जीवन रथ

जीवन रथ, भूल अपनी राह
गलत दिशा की ओर मुड़ जाता
भ्रमित सवार, बिन किसी चाह
पतन की खाई में गिर जाता

कितना लम्बा ही हो सत्य पथ
पर सही और वास्तिवक रथ
धैर्य से सामान्य गति वाहक
अपनी मंजिल का सही नायक

चालक कितना ही हो चतुर
केन्द्रित मन को रखे तैयार
टेडे मेडे रास्ते आयेंगे बार बार
संयमित होकर करे उन्हें पार

सब को तलाश, अपनी मंजिल
मेरा रथ नहीं, इसका अपवाद
पार करने पर्वत, नदी, और ताल
ध्यान रखूं, न किसी से हो विवाद

मधुरमय चेतवानी से नेक पथ पर चलना
दुसरों को,अपना ही हमसफर समझना
उस पथ पर ही तुम, मेरे रथ तुम चलना
जिस पथ पर चले, सच्चा सीधा इन्सान
उसी पर आगे रहते हम सबके भगवान…….
★★★कमल भंसाली★★★

कमल भंसाली