🌷मंगलकामनाएँ उन्नतमय नववर्ष की🌷कमल काव्य सरोवर🌻 कमल भंसाली🌻 शायर भंसाली द्वारा

🌹 ⏰🌹 दोस्तो, “कमल काव्य सरोवर” ब्लाग साइड (wordpress.com )तीन साल की अवधि में अब तक लगभग चालीस देशों से 25000 लोगों के द्वारा दृश्यत किया गया और 110 फॉलोअर से जुड़ा और लगभग 500 रचनाओं से सजा इसके लिए सभी को नववर्ष की शुभकामनाओं सहित अभिवादन करता है। आप सभी हिंदी भाषी साहित्यिक प्रेमियों का साथ सुहाना और मन प्रफुल्लित करने वाला हमें सदा मिलता रहे, ये हमारी भी प्रार्थना है। ‘शायर’ मेरी सिर्फ जीवन साथी ही नहीं है, वो मेरी सारी रचनाओं का अंतिम सम्पादन करती है, उसे भी नववर्ष की मंगलकामनाए। ” नया वर्ष शुभता भरा हो आपके लिए सफल वर्ष रहे” शुभकामनाओं सहित✍💘कमल भंसाली

नव वर्ष का आया नया सवेरा
चारों दिशाओं में है, उजियारा
हर दिशा से एक ही है,प्रार्थना
हर जीवन सुखी हो, यही कामना
नव वर्ष…..
🌞

नए आयामों का हो, हर नया सफर
पथ में हो कई सफलताओं की डगर
रिश्तों में छाई रहे मृदुलता की बहार
सद् भावनाओं के खुलते रहे नए द्वार
नववर्ष….
🎁

हर मानव का हो,प्राणी मात्र से प्यार
अहिंसा का ही हर दिल में हो विस्तार
कल का दुःख, आज में कभी न समाये
ईष्या, द्वेष की भावना कभी मन न लाये
नववर्ष…
🔔

हम उसी राह चले, जहां धर्म के फूल खिले
हमें सदा स्वस्थ, स्वच्छ पर्यावरण ही मिले
प्रयास हो, हर कोई एक दूजे से गले मिले
साल जब ले विदा, तो प्रेरणा उसी से मिले
नववर्ष…
📚

साल यह सबके लिए हो पूर्ण सुखद व परोपकारी
समृद्धि, प्रसन्नता, सम्पन्नता के सब हो अधिकारी
स्नेह, प्रेम, स्वास्थ्य न हो, किसी की कोई मजबूरी
मंगलकामनाये, शुभता की बरसात सदा रहे जारी
नववर्ष…
🌜⭐🌟🌟🌟🌛

(नया साल आप को स्वस्थ, सम्पन्न व सुखी बनाये
इन्ही भावनाओं के साथ नव वर्ष की शुभकामनाएं…🎂.***शायर भंसाली 💝 कमल भंसाली***🎁

01/01/2018

🌞उपहारमय⭐ 🎡२०१८ 🎡 आपके लिये ✍कमल भंसाली

यह साल भी हमारे जीवन में अपना अंतिम क्षण तक का सफर तय कर अपनी मंजिल की पूर्णता की ऒर बढ़ रहा है,और एक नये साल का तोहफा हमें देने की तैयारी भी कर रहा है। हमें उसके इस तोहफा का अहसास है, हम भी उसके स्वागत के लिए कई तरह की तैयारी कर रहे है, इस आशा से शायद यह मेहमान हमारे जीवन को आनन्दित और मंगलमय करेगा। मेरी भी यही प्रार्थना हम सबके लिए है, कि हम अपने जीवन को आनेवाले साल में सुखी जीवन का आधार बनाये, और उसे प्रफुल्ल और आनन्दित बनाये। कोई भी मेहमान जीवन भर हमारा साथ नहीं निभाता परन्तु उसके साथ बिताये क्षण जीवन को बहुत कुछ ऐसा अहसास करा देता है, जिससे हमें यह अहसास तो जरुर हो सकता है, कि हम भी यहां मेहमान है, हमारी भी जीवन अवधि है, हमको भी किसी ख़ास जरुरत के अंतर्गत ही यहां मेहमान बन कर आना पड़ा है। अतः हमारा जीवन सदा प्रेरणामय बने, यही अगर हमारा इस साल का अपने आपसे एक पूर्ण वादा रहें और हम अपने इस मकसद को इस साल की उपलिब्धि का प्रेरक लक्ष्य बनाये, निश्चित है, नया साल हमारे लिए मंगलकारी होगा।

“जीवन एक अनबूझ पहेली” पता नहीं किस दार्शनिक ने किस सन्दर्भ में जीवन को इस स्वरुप में परिभाषित किया, हो सकता है जीवन की कुछ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष न समझने वाली घटनाओं ने उस दार्शनिक को मजबूर किया हो, जीवन को इस तरह परिभाषित करने को। परन्तु सभी को जीवन इस तरह का अनुभव नहीं करा सकता क्योंकि जीवन की अपनी कोई विरासत नहीं है, वो तो लयमय ही चलता है। चूँकि निरन्तरता ही उसका स्वभाव है, अतः हर क्षण चलना उसकी मजबूरी है। जीवन की जिम्मेदारी प्राणी के शरीर, मन, और आत्मा अनुमोदित कार्य को सम्पूर्ण करना है। अतः हमारे लिए जरुरी है, हम अपने जीवन का आंकलन सूक्ष्मता और समझदारी से करे, तो जीवन हमें मित्र ही लगेगा l सही जिंदगी स्वभाविक रफ़्तार से प्रेम, स्नेह, और आपसी समझ का सही उपयोग करती है, तो कहना नहीं पड़ सकता की जिंदगी न समझने वाली कोई वस्तु या फिर कोई असामान्य सूत्र है।

जिंदगी का फलसफा उम्र के हिसाब से न चलता, तो सफलता और असफलता का अनुभव कोई प्राणी शायद ही कर पाता और अनुभव की कभी कोई कीमत भी नहीं आंकता। धरती पर जन्म के बाद जब इंसानी शरीर को कपड़े के आवरण से ढका जाता है, तो हकीकत में उसे समझ में आ जाता है, कि उसे एक ऐसा जीवन मिला है, जो संसार के लिए जरुरी है और प्रेम और स्नेह से उसका स्वागत हुआ है, तो निश्चित है, उसे भी अपने कर्मो की जिम्मेदारी धीरे धीरे समझनी होगी और जब किसी की मौत से उसका पहला साक्षात्कार यह समझा देता है कि जीवन मिलना भाग्य की बात है और मृत्यु होना समय की बात है। तब उसकी समझ में यह भी आ जाता है कि दूसरों के दिल में रहना ” अच्छे कर्मो” की बात है। अगर शास्त्रो की बात करे, तो वो भी ऐसे दर्शाते है कि कर्म ही जन्म निर्माण में लम्बी भूमिका निभाते है। इंसानी शरीर काफी विकट होता है, वो जल्द मौत को स्वीकार नहीं करता तभी तो एक आदमी के मरने के बाद भी उसका ह्रदय 10 मिनट, मस्तिष्क 20, आँखे 4 घंटे, त्वचा 5 दिन, हड्डिया 30 दिन तक जीवित रह सकती है। सूक्ष्मता से अवलोकन करने से जीवन स्थिति और आधार को कुछ हद तक हम अपने जीवन उद्देश्यों को सही मार्ग और सन्तोषमय बनाने की कोशिश कर सकते है, जो उचित भी है। एक साधारण मानव का जीवन सिर्फ दो स्थितियों का अनुभव ज्यादा करता है, सुख, और दुःख का उन्हें आप आनन्द, गम या और कोई अनुकूल शब्द दे सकते है पर जीवन यहीं लक्षित करना भी गलत होगा क्योंकि आत्मिक सन्तोष का जब तक जीवन को अनुभव नहीं हो, तो वो अधूरा ही रहता है। भारतीय पूरातन सभी शास्त्र हमारे जीवन को काफी गंभीरता से लेकर उसे श्रेष्ठ बनाने में विश्वास करते है, तभी उन्होंने जीवन को सहज प्रक्रिया के तहत् न रखकर सृष्टिकर्ता का दिया उत्तम उपहार माना।

आज जो संसार का स्वरुप नजर आ रहा है, उसमे शायद मानवता कठिनतम यात्रा के पड़ावों से गुजर रही है। समझदार होती मानवता नासमझी को अपनी बुद्धिमानी समझ उसका उपयोग कर रही है। जीवन की जो न्यूनतम जरुरत होती है, उसमे भोजन, पानी तथा हवा का शुद्ध होना हर एक प्राणी के लिए अत्यंत जरुरी है, नहीं तो जीवन को शारीरिक सुख का अनुभव होना मुश्किल ही लगता है। आज वो इनको ही अर्थ उपार्जन का साधन समझ कर इनका दुरुपयोग करने में नहीं हिचकिचा रहा। नैतिकता के हजारों पाठ पढ़ने वाला इंसान अपनी लालची मन की सीमाओं संयमित करने की जगह उसे बढ़ावा दे रहा है। अच्छी तरह से जानते है हम, सदाबहार नहीं हम परन्तु सुख दुःख की परिभाषाओं के अंतर्गत ही तो जीवन मापते है, और आज हम सबसे ज्यादा तनावग्रस्त जीवन जी रहे है। क्या ये हमारी स्वयं निर्मित मजबूरी है ? आप और हम शायद संकोच वश इस प्रश्न का उत्तर देने में टालमटोल करे, पर हकीकत यही है,इंसान ही इंसान का आज शत्रु ज्यादा मित्र कम नजर आ रहा है। इसका एक ही कारण है, हम अशुद्ध विचारों के मालिक बनते जा रहे है, पवित्रता हमारी सिर्फ जबानी जमा खर्च का हिस्सा बन कर रह गई। इसलिए जीवन एक पहेली बन कर रह गया। हर रोज इसकी हर नई पहेली का उत्तर देना हमारी जिंदगी का अनिवार्य हिस्सा बनता जा रहा है। अपेक्षाओं के संसार में हमारी निरहिता स्पष्ट झलक दे रही है, और हम बेखबर आज भी उस जीने में लगे जो शायद समय गुजारने के अलावा कुछ भी नहीं लगता।

दोस्तों, नये साल की नई सुबह की पहली किरण से अपनी चेतना को अगर स्फूर्ति, आनन्द देना का ध्यान हों तो कुछ नया चिंतन कर आप उसे अपने जीवन को प्रभावकारी बनाने में सफल हो सकते है, एक अंग्रेजी कहावत है “A good begning makes a good end” ।

हमारे जीवन के कुछ क्षेत्र है, हो हमारी दैनिक जीवन को महत्वपूर्ण बनाता है, उन्हें याद कर उनसे निर्मित गुणों के चवनप्राश का रोज उपयोग करे, तो शायद ही हम इस साल में निराशा को अपने आसपास फटकने दे, और गतिमय जीवन की लय बिना रोकटोक अपनी मंजिल की तरफ अग्रसर होती रहेगी।

मुख्य क्षेत्र जो जीवन साधना के हिस्से है, उनमें जो हमें महत्वपूर्ण बना सकते है, उनकी एक संक्षिप्त सूची नीचे तैयार कर, हमें इस साल इन पर गौर करना चाहिए, वो हो सकती है….( मेरे अनुसार)

1. अमूल्य समय की सही उपयोग की समझ
2. व्यवहारिक सन्तुलन हर कार्य और सम्बंधों के निर्वाह में
3. हर रिश्ते की गरिमा पहचान उसका मान बढ़ाना
4. प्रेम और स्नेह का दिल में स्पंदन
5. समझदारी से पूर्ण संवेदनशीलता
6. चारित्रिक सक्षमता को मजबूत रखना
7. ईष्या, द्वेष, लोभ, हिंसा, कपट को रोज जीवन द्वार से बाहर फैंकना
8. स्वास्थ्य और पर्यावरण को स्वस्थ रखना
9. आशा, आस्था, सत्य और विश्वास का जीवन में सदुपयोग करना
10. संघर्ष, संयम, नैतिकता, देश, धर्म, दया समावेश जीवन में रहना
11. हार को जल्दी से स्वीकार न करना, सतत प्रयासी जीवन जीना
12. आर्थिक, सामाजिक जीवन को मजबूत बनाना

नववर्ष के आगमन को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण अंश बनाने के लिए हमें कुछ शक्तिवर्द्धक सिद्धान्तों को समझ कर उनका शुरुवात से ही पालन करने की दृढ़ता होनी चाहिए। इसका प्रभाव आनेवाला वर्ष हमें एक सार्थकता आभास जरुर दे सकता है, जो जीवन को एक अद्धभुत मानसिकता तो देगा ही, साथ में हमें कभी भी किसी चुनोती के सामने लज्जित नहीं होने देगा। शायद यही सफलता का सही मापदण्ड होता है।

कुछ जीवन विशेषज्ञों के अनुसार कुछ स्वयं सिद्ध सिद्धांत हर जीवन को सार्थकता अनुभव करा सकते है, उनमे से कुछ तथ्य उदाहरण स्वरुप प्रस्तुत करने की कोशिश की है। आप भी अपनी जरुरत के अनुसार बना कर उन्हें अपनाने की चेष्टा अगरआनेवाले साल के प्रारंभ से कर सके तो शायद यह सोने में सुहागा जैसा प्रयोग आपके जीवन में माना जा सकता है।

1. आशा किसी से भी नहीं करना।
2. सत्य बहुत सी आफतों को दूर रख सकता है।
3. आलोचना दैनिक जीवन में सिर्फ वैचारिक तो हो पर व्यक्तिगत नहीं।
4. अपनी गलती का मूल्यांकन कर, स्वीकार करना उचित है।
5. सात्विक और पौष्टिक आहार स्वास्थ्य और मन दोनों को दमदार बनाता है।
6. समय के अनुरुप अपना बदलाव उचित होता है
7. मितव्यता और संयम को सच्चे दिल से अपनाना सही है।
8. सही दिनचर्या समय का सही उपयोग करा सकती है।
9. अच्छा साहित्य सही जीवन दर्शन का ज्ञान करा सकता है।
10. सिर्फ सार्थक परिश्रम से जीवन को आर्थिक व सामाजिक महत्व मिलता है।

आप अपने जीवन को जिस तरह दृष्टिमय बनाना चाहते, उसी अनुसार उन क्षेत्रो को और जोड़ हर नये साल को और नवीनतम कर सकते है। सिर्फ ध्यान रखने की बात यही है की ” आप जब तक कुछ हासिल नहीं करोगे, जब तक उसकी शुरुवात नहीं करोगे”।


आशा सहित, मंगलकामनाये, नया साल आप सभी को प्रफुल्लित और आनंदित जीवन का उपहार दे।…….लेखक💐.कमल भंसाली💐

👯नववर्ष तो सिर्फ एक बहाना है👯✍कमल भंसाली


नववर्ष तो सिर्फ एक बहाना है
मुझे तो नव चिन्तनों से नहाना है
आपसी प्रेम को और बढ़ाना है
रुठों को फिर एक बार मनाना है

नववर्ष तो सिर्फ एक बहाना है
टूटे साँसों के तारों को जोड़ना है
अपनी लापरवाही को समझाना है
मूल्यवान स्वास्थ्य को वापस लाना है

नववर्ष तो सिर्फ एक बहाना है
मकसद को मंजिल का दर्शन कराना है
कर्म के पथ पर आगे बढ़ते ही जाना है
जीवन का आस्थाओं से संगम कराना है

नववर्ष तो सिर्फ एक बहाना है
हर पल की कीमत को बढ़ाना है
घट रही जमा पूंजी को समझना है
गुजरे पल को धरोहर बना रखना है

नववर्ष तो सिर्फ एक बहाना है
नव आस्था के आनन्द को जगाना है
आत्मिक ज्ञान से फिर उसे सजाना है
जग के ऋण को वापस कर के जाना है

कविता का सृजन तो सिर्फ बहाना है
इस बहाने दिल में उसके बस जाना है
वो दर्द जो न कह पाया कभी जुबां से
है ईश्वर, तुम्हारे कानों तक उसे पहुचाना है
नव वर्ष …
रचियता कमल भंसाली

26/12/2017

नये वर्ष के नये संकल्प🌺भाग 3🌷आत्मिक अनुसंधान चर्चा🌲कमल भंसाली

जब कभी प्रकृति की नैसर्गिक सुंदरता हमारी नजरों से टकराती है तो निश्चित है उसकी इस सुंदरता से हमें आनन्द और प्रसन्नता का अनुभव होता है। ठीक ऐसे ही जब किसी असाधारण व्यक्तित्व से हम मिलते है, तो हम उस मिलन को अपने जीवन की एक धरोहर समझते है। हमारी विडम्बना भी यही है कि हम उसके दूसरे पहलू पर कभी या तो गौर नहीं करते या हमारे अंदर इस तरह के जज्बातों को समझनें की समझ नहीं है कि व्यक्तित्व किसी का योंही प्रखर और आकर्षक नहीं होता उसके पीछे उसकी दृढ़ स्वयं परिवर्तन की चाह और क्षमता होती है। क्यों नहीं कुछ प्ररेणा उनसे स्वयं के जीवन को मिले ! जीवन सिद्धान्त तो यही कहता है, ऐसे व्यक्तित्व प्रेरणा के स्त्रोत होते है और उनसे हम भी जीवन को आकर्षक और लुभावना बना सकते है। शुरुआती जिंदगी से हर कोई एक साधारण गुण और अवगुणों से युक्त इंसान होता है, यह उस विशिष्ट इंसान की मानसिकता थी, उसने अपने जीवन के कुछ अवगुणों पर गौर किया और अपने जीवन से उन्हें धीरे धीरे स्थानांतरित कर उनकी जगह सही गुणों का विकास कर उन्हें महत्व दिया। इस तरह के परिवर्तन की सोच का सही समय अभी हमारे लिए भी है, जब आनेवाला साल हमें बेहतर ढंग से जीने का आह्वान करता है। पिछली हमारी चर्चाओं में हमने इस बारे में काफी चिंतन और अध्धयन किया अब समय आ गया कि उनके अनुरूप हम स्वयं को कुछ नये संकल्पों से सुधारे, ध्यान इतना ही रहे संकल्प सिर्फ संकल्प बन मर न जाये, उन्हें सदाबहार रख हम उन के द्वारा प्राप्त सकारत्मक परिवर्तन को अपने जीवन तत्वों में समाहित कर ले।

पीछे, हमने जिन तीन क्षेत्रों की चर्चा की हकीकत में उन्हीं से प्रभावित हो हमारा जीवन अपना काफी विस्तार करता है और एक दिन अपनी पूर्णता को प्राप्त भी करता है। कहते है, जीवन के अंतिम पड़ाव पर प्राणी में गंभीरता आ जाती है क्योंकि वो उस समय अपनी सफलताओं से ज्यादा अपनी असफलताओं से पीड़ित रहता है। मनन करता अपनी उन कमजोरियों का जिससे उससे उसका जीवन कठिन हुआ। उसका अपनी प्राप्त सांसारिक उपलब्धियों के प्रति प्रेम भी नगण्य हो जाता है । संसार से विदा लेते समय अपनी आत्मा की गहनता में जाने का मन होता है, जिस पर वो कभी कभार ध्यान देता था या देता भी न था।अगर हम कभी अपने दैनिक जीवन के तौर तरीको का स्वयं अवलोकन करते तो शायद सहज में ही समझ में आ जाता कि छोटी छोटी उपलब्धियों के लिए हमने अपनी बड़ी बड़ी खूबियां दाव पर लगा दी है। यानी अपने किसी नैर्सिगक गुण या गुणों की आहुति इस तरह के यज्ञ में दी है, तत्काल के परिणाम का क्षणिक ख़ुशी में विलीन होते ही हमें सहज महसूस हों जाता है, कहीं न कहीं ये हमारी आत्मा की हार है। अर्थ क्षेत्र की उपलब्धियों पर ही गौर करे तो हमें ऐसे कई एहसास आज भी हो सकते है । ज्यादा अर्थ संचय की चाह के लिये स्वास्थ्य पर किया गया किया गया अत्याचार जीवन की समय सीमा को कमजोर करता है इसलिए दोस्तों, वर्ष की सुंदर व स्वस्थमय शुरुआत से पहलें हम अपने मन व दिल को दुरुस्त कर लेना चाहिए । अपने लिये स्वयं तय किये नये निर्देशों व संकल्पों का पालन कर जीवन को सही व्यक्तित्व का उपहार देने का प्रथम दृढ़ संकल्प स्वीकार कर लेना उचित लगता है।

कुछ संकल्पों की एक सूची तैयार करे उससे पहले हमें इस सोच पर ध्यान देना होगा कि गुजरा समय कभी वापस नहीं आता पर हर क्षण के प्रभाव से हमारे जीवन को प्रभावित कर जाता। एक क्षण का उच्चतम चिंतन आदमी को पुरस्कार का हक दिला देता और एक क्षण का निच्चतम चिंतन जेल का दरवाजा भी दिखा देता। नैतिकता की कितनी भी हम अवहेलना अपने जीवन में करे पर जब स्वयं की चाही नैतिक जिम्मेदारी हमें दूसरों से नहीं मिलती तो कभी यह क्यों नहीं सोचते कि इसका तिरस्कार तो हमारा भी किया हुआ है। धर्म शास्त्रों ने तो सदा इंगित किया ” जैसी करनी वैसी भरणी” । अतः हमारे संकल्प जीवन सुधारक ज्यादा हो, तो निश्चित है समाज से प्राप्त होने वाले सुख से हम कभी वंचित नहीं रहेंगे।

सच और झूठ:-

जीवन कैसा भी हम जीये, सच और झूठ से वंचित रहना नामुमकिन होता है। इसकी मात्रा के उपयोग से ही सुख दुःख का स्वरूप भी बनता है। तय है किसी भी तरह के झूठ का बाहरी चेहरा कृत्रिमता के कारण आकर्षक और सुंदर होता है परन्तु सच की पवित्रता के सामने सदा ही फीका लगता है। सच में नैतिकता का तप समाहित होता और शुद्ध सच तो किसी भी तरह के आवरण से परेहज भी करता है। हम अगर अर्थ के नफे, नुकसान के सिद्धांत की जरूरत के अनुसार भी अगर झूठ का अति प्रयोग कर रहें है तो हमें किसी के बताये इस तथ्य पर भी ध्यान देना सही होगा ” सच वह दौलत है जिसे पहले खर्च करों और जिंदगी भर आनन्द करों, झूठ वह कर्ज है जिससे क्षणिक सुख या राहत पाओं पर जिंदगी भर चुकाते रहो” । चूंकि, हम संसारिक जीवन जीते है और सब तरह की परिस्थितियों से जीवन को गुजरना पड़ता है अतः आज के युग अनुसार झूठ के प्रयोग को पूरा बन्द नहीं किया जा सकता क्योंकि कभी कभी ये भी सोचना पड़ता है “लोहा को लोहा” काटता है। विपरीत परिस्थितयों में रिश्तेदार व सम्बंधियों का रुख भी अविश्वासकारी व असहयोगी हो जाता है, और सच यहां खतरनाक स्थिति पैदा कर देता है, ऐसी स्थिति में सब जगह सत्य का प्रभाव इन्सान को कमजोर करता है। चाणक्य सिद्धांत कठिन परिस्थितियों में प्रयोग योग्य कहा जा सकता है, कि “प्रेम और युद्ध” में सब जायज है। अतः दोस्तों आज की जिंदगी में सच और झूठ का प्रयोग बहुत ही समझदारी से करना चाहिए पर हर जगह झूठ को पहल देना आत्मिक कमजोरी ला सकता है और यह गलती ज्यादा न हों यह ध्यान नये वर्ष में हमें जरुर रखना चाहिए, सत्य को मन के पास रखकर। कोशिश करे नये साल में झूठ से ज्यादा सत्य वचन कहे।

सम्बन्ध :-
रहीम के दो दोहों पर गौर करते है ।
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोरो चटकाय ।
टूटे पे फिर ना जुरे, जुरे गाँठ परी जाय ।।
(रहीम कहते है कि प्रेम का नाता नाजुक होता है, इसे झटका देकर तोडना उचित नहीं होता। यदि यह प्रेम का धागा एक बार टूट जाता है तो फिर इसे मिलाना कठिन होता है और यदि मिल भी जाए तो टूटे हुए धागे के बीच में गाँठ पड़ जाती है।
*****

रूठे सुजन मनाइए, जो रूठे सो बार।
रहिमन फिरि फिरि पोइए, टुटा मुक्ता हार।।
( यदि आपका प्रिय सौ बार भी रूठे, तो भी रूठे हुए प्रिय को मनाना चाहिए, क्यों कि यदि मोतियों की माला टूट जाए तो उन मोतियों को बार बार धागे में पीरो लेना चाहिए।

रहीम दास जी कि इस सीख का हम अपने जीवन में कितना महत्व दे ये आज के वातावरण में कहना कठिन लगता है पर ये तय है हर सम्बन्ध की गरिमा प्रेम के तत्व पर ही निर्भर की करती है। प्रेम आत्मा से निकल कर आता है और हर सम्बन्ध को गरिमा से मान सम्मान देता है, हमें इसे स्वस्थ और स्वच्छ रखना भी चाहिए।सब के साथ प्रेम से रहने का संकल्प जीवन को भरपूर ऊर्जा की संपन्नता प्रदान कर सकता है। परन्तु, दुनिया सब लहजे से बदल रही है, सम्बन्धी, रिश्ते- नाते, समाज के आपसी सम्बन्ध कल तक जो दुनियादारी के हिस्से थे, आज वो सब व्यक्तिगत हो गए। यहां तक की एक ही छत के निचे रहनेवाले पति-पत्नी के सम्बन्ध में कुछ हिस्सा ही आपसी रह गया है। दिल की बाते अब दिल में ही रहती है, अपनों के वनिस्पत बाहरवालों के सहारे ही जिंदगी की समस्याओं का हल ढूंढना सही लगता है। व्यवहारिक दुनिया में आर्थिक क्षमता का भीतरी मूल्यांकन ही रिश्तों की प्रगाढ़ता तय करती है। आप किसी भी रिश्ते का खून का सम्बन्ध होनें पर भी उस पर प्यार और स्नेह का दावा नहीं कर सकते। समय आ गया है, आपसी खून से सम्बंधित रिश्तेनातों के प्रति हमें कुछ बदलाव अपनी सोच में करना पड़े जिससे कम से कम हमारा बाहरी प्रेम बना रहें। इनके बारे में ज्यादा सोचने से इंसान खुद ही तनाव भोगता है, जिससे जीवन को अप्रसन्नता ही मिलती है। कार्यकालि रिश्ते को हम अगर मधुर व्यवहार और कुछ आत्मिक प्रेम से संजो कर रखे तो वो हमारे लिए काफी सहयोगी हो सकते है। बाकी जिन घरों में आज भी प्यार और मान सम्मान का महत्व है, वहां किसी भीं नये संकल्प की जरूरत नहीं होती। समय अनुसार स्वयं को बदलने का संकल्प ही उचित है।

आत्मिक संकल्प:-

वर्ष जैसे विदा हो रहा है वैसे एक दिन हमें भी विदा होना है। हम में और उसमें एक ही सबसे बड़ा फर्क है, उसको हमने बनाया और हमें किसी अनजान शक्ति ने। हमनें वर्ष को सिर्फ गिनती तक ही मान्यता दी पर हमें तो नियति ने हजारों गुण – अवगुणों से युक्त होनें का मौका दिया है, जिससे हम अपने आने का उद्देश्य स्वयं में ही ढूंढ कर उस शक्ति को दुनिया से जाकर निराश न करे। हमारी रचना में दो पहलू पर शायद उसने ज्यादा ध्यान दिया और आत्मिक तथा संसारिक प्राणी हमें बनाया। धर्म और अधर्म की तराजू पर ही हमारी अगली गति तय होती है ऐसा हर धर्म शास्त्र बताता है और हमारा विश्वास भी यही है। हमारे सारे संकल्पों में सारे धार्मिक तत्व न हों पर नीति शास्त्रों पर विश्वास कर हमें हर संकल्प में अगर नैतिकता, संयम, प्रेम, धर्म, विश्वास जैसे तत्वों का विकल्प रखे तो निश्चित है, साल मधुरमय, ज्ञानोदय और आत्मिक हो सकता है। सभी के लिए नव वर्ष शुभता से सजकर आये, ये ही कामना लेखक करता है। गुजारिस भी है, इस लेख को उपदेश पाठ न समझे अपितु इसे जीवन सुधार विवेचना के रुप में ही परखे क्योंकि “To be beautiful means to be yourself. You don’t need to be accepted by others.You need to accept yourself”.-Thich Nhat Hanth.
**लेखक: कमल भंसाली**