फिर, तेरी याद चली आई…..कमल भंसाली

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चंचल चितवन की चांदनी
शीतल चाँद की अर्द्धांग्नि
यौवन से भरपूर, ले रही अंगड़ाई
अकस्मात, फिर, तेरी याद चली आई

भूली बिसरी यादें, अनजाने में ही आती
क्षण भर कुछ रौनक, दिल को दे जाती
प्रथम मुलाक़ात, की यही एक है, सौगात
न भूले दोनों, आज भी बिखरे से है, जज्बात

इन यादों में बसी, तुम्हारी हर बात
मेरा इजहार और तुम्हारी उल्फ़त
भीगे लब, जब भी तुम्हारे कंपकंपाते
सुर्ख अहसासों से, नैन गुलाबी हो जाते

सुहानी मरुत्, जब भी बहती
हर कली, प्रफुल्लित ही लगती
हर याद, विरहन बन कर आती
कशमकश में, नींद करवट बदलती

प्रमृष्ट हो, चंदनी यादें, सितारे बन झिलमिलाती
दिल में तस्वीर, तुम्हारी, फिर से उभर आती
झलक में, भूली बिसरी जिंदगी दिख जाती
बीते, अतीत का दर्पण, चूर, चूर कर जाती

इन यादों से, आज भी नहीं मेरा इंकार
कैसे ना कर दू, प्रतिष्ठ था, हमारा प्यार
वक्त के दरिया में, जो कुछ था,बह गया
जुदा हो गए, स्पर्श का अनुभव रह गया

चेहरे की रेखाओं में, सलवटे गहरा गई
पता नहीं, तुम किस दुनिया में खो गई
गगन में, चांदनी भी, उदास होकर सिमट गई
अकस्मात, फिर, तेरी याद, धुंधली हो गई……..”कमल भंसाली”

अछूता जीवन…..कमल भंसाली

जीवन कब रहता,अछूता
हर कोई इस को छूता
सरे राह, चलते, चलते
ये, सब कुछ भूल जाता

एक जीवन, कितना कुछ सहता
अपनेपन के द्वार पर बैठ जाता
भीख स्नेह की जब भी माँगता
कंगला, कमजोर समझा जाता

भाषा का अनुरागी बन पछताता
कडुवा सत्य बोल नहीं पाता
झूठ बिना कुछ तौल नहीं पाता
सत्य हिसाब कभी रख नहीं पाता

गुमां था, जिंदगी योंही चलेगी
सदा खुशियों की नदी बहेगी
गम की तरकश का एक, तीर
कितना बहा देता, नयनों से नीर

फूलों सा जीवन जब काँटों पर सोयेगा
तभी तो फूलों का अहसास कर पायेगा
बाती जब जलेगी, तो तैल साथ निभाएगा
पराये दर्द देख, अपना दर्द कम ही पायेगा

अंहकार का दरवाजा, खोलने से पहले
साँसों को तो पूछलो, कब तक आएगी
अभिमान किसका करना, ये तो जानलो
काया की माया, आत्म दर्पण में निहारलो

दूर रोशनदान से आती, किरणों से जानना
जीवन हकीकत है, कितने क्षण की, पूछना
अपनी नश्वरता को समझना, यहीं है, प्रार्थना
एक सांस के बाद, दूसरी की कीमत आंकना……..कमल भंसाली