💔अधूरापन💔 कमल भंसाली

जिंदगी रास न आई फिर भी डटा रहा
पथ की मजबूरियां सहन करता रहा
कल बेहतर होगा ये चिंतन करता रहा
ऐसा क्यों हुआ नहीं, हुआ तलाशता रहा !
🌼
सुख के पुष्प पास होते तो जीवन सजा लेता
हर रिश्तें की गरिमा को चांदिनी से नहा देता
अपनों की महफ़िल में खुशबूओं को बिखरा देता
स्नेह के सारे रंग सम्बन्धों के पैमाने में उंडेल देता
🌺

जिंदगी कहती मुझसे अक्सर देख मुझे करीब से
हर कोई को नहीं मिलती, मै तुझे मिली नसीब से
पर न इतरा न ही इतना छितरा समझ मुझे जरा
मेरे आँचल के हर पहलू में तेरे लिये ममत्व भरा
🌻
क्या हुआ अगर कुछ हासिल तुम्हें नहीं हुआ !
क्या फर्क पड़ेगा अगर कोई तेरा नहीं हुआ !
मजबूरियों को दहशत नहीं अवसर ही बना
रुके कदमों को ठहराव की वजह कभी न बना
🌹
समझ गया जिंदगी का अधूरापन
मेरा स्वयं से ही है बेजान अपनापन
रिश्तों के मोह से दिल रिसता रहा
पाने को बहुत था मैं ही खोता रहा…..
✍ रचियता 💝कमल भंसाली

जख्म प्यार का, दर्द दिल का

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“देख जमाने के हर सितम
“प्यार” हो गया, कमजोर
अब बदल गया, सब कुछ
नहीं चलता, उसका जोर”

कल तक इन्सान जिसे सदा दिल में रखता
आज पता नहीं, वो “प्यार”अब कहां रहता ?
खुदगर्जी ने लुभाया, सदा अब उसकी चलती
बिन प्यार शब्द, उसकी भी शायद नहीं निभती

कल तक का इंसान, प्यार का पूर्णता से कायल
आज इंसान अपनी बदलती फितरत से घायल
ख्वाईसों ने बदल डाला, आज हर इंसानी चेहरा
खुशियों का मोहताज हो रहा, इंसानी दिल बेचारा

सदियों से दिल टूटता आया, सबने समझा उसे ही खिलौना
प्यार ही हुआ बदनाम, दिल ने सदा उसे ही गुनहगार माना
बेवफाई सनम की, जब बर्दास्त की हर हद पार कर जाती
प्यार और वफ़ा की हर कसम, दिल को चूर चूर कर जाती

कल तक झूठ से कतराता, आज उसी का ही बिगुल बजाता
कल गुनाह कर शर्माता, आज उसे अपनी उपलब्धि बताता
बेशर्मी की हर हद से गुजर, जी रहा, प्राणी बेखबर, बेअसर
फिर भी कहता हर जिस्म, आ मुझे प्यार कर, बेशुमार कर

प्यार जिस्म की भूख नही, दिल की आरजू होती
बिन प्यार आत्मा की कोई उपासना पूर्ण नहीं होती
सच्चा प्यार बिन शब्दों के, रोम रोम से आवाज देता
इंसानी रिश्तों के गुलशन में, सत्य की महक फैलाता

समझने की बात है, इसलिए प्यार की व्याख्या करता
प्यार एक प्रवाह है, हर प्राणी के खून में बहता रहता
प्यार को खुदगर्जी को जहर न पिलाना, यही मानवता
रिश्तों और बन्धनों से बंधा जीवन ही, स्वर्ग कहलाता

प्यार आज भी कहता, मोहताज नहीं, मैं उपहार का
न मैं कोई दस्तावेज व्यवहार और कोई व्यापार का
दस्तखत दिल पर करता, हर कसम, वादा पूर्ण निभाता
नयनों की भाषा से, हर खुदगर्ज को पहचान भी जाता

कहना है, प्यार की गागर हर पल छलके, पर न टूटे
जग चाहे छूटे पर, पर दिल किसी का कभी भी न टूटे
प्यार हर सम्बन्ध का अस्तित्व, है, विश्व का स्थायित्व
सत्य से प्रेम का सबंध, प्यार का ही कोई अमृतमय तत्व…….कमल भँसाली

🐲ईश्वर की सन्तान🐲….🐤…कमल भंसाली🐤

सितारे, कितने ही गर्दिश में, क्यों न हो ?
आसमान, अपनी चादर में समेट रखता
सन्तान, कितनी ही नालायक, क्यों न हो ?
माता-पिता का प्यार, कभी कम नहीं होता

हकीकत, यही है कहती
सन्तान के लिए ही, वो जीती
उसी सन्तान को, सही राह दिखाते
दुनिया के, हजारों जहर पीती

भूल करे “वो”, सब अपने सर लेती
खुद को गलत, मार्ग दर्शक समझती
अफ़सोस की, कितनी बेबस करवटे
रात की तन्हाई में, इधर उधर बदलती

सन्तान गलत हो, तो नजर झुक जाती
उम्र की सारी रेखाएं, एक साथआ जाती
वो, कुछ नही बोले, पर चेहरा बता जाता
उनकी, सन्तान को सही राह चलना न आता

दुनिया के सुख न मिले, गम नहीं
पर, “सन्तान” किसी की न राह भूले
फूल खिलने की ख़ुशी, चाहे न मिले
हे, प्रभु, खिल कर, “जहर” जग में न फैले

बेजान दिल की, नासमझ सन्तान
कितना ही कर ले, उम्र का अभिमान
कितनी ही प्रगति की, सीढ़ियां चढ़ ले
पर उससे पहले, यह पाठ जरुर पढ़ले

जो जैसा, और जितना, सुख दुःख देता
वो उस से दुगना, उतना ही वैसा पाता
यही सत्य है, यही है, सार्थक जीवन तत्व
माँ बाप से बड़ा, इस जग में कोई नहीं होता

भ्रम में जो रहते, वो धरती का बोझ कहलाते
अपने अस्तित्व जनक को, शर्मिंदगी दिलाते
जो माता पिता के चरणों में, स्नेह से झुक जाते
वों, ही सच्चे, शुद्ध, “ईश्वर” की सन्तान कहलाते………

कमल भंसाली