विदाई 2016 

आओं, नमन विदाई दे, भाई
विगत साल से हो रही, जुदाई
जाना आना, प्रकृति का उपहार
विगत शुरु करता, सुख का आधार

जानेवाले को करते है, प्रणाम
आनेवाले का भी है, अभिवादन
यही है, जीवन का सच्चा बन्धन
इस बन्धन को सलाम, सलाम

नया साल सबका हो, शुभकारी
अनभुव और ज्ञान से, उपकारी
मानव का मानव से, हो कल्याण
जीवन से न करे कभी, कोई पलायन

देखो, सर्द ऋतू लालनीय मुस्करा रही
फूलों से, वादियों को दुल्हन बना रही
नये साल का भास्कर भी होगा, प्रखर
उल्लासित मन पायेगा,सफल शिखर

हर साल है,अनूठा, न सच्चा, न झूठा
वक्त का करिश्मा,कितना तीखा मीठा
सत्यता की धुरी पर ही घूमता, हर वर्ष
कभी गम, कभी खुशी, स्वीकृत सहर्ष

अनुभव विरासत की देकर कर रहा, विहार
जगत जननी जन्मभूमि को कह रहा, नमस्कार
आनेवाले का जाना तय, यही है जीवन सफर
नव में रहे, विगत के सभी प्रारब्ध विधाता के संस्कार…..

कमल भंसाली