💘वो मेरा दिल ही तो है 💝✍️कमल भंसाली

जीवन की हर रस्म में
हर गम को सहन करने वाला
वो मेरा दिल ही तो है
क्यों न इससे ही प्यार करुं

हर रिश्तें पर जो न्यौछावर हुआ
वो मेरा दिल ही तो है
क्यों न इसका इकरार करुं

उम्र की ऊंची नीची पगडंडियों पर
बिन रफ्तार खोये साथ चला
वो मेरा दिल ही तो है
क्यों इससे मैं इंकार करुं

घायल हुआ दुनिया के दस्तूरों से
बिन शिकायत धड़कता रहा
वो मेरा दिल ही तो है
क्यों न इसका इकरार करुं

जिस्म की हर कमजोरी को
हर पल सहा
वो मेरा दिल ही तो है
क्यों न उसका शुक्रिया अदा करुं

जन्म से पहले से
मृत्यु तक की यात्रा का हमसफर
निर्धन पर निडर
वो मेरा दिल ही तो है
क्यों न उसका ही गुणगान करुं

रचियता✍️कमल भंसाली

नफरत दिल में इतनी✍💝 कमल भंसाली

नफरत दिल में न इतनी बसाये
कि संसार में अनचाहे बन कर रह जाये
जीना सब का बराबर का हक
हो सके तो दिल को यह बात समझाये
इंसान है इसलिए सही होगा
इंसानियत की राह के ही मुसाफिर कहलाये
नफरत..

हर धर्म यही कहता मैं सब में एक समान सा रहता
तुम फिर क्यों इसे अलग अलग होने का संकेत देते
कितने अच्छे कितने बुरे अगर स्वयं को तुम जान लेते
मैं जीवन का सार बन तुम्हारे आत्मा मे ही सदा बसता
नफरत..

बातें बड़ी बड़ी करके खेल कई प्रकार के खेलते
आडम्बरों की छाया में क्यों इतने पाप को झेलते
स्वयं समझने का दावा कर स्वयं ही अनजान रहते
स्वार्थ में नैतिकता की राह एक कदम भी नहीं चलते
नफरत…

सीधा सा जीवन कम जरूरतों की चाहत रखता
विलासिता के मटमैला चोले में वजूद फंस जाता
हसरतों के वश में आकर वो सब कुछ भूल जाता
माया जाल में फंस जाता वो इंसान नहीं रह पाता
नफरत…

फलसफा जीवन का इतना साँसों का राज जितना
जीना है सही तो हर कर्म में अहिंसा का साथ रखे
सत्य की सीढ़ियों से सफलता की मंजिल को पाना
मानवता ही धर्म इसे ही जीवन भर ये विश्वास रखे
नफरत…..
रचियता✍ 💖 कमल भंसाली

💑नाशाद प्यार💑 कमल भंसाली

नाशाद हुए थे कभी तेरे प्यार में हमदम
इस राज को दिल मे छुपाएं हुए थे हम
वक्त की मजबूर लहरों में बह गये थे हम
इजहारे मौहब्बत न कर पाये कभी हम

कहते है प्यार की खुशबू जज्बाती होती
दामन चाहत के फूलों का छोड़ बह जाती
नूर का मोती बन पाक इबादत बन जाती
एक दिन महबूब की मैहंदी बन रच जाती

फिजाओं के रंग जब बदरंग हो नैनों में छा जाये
माशूक के सपनो में जब प्रेम दृश्य राह भूल जाये
मत पूछना क्यों सच्ची मौहब्बत मंजिल नहीं पाये
दस्तूर है वफ़ा पर जरूरी नहीं हर कोई सही निभाये

आज गैर की अमानत हो हम कुछ नहीं कहते
सरे राह चलते देख तुम्हें अपने नयन भी झुकाते
पर इश्क वो बला है हम लाख छुपाए न छुपा पाते घबराते तुम्हारे लब देख हमें जब निशब्द थरथराते

अपनी चाहते जब किसी गैर की अमानत हो जाये
बैचेन हुए अरमानों को तुम्ही बताओ कैसे छुपाये
जग की ये कैसी रीत कि बीते प्यार को भूल जाये
न पूछो हाल प्यार का जब गैर की बांहों में खो जाए

प्यार तो प्यार ही होता जो दिल मे ही बसा रहता
जिन्दगीं की धूप छांव में दर्द के सैलाब से राहत देता
प्रथम प्यार की प्रथम कहानी न समझो कभी बेगानी
अजनबी यादों की मासूमियत स्मृतियां ही ज़िंदगानी
रचियता: कमल भंसाली

💕प्रेम पुजारी💕 कमल भंसाली

दिल की दुनिया बसा डाली फिर भी लगता खाली
दिल को जो आबाद करे अब वो हवाये नहीं चलती
निगाहों में प्यार की जगह नफरत की आंधी दिखती
वफ़ा की कीमत नहीं बाजार में बेवफाई ही बिकती

नाम मौहब्बत है शराब बन मदिरालयों में परसती
जिस्म के हर हिस्से में वासना बन हैवानियत बनती
दिल की बातें करती पर कातिल बन कर इठलाती
पता नहीं किस फूल से ये कौनसी महक निकलती

कल तक जो सिर्फ मौहब्बत होती आज है रोती
किसकी है यह बेटी जो इतने गहरे रंग ये बरसाती
उल्फत कह कर सिर्फ हसरतों के जाम ही छलकाती
आग यह कैसी जो लग जाने के बाद कभी न बुझती

प्यार की भूखी दुनिया सिर्फ प्यार की ही बात करती
दस्तूर जो इसके जरूरी उन्हें कभी भी नहीं निभाती
लेने को राजी पर जब देने की बारी हो तो कतराती
फिर भी प्यार की चाहत तो हर दिल को है ललचाती

त्याग सच्चे प्रेम की मंजिल, नफरत से रहो दूर
ये ही एक सन्देश जग को करता हिंसा से दूर
आज की बात करो कल की कोई हस्ती नहीं होती
बड़ा सोचो तो सच मानों जिंदगी सदाबहार ही रहती

आज हो कल न भी हो पर चमन योंही आबाद रहे
कभी वापस आओ तो तुम्हारी अमानत जवां रहे
विदा इसलिए प्यार से होना कुछ तो तुम्हारा यहां रहे
तुम थे यहां कभी “प्रेम के पुजारी” जग को याद रहे

💖हमराही💖कमल भंसाली

दोस्तों,
प्यार जिंदगी की असाधारण जरुरत है, जन्म से दिल को इसकी जरुरत महसूस होती है। प्यार अनेक सम्बन्धों में रहकर भी अपने आपको सदा अधूरा ही समझता है। व्यवहारिक और आधुनिक जीवन में प्यार भी कुछ अलग से नकारत्मक तत्वों के कारण अक्सर बीमार ही रहता है। वास्तिवकता के दृष्टिकोण से देखा जाय तो हर रिश्ते का प्यार आजकल ज्यादातर बीमार ही रहता है। परन्तु जीवन है जब तक प्यार की सलामती जरुरी है। पति- पत्नी, प्रेमी प्रेमिका और दोस्ती के रिश्ते स्वार्थ के वशीभूत रहते हुए भी आज वक्त के महत्वपूर्ण साथी है। आर्थिक युग में ये रिश्ते तभी जीवन भर साथ निभा सकते है, जब इंसान झुठ, स्वार्थ, लालच,धोखा और चालाकी से दूर हो अपने द्वारा दिये जानेवाला (हर रिश्तें को उसकी गरिमा अनुकूल) प्रेम, स्नेह और सम्मान को कभी न भूले। प्रस्तुत है, इसी संदर्भ में यह कविता।
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मौहब्बत तो तुमसे ही कि हमने सनम
तुमसे ही निभाई हमनें रुठने की रस्म
खफा जब भी तुम होते तो हम मुस्करा लेते
गैर से लगने वाले अहसासों को भी अपना लेते
💘
खता कहते हो तब तक सितम सब सह लेते
पर बेवफाई का दाग न देना सांसे सहम जाती
इल्जाम तो दर्द के फूल बन सिर्फ महक ही छोड़ते
बेवफा कहते तो जिंदगी निशब्द हो बिखर जाती
💟
जब भी मैने अपने आप को तेरे प्यार में डुबाया
सतह पर तैरती चाहत पर बहुत ही तरस आया
स्पर्श की बेकरारी ने हसरतों की झील में नहाया
तो तल में बसा प्यार हर आलिंगन में उभर आया
💖
तेरे इकरार को ही सिर्फ प्यार नहीं कहता
अपने हर एतवार को में हर क्षण समझाता
संगम जिस्म का नहीं दिल की लहरों का होता
अंदर की रुह तक का यह सफर सुहाना होता
💝
आ चल कसम लेते चाहे युग बदल जाये
सब कुछ बदले पर कदम न हम बहकाये
हमसाया बन एक मंजिल के राही कहलाये
हमराही बन जग में प्यार के फूल ही खिलाये
💔💓💟💖💕
रचियता✍💖 कमल भंसाली

💖वादिया प्यार की💖 कमल भंसाली

दिलरुबा वादिया प्यार की कर रही तेरा मेरा इंतजार
तेरी रुस्वाई से अनजान खुशनमां मौसम भी बेकरार
हर गिरह खोल दो अंजामे मौहब्बत को इबादत दो
महफ़िल जब सजी तो प्यार की शमा को जलने दो

दिलवर मेरे, तुझे दिल की गहराइयों से प्यार किया
तेरी आहटों तक का बेकरारी से इंतजार ही किया
लहराती तेरी घनरी जुल्फों में चांद का दीदार किया
इबादत से हुस्न ऐ इश्क की दास्तन में यकीन किया

वक्त बदल जाये, सुख दुःख धूप छावं बन कर छाये
कभी सजदे भी न लूं तो भी सुर्ख लब सदा मुस्कराये
तन्हाई भरी शामें तेरे आँचल की खुशबू पर इतराये
कसम तुम्हारी बेकरारी से तेरे आने तक मुझे सताये

देख तेरे चेहरे की रंगत इशारे कर रही तेरी अंखिया
पिया मिलन चाह में बदन ले रहा है तन्हा अंगड़ाइयां
लबों को मजबूर न कर प्यार के कुछ कशीदे गाने दे
एहतशाम से प्यार को खुशगवार फरियाद करने दे

मौहब्बत तो दिल की ,आरजुओं की मन्नत है प्यार
रुह में जन्नत का शुकून, संग रहे जीवन भर दिलवर
वक्त की जरूरत वफ़ा, मंजिलों तक की फरेबे नजर
वादिया प्यार की कर रही तेरे मेरे मिलन का इंतजार

गरुर ए हुस्न दिलवर तेरे दिल में किल्लत प्यार की
दस्तूर मौहब्बत कहती गुजारिस नहीं ऐसे यार की
पाक आरजुओं की इश्के हकीकी इश्रत अंजाम
इल्मे मजलिस बदगुमां दाग, रुस्वाई बेवफाई पैगाम

रचियता✍💗कमल भंसाली

👤जिंदगी रुठती रही🙏कमल भंसाली

जिंदगी रूठती रही, मैं मुस्कराता रहा
ख्बाबों के टूटने का सिलसिला जारी रहा
फिर भी रूठी जिंदगी को प्रयासों से मनाता रहा
कभी कभी उसके न मानने की वजह तलाशता रहा
जिंदगी….

दर्पण में सूरत ने भी मुस्कराने से इंकार कर दिया
दिल की देहरी पर थकावट ने अपना डेरा डाल दिया
प्यार के दस्तूरों ने जज्बातों से सदा मजाक ही किया
हूनर सारे भूलकर फिर भी जीवन पथ पर चलता रहा
जिंदगी…

हर जायज ख्वाइस निराशा के जाम में डूब इतराने लगी
ख़ुशी के कदमों की आहट से जिंदगी डर कर भागने लगी
स्वयं को मूल्यांकित किया तो कीमते भी बगले झांकने लगी
उलझनों के दौर में फिर भी नन्ही खुशहाली को तलाशता रहा
जिंदगी…

जब सब कुछ लूट गया तो वक्त के कदम ठहर गये
अजनबी हसरतो के काले साये भी अदृश्यत् हो गये
झलक मुस्कराहट की दर्पण के टूटे शीशे में समा गई
रूठी जिंदगी , बन्द नैनों की एक बूंद से निरुत्तर हो गई

अब मैं रूठ गया, जिंदगी मुस्करा कर ठहर गई
प्रतीक्षित हो, अपने अनुराग का परिचय दे गई
तुमसे ही है मेरा जहां, कान में धीमे से बोल गई
न नाराज होगी मुझसे वो फिर कभी, ये सन्देश दे गई

रचियता: कमल भंसाली