👉बदले युग की शुभकामना👈 कमल भंसाली

जग जाओगे तो हार जाओगे
उठ कर चले तो गिरा दिये जाओगे
बदले वक्त का फलसफा
आवाज की, तो हो सकता
फिर कोई दीपावली न मना पाओगे

सुनना ही, अब सही लगता
बोलने से आजकल मुँह थकता
आलोचना, तो जहर है
प्रशंसा की सर्वत्र बहती लहर है
नेता नहीं हो, कुछ कहना कहर है

ईमान को धर्म न समझना
कर्म का जब नहीं कोई पैमाना
बिन मेहनत के तयः है मिलना
बस तुम्हें स्वयं को समझाना
अब आश्वासनों का है, जमाना

देखो तो लक्ष्मी, खुद अब लाचार
पाने के खुल गए, हजारों द्वार
विवेक हीन बुद्धि का चमत्कार
अच्छा आदमी हुआ अब बेकार
बेईमानी का नाम हुआ, कारोबार

कौन सा दीप जला रहे हो इसबार
सवर्त्र राज्य कर रहा, खुद का अँधकार
सोये हुए का यही होता फायदा
जब रोशनी का नहीं रहा कोई कायदा
भूल से भी कभी नहीं देखना आईना
जब जिंदगी नहीं पास, देखने का क्या मायना
हाँ, दीपावली अब भी शुभ है, खुशी से मनाना
शुभकामना, हो सके तो, पढ़कर फिर न सो जाना
✍️ कमल भंसाली