सावन आया, झूमकर…….कमल भंसाली

झूम रहा मन
नाच रहा तन
धरा हुई सघन
नदियों में उफान
पर्वत की चोटियों
से फिसल कर
सावन आया, झूमकर

सूर्य भी हो मस्त
हो गया, अस्त
नील गगन में
मच रही हलचल
छाए घनेरे बादल
दे रहे, अलबेली तान
झमा झमा बरस
ढा रहे, कहर
सावन आया, झूमकर

सावन और शिव
देखों, दोनों का वैभव
करता संहारऔर देता निर्माण
प्रमाणित सृष्टि का मिलन
बह रही,अद्भुत, बयार
शिव और शक्ति
प्रेम मग्न हो
गा रहे, मल्हार
प्रकृति धन्य होकर
गुनगुना रही
सावन आया, झूमकर

वसुंधरा सजकर
दुल्हन बन रही
हरियाली, की
मेहँदी लगा रही
पवन झूम झूम
स्पर्श ढूंढ रहा
भँवरों का गुंजन
चमन को रिझा रहा
प्यासी कलिया
विरहन बन रही
दरख्तों से
कितनी निगाहें
झांक झाँक
कर रही इशारा
आया सावन झूमकर ……कमल भंसाली