☃आधुनिक जिंदगी⛄ कमल भंसाली

मासूम सी जिंदगी
आधुनिकता में खो गई
बड़ी होकर छोटी हो गई
अपने होने का मकसद भूल गई
कल की चिंता में
आज का सवेरा भूल गई
अपने अंधेरों में
चन्द क्षण
चमकते जुगनुओं का शिकार हो गई
छोटी सी….

अनजानी सी
बन रहती
थोड़े से पल मिले
वो भी अनिश्चित
फिर भी कहती
अभी मंजिले और भी ओ
लक्ष्य और भी
आज नहीं कल मेरा
सब कुछ हासिल कर लू
तो चैन की सांस लू
पर मन नहीं करता उसका
कभी अपना वजूद भी तोल लू
मासूम सी..

आज की जिंदगी
हसरतों को दोस्त कहती
संयम को दुश्मन समझती
तन के प्रेम में आत्मा को रुलाती
रंगीनी के झूले में मदहोश सी रहती
संस्कारों को पुरातन जूठन समझती
रोज दुःखी हो सुख का अभिनय करती
अति के ताप से खराब मशीन बन जाती
अनुपयोगी हो कबाड़ खाने की शोभा बढाती
अपने होने के अहसास को खांस खांस ढ़ोती
आधुनिकता की दौड़ में निस्सहाय हो योंही गुजर जाती
बिन संस्कारों के रह कितना कुछ अफसोस कर जाती
रचियता✍ कमल भंसाली