💑प्रेम यात्रा👨‍❤️‍👨✍️कमल भंसाली

जलन जब सीने में हो
आंखों में बहता हो
जब निशब्द पानी
बता !
महबूब मेरे
जिंदगी
कैसे तुझे भूल जाएगी
जब याद तेरी आयेगी
तो लहराती तेरी तस्वीर
कैसे मेरा दिल बहलायेगी
💌
आज तूं नहीं
कल मैं नहीं
कोई बात नहीं
तेरे जज्बात ही सही
इस जन्म में मुलाकात
फिर नहीं
तो भी
कोइ बात नहीं
पर
तेरे बिना
जिन्दगी से डर लगता
मौत से तो कभी नहीं
बिन तेरे जीना सहज नहीं
मौत से कोई परहेज नहीं
💟
मानता
प्रेम की परकाष्ठाता
एक विश्वास
एक आस्था
जो
मिलन में कदापी नहीं
घावों की गहनता
जलन में कभी नहीं
पर जानले
मेरे सनम
जुदाई मेरे लिये
दर्द की
कोई सौगात नहीं
है,
ये तो सिर्फ
एक मकसद
एक प्रेममय यात्रा
जिसका कोई
आदि न कोई अंत
क्योंकि
मैं ठहरा
प्रेम पथ का राही

रचियता ✍️…..कमल भंसाली

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🙌संवेदन पूर्ण सत्य🕸️कमल भंसाली

“दुनिया में अगर कोई सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है वह है “दूसरों के द्वारा बोलेजाने वाला सत्य”, यह एक तथ्य है, इससे इंकार करना शायद ही आसान होगा। “सत्य” बोलने वाले लोगो की तादाद नगण्य के आसपास ही अब रहती परन्तु किसी समय झूठ बोलने वालो की गिनती हुआ करती थी, इस बात को आज का आधुनिक युग शायद ही स्वीकार करेगा। आज सत्य को एक हारा हुआ खिलाड़ी या नेता भी स्वीकार करने से झिझकता है। शाश्वत चिंतन करे तो ये बात समझ में आ सकती है कि दुनिया का अस्तित्व पूर्ण सत्य में आज भी समाया है, हम चाहे या नहीं प्रकृति अपने आप को सत्य से अलग नहीं कर सकती। हम कितना ही झूठ का दैनिक जीवन में प्रयोग कर ले पर आत्मा उसे अंदर तक नहीं ले पाती, हमारे बोले हुए किसी भी झूठ पर उसका कराहना महसूस किया जा सकता है।

“हम जी रहे है यह सत्य हो सकता है” परन्तु हम ‘सही’ जी रहे ये संदेहपूर्ण है। सवाल किया जा सकता है, क्या सत्य पूर्ण जीवन जीया सकता है ? उत्तर आज के युग में आसान नहीं लग रहा कारण जीवन की गतिविधिया आजकल झूठ के इर्द गिर्द ही ज्यादा समय बिता रही है। कभी सत्य को जीवन की धुरी समझा जाता था, आज उसकी जगह झूठ ले रहा है, इसे जीवन की विडम्बना ही कहे क्योंकि जीवन आज इसी कारण शायद टूट कर बिखर रहा है। जीवन को आज सब सांसारिक सुविधायें बहुत तेजी से प्राप्त हो रही है और बताना भी जायज नहीं होगा जीवन अपना सास्वत मूल्य खो चूका है, और स्वयं ही किसी त्रासदी का शिकार होकर दुनिया को अलविदा कह देता है। सही भी है, झूठ का भारीभरकम वजन कब तक ढोयेगा।

चाणक्य राजनीति के गुरु थे उन्होंने राजधर्म के लिए कई तरह की चालाकियों का सहारा लिया परन्तु झूठ को दूर रहकर। उनके इस कथन पर गौर करते है ” सत्य मेरी माता है। आध्यात्मिक ज्ञान मेरा पिता है। धर्माचरण मेरा बंधु है। दया मेरा मित्र है। भीतर की शांति मेरी पत्नी है। क्षमा मेरा पुत्र है। मेरे परिवार में ये छह लोग है।” काश आज के राजनेताओं में इस तरह के विचार अपनाये हुए होते तो निश्चित ही भारत आंतरिक रुप से कमजोर और गरीब राष्ट्र की गिनती में न होता।

इंसान का व्यक्तित्व प्रकृति ने बड़ी सूझबूझ वाला बनाया है, सर्वगुण और अवगुण वाले संसार में उसको अपना व्यक्तित्व स्वयं निर्धारण करने का अधिकार भी उसे दिया। सक्षम व्यक्तित्व वाले व्यक्ति के जीवन दर्शन पर सरसरी नजर डालने से इस बात से इंकार नहीं करना पड़ेगा कि बिना असत्य का सहारा लिए वो इस मंजिल तक पंहुचे है।

असहाय सी स्थिति है आज जीवन की, भाग्य से प्राप्त खुशहाली अति अर्थ के दीमक से हर दिन जीवन को छीजत प्रदान कर रही है। पल की मोहताज जिंदगी अर्थ के कारण कटुता भरे वातावरण में कई तरह की शारीरिक और मानसिक बीमारियों के विषालु कीटाणुओं से ग्रस्त हो रही है। इस का प्रमुख कारण हम सब समझकर भी नहीं समझते वो है “अति दौलत की भूख”।
हर रोज हमारे आसपास ही क्या हमारे स्वयं के जीवन मे उसकी कमी या अति, जीवन को संकुचित होने का अनुभव कराती है। जब की जानते है, जब तक जीवन है, तब तक मालिक होने का दावा कर सकते है पर उसके बाद उसका मालिक कोई और स्वतः ही हो जाता। अतः इस सत्य को स्वीकार कर लेना ही सही होता है अर्थ के कारण किसी भी सम्बन्ध को कटुता का अनुभव न दिया जाय। कठिन समय मे आपसी प्रेम काफी फलदायक होता है।

कहते है जीवन की शुरुआत प्रेम से हुई और प्रेम सदा सत्य से संपन्न रहना पसन्द करता है, झूठ से वो सदा नफरत करता है। किसी शारीरिक बंधन के चलते वो झूठ को मजबूरी से सहन करता है। इस तथ्य को रिश्तों की दुनिया में सदृश्य समझा जा सकता है। रिश्तों के बनते बिगड़ते तेवर जीवन को कई तरह से प्रभावित करते है। रिश्तों की मधुरता जीवन को सकारात्मक चिंतन प्रदान कर उसे मजबूत कर सकती है। गलत भावनाओं के बस में होकर रिश्तों में कटुता का संकेत देना मात्र जीवन के पथ को कठोरता प्रदान कर सकता है, अतः रिश्तों के प्रति हमारी संवेदनशीलता में सत्य का अंश सही मात्रा में रखना उचित लगता है। जीव विज्ञानी डेविड जार्ज हस्कल का यह कथन आज के युग अनुसार अक्षरस सत्य लगता है कि ” The forest is not a collection of entities (but) a place entirely made from strands of relationship”.

आलोचना से पीड़ित प्रेम कभी भी जीवन को सुख नहीं देता परन्तु समझने की बात है बिना आलोचना का प्रेम चापलूसी की या गुलामी की श्रेणी में आता है, प्रेम का निम्नतम पतन भी यहीं होता है, इस सत्य को कितना ही कड़वा कह लीजिए पर ह्रदय इसे स्वीकार कर सन्तुलित रहता है। आधुनिक अर्थतन्त्र की इस दुनिया की विडंबना ही कहिये इंसान के पास हजारों साधनों का भरपूर भंडार हर दिन तैयार हो रहा है, शरीर नाच रहा सब कुछ भोग रहा पर मन तो खालीपन का शिकार हो रहा। सबके रहते इंसान जब उम्र या किसी कारण से लाचार होता है तो टूट कर बिखर जाता है और दिल के अरमान दिल मे ही रह जाते, कोई सुनने वाला, कोई मन से सेवा करने वाला नहीं रहता उसके आस पास। इसका एकमात्र सत्य उतर यही हो सकता:

“जो दिया नहीं वो मिला नही
झूठ से सत्य कभी दबा नहीं
प्रेम को साधन नहीं संवेदना चाहिए
सही जीने के लिये इस सत्य की समझ चाहिए”

लेखक: कमल भंसाली ।

👏मेरे प्रभु👏कमल भंसाली✍️

हे प्रभु
खूबसूरती मेरे जीवन को दीजिये
मेरी सारी कमियों को हर लीजिये
पथ की कठिनाइयों को दूर कीजिये
महत्व जीवन का सब समझा दीजिये
👏
हे प्रभु
जिसे अभी तक जीवन समझता रहा
आपको भूल रास्ते नये तलाशता रहा
उनकी हर कमी को ही अपनाता रहा
इस भूल को मेरी आज सुधार दीजिये
👏
हे प्रभु
मानव मन मेरा सदा कमजोर रहा
वासनाओं के फूल ही सूंघता रहा
संयम ही जीवन है ये भूलता रहा
इस भूल का निदान समझा दीजिये
👏
हे प्रभु
असत्य की धुरी पर घूमता रहा जीवन
पथ भटका न मिली कोई सही मंजिल
आदर्शों के गीत तो सदा ही गाता रहा
पर अपनाने से हरदम ही कतराता रहा
जीवन की सही मीमांसा समझा दीजिये
👏
हे प्रभु
जीवन आपका दिया है पवित्र वरदान
समर्पण आप में ही रहे जब तक रहे प्राण
जिस विधि से करुं मैं सही से वापस प्रयाण
उस यज्ञ की सारी रस्में आज समझा दीजिये
👏
हे प्रभु
सकल सफल रहे मेरा यह अनमोल जीवन
हर पथ आपको समर्पित होकर बने पावन
इस जन्म की हर पीड़ा का हो यहीं समापन
गमन पथ को अब मेरी मंजिल समझा दीजिये

👏🏼रचियता और प्रार्थना कार✍️ कमल भंसाली👏

👿रिश्ते👿कमल भंसाली

जिन रिश्तों में दिल नहीं दिमाग नजर आये
उनमें अपनेपन की छावं कम ही नजर आये
अति पास होकर भी दूर की आवाज बन जाये
रिश्तों का ये स्वरुप देखकर मन घबरा जाये

माना स्वयं स्वार्थ में रचा बंधा है जग सारा
पर प्यार के सैलाब में ही बहता जग सारा
टूट जाता जब दिल तो कोई अपना नहीं लगता
रिश्तों की दुनिया मे आदमी अकेला सब सहता

कुछ रिश्तों की अपनी ही होती मजबूरिया
नजदीक के होकर भी उनकी अपनी दूरियां
दस्तूर निभाता जीवन ये सब कुछ सह लेता
पर अपनों के दिये दर्द से कभी उभर न पाता

नये युग का एक ही फलसफा है मेरे भैया
इस युग में प्यार से बड़ा है ठनठनाता रुपया
बुद्धि और भाग्य से जिसने भी इसे जब पाया
वो रिश्तों के प्रति संकुचित होते नजर आया

पर कुछ भी कह लो रिश्तों का पेड़ अब भी हरा
शरीर जब जबाब दे तब रिश्तों से मिलता सहारा
सम्बन्ध होते बुनियादी हर अस्तित्व के ये प्रहरी
रिश्तों बिना संभव नहीं होती है दस्तूरी दुनियादारी

“फूल से भी नाजुक से होते रिश्ते
व्यवहार की खाद से पोषित होते
अपनेपन के जल से सींचे जाते
त्यागी धूप से सदा फूल बन खिलते
“महक है जीवन की” हम, कहते हर “रिश्ते”

रचियता✍💝कमल भंसाली

💙 क्षमा 💚 कमल भंसाली

” क्षमा” को सरल व शांत जीवन के लिए सारगर्भित शब्द ही नहीं अपितु जीवन को सही निर्देश प्रदाता समझना सही होगा। इंसान कितनी ही ऊंचाइयों तक का सफर कर ले, उसकी जीवन अवधि तो सीमित ही रहती है। गलतियां दैनिक जीवन के व्यवहारों मे होने वाली एक सहज प्रक्रिया है, उन गलतियों को सुधारने में क्षमा के योगदान को हम पूर्ण रुप से नकार नहीं सकते। जैन धर्म व जैन शास्त्रों ने क्षमा को सिर्फ ह्रदय से जोड़ा ही नहीं अपितु आत्मशुद्धि का एक बेजोड़ साधन बताया है। इसके पीछे इसकी सात्विकता की सुंदरता को जानना जरूरी है। “समत्सवरी” के पावन अवसर का हर कोई सही उपयोग अगर करने की चाह रखता है तो “क्षमा याचना दिवस” कभी नहीं भूलना चाहिए। सभी व्यवहारिक सम्बन्धों के साथ हर रिश्तें को भी क्षमा द्वारा मधुरता प्रदान करनी चाहिए। क्षमा को कभी कायरता नहीं समझनी चाहिए, सच में तो ये तो वीरो का आभूषण है। आप सभी से मेरी भी क्षमा याचना मन, वचन और कर्म से किसी भी रुप मे अगर आप मुझसे आहत हुए । आशा है, आप “क्षमा” पर रचित इस मुक्क्तक रुप मे कविता का महत्व समझेंगे।
“क्षमा याचना” सहित
प्रस्तुति✍💖 कमल भंसाली 💟
💖💖💖💖💗💖💖💖💗💗💗💗💗💗💗

क्षमा सिर्फ जीवन का सार ही नहीं उसका यह आधार
लेने वाले का देने वाले पर कर्मो का दिया है अधिकार
क्षमा से ही तय होता जीवन का सहज सरल सा प्रकार
सच है यही तय करता जीवन का हर गंभीर आकार
💕
युग परिवर्तन से जीवन बहुत सी नकारत्मकता ले लेता
अहिंसा की चाहत पर हिंसा का बोलबाला बढ़ जाता
संयम का वजन बढ़ जाने से व्यवहार मधुरता खो देता
क्षमा की भावना फिर से जीवन को स्नेहभूत कर देता
💞
“क्षमा” का संदेश हर धर्म के गुरुओं की ज्ञानित भाषा
काम, क्रोध, मोह और लालच है हिंसा की परिभाषा
सहज जीवन जीना है तो न करे कभी कोई भी हिंसा
गलती हुई तो क्षमा मांगने व देने की रहे सदाअभिलाषा
💔
क्षमा स्वर्णिम सवेरा, दूर करता शत्रुता गहनतम अंधेरा
शंकित मन को करता निडर, ये है मित्रता की प्रेम डगर
इंसान कुछ भी हुआ भूल जाता अमृत का भंडार गहरा
सहनशीलता जीव का आधार क्षमा उसका एक प्रकार
💓
क्षमित हो न रखे कुछ भी वैमनस्य आत्मा के भीतर
क्षमा तहे दिल से जो करे देवत्व रहता है उसके अंदर
क्षमा जीवन आकाश का चंद्रमा शीतलता है बेशुमार
“क्षमा वीरस्य भूषणम”न समझे इसे कायरता का श्रृंगार
💘
रचियता: कमल भंसाली

😆तुम्हारी मुस्कराहट😅✍ कमल भंसाली

तुम जरा मुस्करालो
जिंदगी को मकसद मिल जायेगा
जरा मेरा यकीन कर लो
हर मंजिल को स्वर्णिम सवेरा मिल जायेगा
तमस में भटकती राहों को मंजिल द्वार मिल जाएगा
पथ गीतों को बहारों के आने का संदेश मिल जाएगा
तुम जरा….

तुम्हारे मुस्कराने के हर अंदाज से
चमन की हर कली खिलखिलाती
दीप आशाओं के प्रज्वलित करती
सुख सन्देश की किरणे बिखेर जाती
अपनी एक मुस्कराहट को जरा सहमति दे दो
मुस्कराकर जग को ये स्वर्णिम सा सन्देश दे दो
तुम जरा….

कल तुम्हारी मुस्कराहट जीवन पथ की हो जाएगी
तेरी मुस्कराहट मेरे से होती हर मंजिल तक जाएगी
हमारी हो जग में हर चेहरे की रौनक बन इठलाएगी
स्वरः वीणा के सुर में सज लय से मधुरता ही लायेगी
सह्रदय से निकली मुस्कराहट मंदाकिनी बन जाएगी
तुम….

कल न भी होंगे तो मुस्कराहट जहां में रहेगी
यह अमानत हमारी सदाबहार ही कहलाएगी
उपहार हमारा यह हर सांस में खुशबू ही फैलाएगा
हर दिन उज्ज्वलता की प्रखरता से निखर जाएगा
यह ख्याल कर जब हर कोई मधुरता से मुस्करायेगा
सच कहता जग मुस्कराहटों का गुलशन कहलायेगा
तुम जरा….

मायूसी को जिंदगी में न पनाह दो तो मुस्कराओगे
उदासी को अंदर तक न सैर कराओ तो मुस्कराओगे
प्रेम को जीवन का मकसद बनाओ तो मुस्कराओगे
मकरन्द बन कर छा जाओ तो भी तुम मुस्कराओगे
पल की एक मुस्कराहट से हर दिल मे बस जाओगे
तुम जरा…