💔मंजिले प्यार की💔 कमल भंसाली💝


कल रुखसत हुआ था तेरी जिंदगी से
यह सोचकर, वापस बुला लोगी कभी
न तुमने आवाज दी,न मुड़कर मैने देखा
मंजिले प्यार की, सब कुछ इसमेंअनोखा

चाहते प्यार की सदा बदनसीब ही रही
तड़पता दिल रहा, नजरें मुस्कराती रही
दो शब्द होठों पर, प्यार तलाशते ही रहे
न तुमने कुछ कहा, अहसास अधूरे ही रहे

मिलन की चाह में तमाम उम्र गुजर गई
राहें अब हमारी सदा के लिए बिछड़ गई
अजनबी बन कर जीवन रेखाएं बदल गई
कसक से तड़पती यादें हिम बन पिघल गई

खता ही कहा तुमने, मेरे प्यार को न समझा कभी
शिकायत कैसे करुं जब अपना ही न समझा कभी
दस्तूर दुनिया के निभाये, चाहत से सदा अनजान रही
भूल जाओ जाने वाला को, यही तेरी वफ़ा की कद्र रही

चलों विदा दो, इस जिंदगी शायद फिर न मिले
मिल भी अगर गए तो अजनबी रहकर ही मिले
कल जब और फूल खिले कभी, महक समझना
दिल किसी का तोड़ कर, फिर मुंह मोड़ न लेना

रचियता ***कमल भंसाली***