करा रहा
निस्वार्थ हो
तलाश स्वयं को
लक्ष्य क्या है, तेरा ?
पहले तय कर
फिर
उधर ही प्रस्थान कर
राहों में जो मिले
उन्हें दूर से ही
सिर्फ “नमस्कार” कर
दुनिया की
सीमितता को समझ
फिर
अपनी नई मंजिल तैयार कर
रुकावट पर
खेद जरूर प्रकट कर
पर, मुस्करा कर
हो सके
तो
निःसंकोच हो
उसी तरफ
एक बार फिर प्रस्थान कर
सफलता को साकार कर

मान निश्चित
जीवन जब होता संचित
नई आस्थाओं का
“सूरज”
गहनतम धुंध में
हर दम नजर आता
तय है
देर से जो आता
वो भटका नहीं कहलाता
आलोकमय हो सदा मुस्कराता
मायूसियों का अंधेरा यों ही छंट जाता
धरा के नभ पर
चाँद बन जग को शीतलता से नहलाता
मायूसियों का ह्रास हों
जग से
ये प्रयास करता
क्यों खफा….

रचियता✍ कमल भंसाली

वो, ख़ुशी कहां से लाऊं

ऐ मेरे दिल
तू ही बता
वो, ख़ुशी कहां से लाऊं
जिससे तेरा मन बहलाऊं

आग जो तेरे सीने में जलती
वही चेहरे पर मुस्कराती
तू बता मेरे दिल
किस नीर से तेरी
ये आग बुझाऊं
बता ना, ऐ मेरे दिल..

दस्तूर तू गम का जाने
प्रेम का बदलता रंग जाने
आशा में जीने की सजा जाने
जीना है, जीने का खौफ न कर
ऐ मेरे नादान दिल
मुझे यह बता जरा
कौन सी मरहम लगाऊं
तेरे सारे घाव भर जाए
सदा तू, खिलता ही जाए
बता ना, ऐ मेरे दिल..

देख, दुनिया की विचित्र तस्वीर
न हो मायूस, न ही बदल ढंग
लोगों की परवाह करके
निराशा का बादल न बन
तू तो है,मेरा मन उपवन
बता वो कौनसी शक्ति
जिससे तुम्हे फिर सजाऊं
बता ना, ऐ मेरे दिल..

आरजू, इतनी ही तुमसे
दिल तोड़ने वालों का
कभी जिक्र न कर
मौहब्बत के मैदान में
हार की फ़िक्र न कर
जिन्दादिली तेरी फितरत
उस पर शंका न कर
बता वो कौनसी बाजी
जीत कर दिखाऊं
जिससे तेरी ख़ुशी वापस लाऊं
बता ना, ए मेरे दिल…

【कमल भंसाली 】

कमल भंसाली