🙏विदाई 2018🙏कमल भंसाली

आओ, कर नमन विदाई दे, भाई
वर्तमान साल से हो रही, जुदाई
जाना आना प्रकृति का आधार
विगत ही देता सुख का उपहार
आओ…

जानेवाले को करते सत सत प्रणाम
आने वाले का भी करते अभिवादन
जीवन का यही है सर्व सच्चा बन्धन
इस बन्धन को करे सहस्त्रों सलाम
आओ….

नया साल सबका हो अति शुभकारी
अनुभव और ज्ञान से बने उपकारी
मानव का मानव से, हो कल्याण
जीवन से किसी का न हो पलायन
आओ…

देखो, सर्द ऋतु लवलीन हो मुस्करा रही
फूलों से, वादियों को भी दुल्हन बना रही
नये साल का भास्कर भी होगा, अति प्रखर
उल्लसित हो मन पायेगा सफलता का शिखर
आओ…

हर साल है अनूठा न सच्चा न ही झूठा
वक्त का करिश्मा कितना तीखा मीठा
सत्यता की धुरी पर ही घूमता, हर वर्ष
कभी गम कभी खुशी, स्वीकृत हों सहर्ष
आओ…

अनुभव विरासत की देकर कर वर्ष करे विहार
जगत जननी जन्मभूमि को कर के नमस्कार
आने वाले का जाना तय, यही है जीवन का सफर
नव में रहे, पर भव में बने रहे देवत्व सा व्यवहार
आओ…..

🎅विदाई 2017 🎅 ✍ कमल भंसाली

आओ, नमन विदाई दे, भाई
वर्तमान साल से हो रही, जुदाई
जाना आना प्रकृति का उपहार
विगत शुरू करता, सुख का आधार
आओ…

जानेवाले को करते है, सत प्रणाम
आनेवाले का भी है, अभिवादन
जीवन का यही है सच्चा बन्धन
इस बन्धन को करे सहस्त्रों सलाम
आओ….

नया साल सबका हो, शुभकारी
अनुभव और ज्ञान से, उपकारी
मानव का मानव से, हो कल्याण
जीवन से किसी का न हो पलायन
आओ…

देखो, सर्द ऋतू लवलीन मुस्करा रही
फूलों से, वादियों को दुल्हन बना रही
नये साल का भास्कर भी होगा, प्रखर
उल्लसित हो मन पायेगा सफल शिखर
आओ…

हर साल है, अनूठा, न सच्चा न झूठा
वक्त का करिश्मा, कितना तीखा मीठा
सत्यता की धुरी पर ही घूमता, हर वर्ष
कभी गम कभी ख़ुशी, स्वीकृत सहर्ष
आओ…

अनुभव विरासत की देकर कर वर्ष विहार
जगत जननी जन्मभूमि को कर के नमस्कार
आनेवाले का जाना तय, यही है जीवन सफर
नव में रहे, पर भव में बने रहे ईशवरीय व्यवहार
आओ…..

31/12/2017

👌👌नमन👌👌 कमल भंसाली

image

आशा उसी से कीजिये, जिसने हमको बनाया
वो ही देता, सहारा, दूर कितना चाहे, हो किनारा
डगमग हो जब जीवन नैया, क्यों इतने घबराये
जब हाथ पकड़ कर, वो, स्वयं किनारे ले जायें

सुख दुःख होते है, सिक्के के दो पहलू
दोनों तरफ की एक ही होती है, पहचान
निराशा के पलो की सीमितता को ले जान
तो, फिर समझले, हम,जीवन मूल्य है, ज्ञान

दर्द हजारों मिलते, तो क्यों करे हम गम
दया धर्म से सब हो जाएंगे एक दिन कम
चार दिन की जिंदगी, कब तक रोये हम
लेंगे उसका नाम, दर्द सारे हो जाएंगे कम

उसके नाम हजारों, पर है, तो वो है,एक
पथ हजारो ही सही, मंजिल भी तो है, एक
आये है, जाना निश्चित, कर्म करना है, एक
सही कर्म हो, सत्य पूर्ण, प्रार्थना यही है एक

दुःख के भँवर में फसा जीवन, मांगे अपनी ख़ैर
इस दुनिया में न अपना, न गैर, फिर कैसा बैर
पल जो भी बचे, उसको ही, अब करने अर्पण
पवित्र हो जाये आत्मा, प्रभु, स्वीकार करो,नमन
👌👌कमल भंसाली👌👌

कमल भंसाली