👤जिंदगी रुठती रही🙏कमल भंसाली

जिंदगी रूठती रही, मैं मुस्कराता रहा
ख्बाबों के टूटने का सिलसिला जारी रहा
फिर भी रूठी जिंदगी को प्रयासों से मनाता रहा
कभी कभी उसके न मानने की वजह तलाशता रहा
जिंदगी….

दर्पण में सूरत ने भी मुस्कराने से इंकार कर दिया
दिल की देहरी पर थकावट ने अपना डेरा डाल दिया
प्यार के दस्तूरों ने जज्बातों से सदा मजाक ही किया
हूनर सारे भूलकर फिर भी जीवन पथ पर चलता रहा
जिंदगी…

हर जायज ख्वाइस निराशा के जाम में डूब इतराने लगी
ख़ुशी के कदमों की आहट से जिंदगी डर कर भागने लगी
स्वयं को मूल्यांकित किया तो कीमते भी बगले झांकने लगी
उलझनों के दौर में फिर भी नन्ही खुशहाली को तलाशता रहा
जिंदगी…

जब सब कुछ लूट गया तो वक्त के कदम ठहर गये
अजनबी हसरतो के काले साये भी अदृश्यत् हो गये
झलक मुस्कराहट की दर्पण के टूटे शीशे में समा गई
रूठी जिंदगी , बन्द नैनों की एक बूंद से निरुत्तर हो गई

अब मैं रूठ गया, जिंदगी मुस्करा कर ठहर गई
प्रतीक्षित हो, अपने अनुराग का परिचय दे गई
तुमसे ही है मेरा जहां, कान में धीमे से बोल गई
न नाराज होगी मुझसे वो फिर कभी, ये सन्देश दे गई

रचियता: कमल भंसाली