दोस्त बनो, पर दिल से……कमल भंसाली

कहने को, दोस्ती हजारों से की जाती
नगण्य, ही सच्चे दिल से निभाई जाती
दुश्मनी एक से भी हो, जिंदगी भर रहती
न ऐसी दुश्मनी अच्छी, न ही ऐसी दोस्ती

करो आरजू जिंदगी से, दोस्ती सलामत रहे
तहे दिल से कहो, दोस्त आस पास ही रहे
हम राही मंजिल के हो चाहे, अलग अलग
दिल हमारा सहज धड़कता रहे , संग संग

भूले भी होगी, जीवन पथ में अनेक
पर, न रहे गलतफहमी की बूंद, एक
मन सजा रहे, स्नेह दोस्ती में, सदा रहे
दिल के पट पर दोस्ताना का चिन्ह रहे

दोस्ती “दिवसो” की मोहताज न समझो
उसे सदा अपने जिगर का, अंश समझो
फूल दोस्ती है, जरा संभाल कर ही रखना
अर्थ के जंगल में, इसे निस्वार्थ बन समझो

कहो दोस्त से, आज भी हूँ दोस्त तुम्हारा
विपरीत स्थिति में, हाथ न छिटके हमारा
बन्धन प्यार के विश्वास का, बंधे ही रहना
तस्वीर बदल दे वक्त, पर दोस्त न बदलना……कमल भंसाली

धूल के फूल…..कमल भंसाली

दोस्तों, कहते है, कुछ हद तक जीवन आस्थाओं के नाम होता है। पति- पत्नी का रिश्ता भी जब जीवनपथ पर चलते, चलते उम्र के संध्या काल के पड़ाव पर विश्राम करता है, तो भावुकता से सरोबार हो जाता है। शारीरिक अक्षमतायें तथा सामाजिक और पारिवारिक अवहेलना के दर्द के अलावा उनमेँ एक शीघ्र होने वाले किसी एक का बिछौव भी आंतरिक असहय दर्द दिल में स्पंदन करने लगता है । नारी भावुक और संवेदनशील ज्यादा होती है, इस तरह की स्थिति में पुरुष अपने जीवन साथी की अनकही पीड़ा को आत्मसात कर, उसे दिलासा देता है । इन्हीं सब जज्बातों को लेकर यह कविता लिखी है ।
लेखक नहीं हूं, गलती को सुधारने में सहयोग करे, अच्छी लगे तो शेयर करे….कमल भंसाली

तुम्हारी खुशबूओं से, कब अधूरा रहा
चाहत के फूल, हमेशा खिलाता रहा
खाली आसमां, काँटों जैसा चुभता रहा
दर्द तुमको हुआ, दिल मेरा रोता रहा

ख़ामोशी, तुम्हारी बहुत कुछ कहती
योंही पलके, किसी की नहीं झुकती
दर्द को, दिल में इतना न अब डुबाओ
मेरे पास आकर, सारे गम दे जाओ

दस्तूर, प्रेम का दिल को होता समझना
ख़ुशी हो या गम हम दोनों एक है, हमदम
परेशानियां हजारों सही, मत मातम मना
आसां नहीं जिन्दगी, जरा समझ मेरे सनम

आ तुझे सजा दूँ, फिर से दुल्हन बना दूँ
मीत मेरे, कहे अगर, मिलन गीत लिख दूँ
सूखे आंसुओं की, मोतियों की माला बना दूँ
सपने सब सच नहीं होते, ये यकीन दिला दूँ

उम्र का पेड़ भले हो जाए, कितना ही जर्जर
प्यार की शाखायें, सदा फैलती रहती निर्झर
कल हम न रहे, महक बनकर फिजा में महकेंगे
हमारी तस्वीर पर, सदा “धूल के फूल” खिलेंगे……

कमल भंसाली

वो, ख़ुशी कहां से लाऊं

ऐ मेरे दिल
तू ही बता
वो, ख़ुशी कहां से लाऊं
जिससे तेरा मन बहलाऊं

आग जो तेरे सीने में जलती
वही चेहरे पर मुस्कराती
तू बता मेरे दिल
किस नीर से तेरी
ये आग बुझाऊं
बता ना, ऐ मेरे दिल..

दस्तूर तू गम का जाने
प्रेम का बदलता रंग जाने
आशा में जीने की सजा जाने
जीना है, जीने का खौफ न कर
ऐ मेरे नादान दिल
मुझे यह बता जरा
कौन सी मरहम लगाऊं
तेरे सारे घाव भर जाए
सदा तू, खिलता ही जाए
बता ना, ऐ मेरे दिल..

देख, दुनिया की विचित्र तस्वीर
न हो मायूस, न ही बदल ढंग
लोगों की परवाह करके
निराशा का बादल न बन
तू तो है,मेरा मन उपवन
बता वो कौनसी शक्ति
जिससे तुम्हे फिर सजाऊं
बता ना, ऐ मेरे दिल..

आरजू, इतनी ही तुमसे
दिल तोड़ने वालों का
कभी जिक्र न कर
मौहब्बत के मैदान में
हार की फ़िक्र न कर
जिन्दादिली तेरी फितरत
उस पर शंका न कर
बता वो कौनसी बाजी
जीत कर दिखाऊं
जिससे तेरी ख़ुशी वापस लाऊं
बता ना, ए मेरे दिल…

【कमल भंसाली 】

कमल भंसाली