खेल है, प्रेम ..सांप सीढ़ी

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दस्तूर, दिल, “प्यार” का सभी ही निभाता
फिर भी वो कभी उसे नहीं समझ पाता
अढ़ाई अक्षरो की टेढ़ी मेढ़ी पगडण्डिया
लगता है, कोई खेल रहा है, साँप सीढ़िया

प्यार को समझा, जाना क्या चीज है प्यार ?
खेल है, पेचीदा, हर कोई इसे खेले, मेरे यार
प्यार वादों पर ही फलफूलता, करता इकरार
फिर भी नहीं निभता, इसमे भी होता, तकरार

जीवन के साँझ सवेरे, लगते रहते, न्यारे प्यारे
प्यार की नागिन, जब मोह की फुंफकार मारे
तन घबराये, मन फिरे, फिसल कर ढूंढे किनारे
खेल खिलाड़ी, कहते आसमान से चाँद सितारे

प्यार जीवन की पट्टी पर ही फलता फूलता रहता
वक्त के पासो से ही पीछे होता, उसी से बढ़ते रहता
कठिन रास्तों से गुजर कर प्यार मंजिल तलाशता
उस मंजिल पर पंहुचना, ही है, इस खेल का वास्ता

पर हकीकत में, ये खेल नहीं है, है एक उपहार
बन के न बिगड़े, ऐसा रहे सबका अगर व्यवहार
समझलो, जीवन गुलशन उसका रहेगा, सदाबहार
दिल को बहलाने का, ये ऊपरवाले का नायाब उपहार…..

★★★★★कमल भंसाली★★★★★

आ मुस्करा ले जरा…

कुछ पराये ख्यालों से
नाराज न हो जिन्दगी
कुछ तुच्छ गम से
गमगीन न हो जिन्दगी
खुशियों के समुद्र में
जिन्दादिली की लहरों में
उतर कर मुस्करा, जिन्दगी
ये ही एक पल है, तेरा
आ मुस्करा ले जरा …..

कालधर्म को बहने दे
दुःख को भी नाचने दे
अपेक्षा में न बसा संसार
न ही अपने को धिक्कार
न ही रख मन में विकार
जो मिला कर,वही स्वीकार
ऐसा ही दे जिन्दगी को आकार
सपने सब ही होंगे साकार
ये ही एक पल है, तेरा
आ मुस्करा ले जरा…..

जो तेरे पास वही तेरा
दूर से ही आता सवेरा
थोड़ा सा सबसे फासला
और तेरा नायाब हौंसला
नहीं होने देगा, कभी मजबूर
न नाप किसी का कसूर
कोई नहीं होता,यहाँ पूर्णावतार
नहीं ही जग होता, किसी की जागीर
ये ही एक पल है, तेरा
आ मुस्करा ले जरा……

देख चमन की ओर
कितना उत्साह, कितना शोर
प्रामन्य नहीं, तेरा अवसाद
प्रकृतिकृत ही तेरा, अपना विषाद
सारगर्भित ज्ञान ही, धर्म का आधार
समुत्थान, सिद्धिदायक कर मंगलाचार
आ चल चलते प्यार के चमन में
मुस्कराहट के फूल उछाले गगन में
ये ही एक पल है, तेरा
आ मुस्करा ले जरा….

कमल भंसाली