दोस्त बनो, पर दिल से……कमल भंसाली

कहने को, दोस्ती हजारों से की जाती
नगण्य, ही सच्चे दिल से निभाई जाती
दुश्मनी एक से भी हो, जिंदगी भर रहती
न ऐसी दुश्मनी अच्छी, न ही ऐसी दोस्ती

करो आरजू जिंदगी से, दोस्ती सलामत रहे
तहे दिल से कहो, दोस्त आस पास ही रहे
हम राही मंजिल के हो चाहे, अलग अलग
दिल हमारा सहज धड़कता रहे , संग संग

भूले भी होगी, जीवन पथ में अनेक
पर, न रहे गलतफहमी की बूंद, एक
मन सजा रहे, स्नेह दोस्ती में, सदा रहे
दिल के पट पर दोस्ताना का चिन्ह रहे

दोस्ती “दिवसो” की मोहताज न समझो
उसे सदा अपने जिगर का, अंश समझो
फूल दोस्ती है, जरा संभाल कर ही रखना
अर्थ के जंगल में, इसे निस्वार्थ बन समझो

कहो दोस्त से, आज भी हूँ दोस्त तुम्हारा
विपरीत स्थिति में, हाथ न छिटके हमारा
बन्धन प्यार के विश्वास का, बंधे ही रहना
तस्वीर बदल दे वक्त, पर दोस्त न बदलना……कमल भंसाली