” यौवन”…नाम ही तुम्हारा……कमल भंसाली

मन मुस्कराये
दिल घबराये
कभी रुलाये
कभी हंसाये
“यौवन” नाम ही तुम्हारा
कैसे, कैसे ख्याल लाये

एक झलक
एक मुस्कराहट
एक कटाक्ष
नयनों में
कितने, सपने जगाये
अनुशासित मन, बागी कहलाये
“यौवन” नाम ही तुम्हारा…

एक फूल के
अहसास से
महकना, तुम्हारा
चिड़ियों की
तरह फुदकना, तुम्हारा
एक स्पर्श से
चहकना, तुम्हारा
कितनी रंग रैलियां मनाये
दिल तुम्हारा
“यौवन”, नाम ही तुम्हारा…

कुछ कुछ को
बहुत कुछ समझ लेना
अनजानी दुनियां में
सब कुछ खो देना
उपहारों में बसा प्यार
आज नकद, कल उधार
शंकित, प्रेम की नाव
कभी किनारा, कभी मझधार
ऐसे कितने दस्तूर निभाता
पता नहीं कब आता
बिना कहें कब चला जाता
“यौवन”, नाम ही तुम्हारा…

…..कमल भंसाली

कमल भंसाली