🙌संवेदन पूर्ण सत्य🕸️कमल भंसाली

“दुनिया में अगर कोई सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है वह है “दूसरों के द्वारा बोलेजाने वाला सत्य”, यह एक तथ्य है, इससे इंकार करना शायद ही आसान होगा। “सत्य” बोलने वाले लोगो की तादाद नगण्य के आसपास ही अब रहती परन्तु किसी समय झूठ बोलने वालो की गिनती हुआ करती थी, इस बात को आज का आधुनिक युग शायद ही स्वीकार करेगा। आज सत्य को एक हारा हुआ खिलाड़ी या नेता भी स्वीकार करने से झिझकता है। शाश्वत चिंतन करे तो ये बात समझ में आ सकती है कि दुनिया का अस्तित्व पूर्ण सत्य में आज भी समाया है, हम चाहे या नहीं प्रकृति अपने आप को सत्य से अलग नहीं कर सकती। हम कितना ही झूठ का दैनिक जीवन में प्रयोग कर ले पर आत्मा उसे अंदर तक नहीं ले पाती, हमारे बोले हुए किसी भी झूठ पर उसका कराहना महसूस किया जा सकता है।

“हम जी रहे है यह सत्य हो सकता है” परन्तु हम ‘सही’ जी रहे ये संदेहपूर्ण है। सवाल किया जा सकता है, क्या सत्य पूर्ण जीवन जीया सकता है ? उत्तर आज के युग में आसान नहीं लग रहा कारण जीवन की गतिविधिया आजकल झूठ के इर्द गिर्द ही ज्यादा समय बिता रही है। कभी सत्य को जीवन की धुरी समझा जाता था, आज उसकी जगह झूठ ले रहा है, इसे जीवन की विडम्बना ही कहे क्योंकि जीवन आज इसी कारण शायद टूट कर बिखर रहा है। जीवन को आज सब सांसारिक सुविधायें बहुत तेजी से प्राप्त हो रही है और बताना भी जायज नहीं होगा जीवन अपना सास्वत मूल्य खो चूका है, और स्वयं ही किसी त्रासदी का शिकार होकर दुनिया को अलविदा कह देता है। सही भी है, झूठ का भारीभरकम वजन कब तक ढोयेगा।

चाणक्य राजनीति के गुरु थे उन्होंने राजधर्म के लिए कई तरह की चालाकियों का सहारा लिया परन्तु झूठ को दूर रहकर। उनके इस कथन पर गौर करते है ” सत्य मेरी माता है। आध्यात्मिक ज्ञान मेरा पिता है। धर्माचरण मेरा बंधु है। दया मेरा मित्र है। भीतर की शांति मेरी पत्नी है। क्षमा मेरा पुत्र है। मेरे परिवार में ये छह लोग है।” काश आज के राजनेताओं में इस तरह के विचार अपनाये हुए होते तो निश्चित ही भारत आंतरिक रुप से कमजोर और गरीब राष्ट्र की गिनती में न होता।

इंसान का व्यक्तित्व प्रकृति ने बड़ी सूझबूझ वाला बनाया है, सर्वगुण और अवगुण वाले संसार में उसको अपना व्यक्तित्व स्वयं निर्धारण करने का अधिकार भी उसे दिया। सक्षम व्यक्तित्व वाले व्यक्ति के जीवन दर्शन पर सरसरी नजर डालने से इस बात से इंकार नहीं करना पड़ेगा कि बिना असत्य का सहारा लिए वो इस मंजिल तक पंहुचे है।

असहाय सी स्थिति है आज जीवन की, भाग्य से प्राप्त खुशहाली अति अर्थ के दीमक से हर दिन जीवन को छीजत प्रदान कर रही है। पल की मोहताज जिंदगी अर्थ के कारण कटुता भरे वातावरण में कई तरह की शारीरिक और मानसिक बीमारियों के विषालु कीटाणुओं से ग्रस्त हो रही है। इस का प्रमुख कारण हम सब समझकर भी नहीं समझते वो है “अति दौलत की भूख”।
हर रोज हमारे आसपास ही क्या हमारे स्वयं के जीवन मे उसकी कमी या अति, जीवन को संकुचित होने का अनुभव कराती है। जब की जानते है, जब तक जीवन है, तब तक मालिक होने का दावा कर सकते है पर उसके बाद उसका मालिक कोई और स्वतः ही हो जाता। अतः इस सत्य को स्वीकार कर लेना ही सही होता है अर्थ के कारण किसी भी सम्बन्ध को कटुता का अनुभव न दिया जाय। कठिन समय मे आपसी प्रेम काफी फलदायक होता है।

कहते है जीवन की शुरुआत प्रेम से हुई और प्रेम सदा सत्य से संपन्न रहना पसन्द करता है, झूठ से वो सदा नफरत करता है। किसी शारीरिक बंधन के चलते वो झूठ को मजबूरी से सहन करता है। इस तथ्य को रिश्तों की दुनिया में सदृश्य समझा जा सकता है। रिश्तों के बनते बिगड़ते तेवर जीवन को कई तरह से प्रभावित करते है। रिश्तों की मधुरता जीवन को सकारात्मक चिंतन प्रदान कर उसे मजबूत कर सकती है। गलत भावनाओं के बस में होकर रिश्तों में कटुता का संकेत देना मात्र जीवन के पथ को कठोरता प्रदान कर सकता है, अतः रिश्तों के प्रति हमारी संवेदनशीलता में सत्य का अंश सही मात्रा में रखना उचित लगता है। जीव विज्ञानी डेविड जार्ज हस्कल का यह कथन आज के युग अनुसार अक्षरस सत्य लगता है कि ” The forest is not a collection of entities (but) a place entirely made from strands of relationship”.

आलोचना से पीड़ित प्रेम कभी भी जीवन को सुख नहीं देता परन्तु समझने की बात है बिना आलोचना का प्रेम चापलूसी की या गुलामी की श्रेणी में आता है, प्रेम का निम्नतम पतन भी यहीं होता है, इस सत्य को कितना ही कड़वा कह लीजिए पर ह्रदय इसे स्वीकार कर सन्तुलित रहता है। आधुनिक अर्थतन्त्र की इस दुनिया की विडंबना ही कहिये इंसान के पास हजारों साधनों का भरपूर भंडार हर दिन तैयार हो रहा है, शरीर नाच रहा सब कुछ भोग रहा पर मन तो खालीपन का शिकार हो रहा। सबके रहते इंसान जब उम्र या किसी कारण से लाचार होता है तो टूट कर बिखर जाता है और दिल के अरमान दिल मे ही रह जाते, कोई सुनने वाला, कोई मन से सेवा करने वाला नहीं रहता उसके आस पास। इसका एकमात्र सत्य उतर यही हो सकता:

“जो दिया नहीं वो मिला नही
झूठ से सत्य कभी दबा नहीं
प्रेम को साधन नहीं संवेदना चाहिए
सही जीने के लिये इस सत्य की समझ चाहिए”

लेखक: कमल भंसाली ।

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👏मेरे प्रभु👏कमल भंसाली✍️

हे प्रभु
खूबसूरती मेरे जीवन को दीजिये
मेरी सारी कमियों को हर लीजिये
पथ की कठिनाइयों को दूर कीजिये
महत्व जीवन का सब समझा दीजिये
👏
हे प्रभु
जिसे अभी तक जीवन समझता रहा
आपको भूल रास्ते नये तलाशता रहा
उनकी हर कमी को ही अपनाता रहा
इस भूल को मेरी आज सुधार दीजिये
👏
हे प्रभु
मानव मन मेरा सदा कमजोर रहा
वासनाओं के फूल ही सूंघता रहा
संयम ही जीवन है ये भूलता रहा
इस भूल का निदान समझा दीजिये
👏
हे प्रभु
असत्य की धुरी पर घूमता रहा जीवन
पथ भटका न मिली कोई सही मंजिल
आदर्शों के गीत तो सदा ही गाता रहा
पर अपनाने से हरदम ही कतराता रहा
जीवन की सही मीमांसा समझा दीजिये
👏
हे प्रभु
जीवन आपका दिया है पवित्र वरदान
समर्पण आप में ही रहे जब तक रहे प्राण
जिस विधि से करुं मैं सही से वापस प्रयाण
उस यज्ञ की सारी रस्में आज समझा दीजिये
👏
हे प्रभु
सकल सफल रहे मेरा यह अनमोल जीवन
हर पथ आपको समर्पित होकर बने पावन
इस जन्म की हर पीड़ा का हो यहीं समापन
गमन पथ को अब मेरी मंजिल समझा दीजिये

👏🏼रचियता और प्रार्थना कार✍️ कमल भंसाली👏

👿रिश्ते👿कमल भंसाली

जिन रिश्तों में दिल नहीं दिमाग नजर आये
उनमें अपनेपन की छावं कम ही नजर आये
अति पास होकर भी दूर की आवाज बन जाये
रिश्तों का ये स्वरुप देखकर मन घबरा जाये

माना स्वयं स्वार्थ में रचा बंधा है जग सारा
पर प्यार के सैलाब में ही बहता जग सारा
टूट जाता जब दिल तो कोई अपना नहीं लगता
रिश्तों की दुनिया मे आदमी अकेला सब सहता

कुछ रिश्तों की अपनी ही होती मजबूरिया
नजदीक के होकर भी उनकी अपनी दूरियां
दस्तूर निभाता जीवन ये सब कुछ सह लेता
पर अपनों के दिये दर्द से कभी उभर न पाता

नये युग का एक ही फलसफा है मेरे भैया
इस युग में प्यार से बड़ा है ठनठनाता रुपया
बुद्धि और भाग्य से जिसने भी इसे जब पाया
वो रिश्तों के प्रति संकुचित होते नजर आया

पर कुछ भी कह लो रिश्तों का पेड़ अब भी हरा
शरीर जब जबाब दे तब रिश्तों से मिलता सहारा
सम्बन्ध होते बुनियादी हर अस्तित्व के ये प्रहरी
रिश्तों बिना संभव नहीं होती है दस्तूरी दुनियादारी

“फूल से भी नाजुक से होते रिश्ते
व्यवहार की खाद से पोषित होते
अपनेपन के जल से सींचे जाते
त्यागी धूप से सदा फूल बन खिलते
“महक है जीवन की” हम, कहते हर “रिश्ते”

रचियता✍💝कमल भंसाली

💙 क्षमा 💚 कमल भंसाली

” क्षमा” को सरल व शांत जीवन के लिए सारगर्भित शब्द ही नहीं अपितु जीवन को सही निर्देश प्रदाता समझना सही होगा। इंसान कितनी ही ऊंचाइयों तक का सफर कर ले, उसकी जीवन अवधि तो सीमित ही रहती है। गलतियां दैनिक जीवन के व्यवहारों मे होने वाली एक सहज प्रक्रिया है, उन गलतियों को सुधारने में क्षमा के योगदान को हम पूर्ण रुप से नकार नहीं सकते। जैन धर्म व जैन शास्त्रों ने क्षमा को सिर्फ ह्रदय से जोड़ा ही नहीं अपितु आत्मशुद्धि का एक बेजोड़ साधन बताया है। इसके पीछे इसकी सात्विकता की सुंदरता को जानना जरूरी है। “समत्सवरी” के पावन अवसर का हर कोई सही उपयोग अगर करने की चाह रखता है तो “क्षमा याचना दिवस” कभी नहीं भूलना चाहिए। सभी व्यवहारिक सम्बन्धों के साथ हर रिश्तें को भी क्षमा द्वारा मधुरता प्रदान करनी चाहिए। क्षमा को कभी कायरता नहीं समझनी चाहिए, सच में तो ये तो वीरो का आभूषण है। आप सभी से मेरी भी क्षमा याचना मन, वचन और कर्म से किसी भी रुप मे अगर आप मुझसे आहत हुए । आशा है, आप “क्षमा” पर रचित इस मुक्क्तक रुप मे कविता का महत्व समझेंगे।
“क्षमा याचना” सहित
प्रस्तुति✍💖 कमल भंसाली 💟
💖💖💖💖💗💖💖💖💗💗💗💗💗💗💗

क्षमा सिर्फ जीवन का सार ही नहीं उसका यह आधार
लेने वाले का देने वाले पर कर्मो का दिया है अधिकार
क्षमा से ही तय होता जीवन का सहज सरल सा प्रकार
सच है यही तय करता जीवन का हर गंभीर आकार
💕
युग परिवर्तन से जीवन बहुत सी नकारत्मकता ले लेता
अहिंसा की चाहत पर हिंसा का बोलबाला बढ़ जाता
संयम का वजन बढ़ जाने से व्यवहार मधुरता खो देता
क्षमा की भावना फिर से जीवन को स्नेहभूत कर देता
💞
“क्षमा” का संदेश हर धर्म के गुरुओं की ज्ञानित भाषा
काम, क्रोध, मोह और लालच है हिंसा की परिभाषा
सहज जीवन जीना है तो न करे कभी कोई भी हिंसा
गलती हुई तो क्षमा मांगने व देने की रहे सदाअभिलाषा
💔
क्षमा स्वर्णिम सवेरा, दूर करता शत्रुता गहनतम अंधेरा
शंकित मन को करता निडर, ये है मित्रता की प्रेम डगर
इंसान कुछ भी हुआ भूल जाता अमृत का भंडार गहरा
सहनशीलता जीव का आधार क्षमा उसका एक प्रकार
💓
क्षमित हो न रखे कुछ भी वैमनस्य आत्मा के भीतर
क्षमा तहे दिल से जो करे देवत्व रहता है उसके अंदर
क्षमा जीवन आकाश का चंद्रमा शीतलता है बेशुमार
“क्षमा वीरस्य भूषणम”न समझे इसे कायरता का श्रृंगार
💘
रचियता: कमल भंसाली

😆तुम्हारी मुस्कराहट😅✍ कमल भंसाली

तुम जरा मुस्करालो
जिंदगी को मकसद मिल जायेगा
जरा मेरा यकीन कर लो
हर मंजिल को स्वर्णिम सवेरा मिल जायेगा
तमस में भटकती राहों को मंजिल द्वार मिल जाएगा
पथ गीतों को बहारों के आने का संदेश मिल जाएगा
तुम जरा….

तुम्हारे मुस्कराने के हर अंदाज से
चमन की हर कली खिलखिलाती
दीप आशाओं के प्रज्वलित करती
सुख सन्देश की किरणे बिखेर जाती
अपनी एक मुस्कराहट को जरा सहमति दे दो
मुस्कराकर जग को ये स्वर्णिम सा सन्देश दे दो
तुम जरा….

कल तुम्हारी मुस्कराहट जीवन पथ की हो जाएगी
तेरी मुस्कराहट मेरे से होती हर मंजिल तक जाएगी
हमारी हो जग में हर चेहरे की रौनक बन इठलाएगी
स्वरः वीणा के सुर में सज लय से मधुरता ही लायेगी
सह्रदय से निकली मुस्कराहट मंदाकिनी बन जाएगी
तुम….

कल न भी होंगे तो मुस्कराहट जहां में रहेगी
यह अमानत हमारी सदाबहार ही कहलाएगी
उपहार हमारा यह हर सांस में खुशबू ही फैलाएगा
हर दिन उज्ज्वलता की प्रखरता से निखर जाएगा
यह ख्याल कर जब हर कोई मधुरता से मुस्करायेगा
सच कहता जग मुस्कराहटों का गुलशन कहलायेगा
तुम जरा….

मायूसी को जिंदगी में न पनाह दो तो मुस्कराओगे
उदासी को अंदर तक न सैर कराओ तो मुस्कराओगे
प्रेम को जीवन का मकसद बनाओ तो मुस्कराओगे
मकरन्द बन कर छा जाओ तो भी तुम मुस्कराओगे
पल की एक मुस्कराहट से हर दिल मे बस जाओगे
तुम जरा…

🚱सारगर्भित जीवन🚱कमल भंसाली

“It seems to me that the natural world is the greatest source of excitement; the greatest source of visual beauty; the greatest source of intellectual interest. It is the greatest source of so much in life that makes life worth living.” ***David Attenborough***

सही ही लगता है, प्रकृति, प्यार और इंसान दुनिया की तीन बेशकीमती ताकते है। जिनके बिना इस संसार की कल्पना भी नहीं की जा सकती, जहां हम एक संक्षिप्त अवधि का जीवन अनेक तरह के अहसासों के साथ हर क्षण जीने का प्रयास करते है। इसी प्रयास को शायद हम जीवन भी कहते है। मानव का सबसे पहला रिश्ता अगर प्रकृति से माना जाय तो गलत नहीं है, क्योंकि हर प्राणी ही नहीं, हर वस्तु का सृजनकर्त्ता किसी न किसी रुप में वो ही है। अंततोगत्वा यही कहना सही होगा जीवन प्रकृति और प्रेम का सुंदर समिश्रण है। सही ढंग से जीने से आत्मानंद का अहसास जीवन अवधि तक होता रहेगा। सारगर्भित जीवन का अहसास स्वर्ग जैसा आनन्द इसी धरती पर प्रकृति, प्यार और इंसानी परिवर्तन से पाया जा सकता है, लेखक का मानना है यह सिर्फ एक सही और सुंदर कार्यकुशलता में विश्वास रखने वाला प्रबुद्ध व्यक्तित्व ही कर सकता है।

कुछ लोग ये मानकर सन्तोष कर लेते है, सुख और दुःख कर्मो के साथ भाग्य का खेल है। कथन की सत्यता या असत्यता पर सवाल न उठाकर यह प्रश्न किया जा सकता है, कि अगर ऐसा होता भी है तो क्या निष्क्रिय जीवन किसी भी तरह का अनुभव दे पाता ? माना जीवन की किसी भी स्थिति पर कोई दावा नहीं प्रस्तुत किया जा सकता, पर हम कह सकते है कि हमारे सांसारिक जीवन की एक सत्यता को आज भी हम मानते है कि जीवन सुख दुःख की छांव तले ही अपनी आयु सीमा की ओर का सफर करता है। इस यात्रा के दौरान जब भी जीवन असहज हो विपरीत परिस्थितियों का अनुभव करता है, तब, दुःख अपनी चरम सीमाओं के साथ उसकी मजबूती की परीक्षा लेने हर जगह तैयार रहता है। यही समय सही होता है जब जीवन को अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन करना चाहिए, उसे हर गलती का सही मूल्यांकन कर दुःख को सारी निराशाएं वापिस लौटाकर अपने आगे के पथ की निरंतरता को सहजता प्रदान करनी चाहिये। पर ऐसा होता नहीं क्यों की सुख का आदी जीवन सुख भोगते भोगते बहुत सी कमजोरियों की गुलामी करने लगता है। प्रश्न किया जा सकता है, क्या सुख के कारण जीवन की क्षमताओं का ह्यास होने लगता है ? इस प्रश्न का सहज व सरल उत्तर यही है कि “अति” कैसी भी हो कितनी भी हो, नुकसान दायक ही होती है। जैसे हर देश सीमाओं के द्वारा विभक्त होता है, हर अति की सीमा संयमन होती है। अपनी क्षमताओं से ज्यादा उल्लंघन करने से जीवन विरोधी तत्व संग्रहित हो, खिन्नता का वातावरण तैयार करते है, और सुख के क्षण के अहसास उनके सामने लाचार से हो जाते है।

इस लेख का सारांश आप तय करे तो इतना ही कीजियेगा की वर्तमान के अच्छे जीवन को हम चाहे तो काफी और बेहतर कर सकते है। जी हां, “परिवर्तन” बहुत हि मोहक और अदाकारी शब्द है, परन्तु निरन्तरता से ही ये जीवन सहायक दोस्ती निभाता है, नहीं तो अजनबी की तरह कुछ क्षण के लिए ही मुस्कराता है। कुर्त लेविन के अनुसार यदि किसी चीज को अच्छी तरह समझना चाहते है तो उसे बदलने की कोशिश करनी चाहिए, खासकर आदतों को। हम जीवन में जिन दैनिक सुखों का अनुभव करते है या करना चाहते है वो मन की खुशियां ज्यादातर सफलता और आपसी सम्बंधों की मधुरता में ज्यादा निहित होती है। शरीर का स्वस्थ स्वास्थ्य और अर्थ का संक्षिप्त साम्राज्य अगर हमारे पास है और उन पर हमारा आत्मिक शासन नीतिगत के तहत सही ढंग से काम कर रहा है तो सदा यकीन इसी पर कीजिये, इस चिंतन के साथ की इससे ” बेहतर” अभी कुछ और भी आगे है। प्रकृति का एक निश्चित सन्देश हर मानव को जन्मतें ही मिल जाता है, मेरी शुद्धता तेरी जीवन साँसों की चाहत है हो सके तो इस रिश्ते की गरिमा को समझ कर ही मेरे साधनों का जरुरतमय और सही उपयोग करना। काश हम इस सन्देश की गरिमा को समझ पालन कर पाते। निश्चित मानिए, सार्थक जीवन का यही सही सार है, प्रकृति की महिमा को समझा, अपने ही जीवन की आस्थाओं को मान सम्मान का अहसास कराता है।

हर इंसान बेहतर होता है, हर एक का जीवन जीने का तरीका भी भिन्न होता है, पर सभी का मनपसंद जीवन पथ खुशियों की राह चाहता है। आइये, कुछ चमत्कारिक तथ्यों पर गौर करते है, जिन्हें हम जानते है, पर अपनाने की कोशिश बहुत ही कम करते है। इस तथ्य से इस लेख का कभी कोई इंकार नहीं कि हम अभी भी बेहतर जीवन जी रहे है, पर बेहतर को और बेहतर बनाने से परहेज करना भी सही नहीं महसूस होता। एक समझ भरी सही सलाह को सही रुप से समझने से इंकार भी नहीं होना भी उचित होता है। अगर कुछ अदृश्य कुशलता का हम प्रयोग कर हम स्वयं की खुशियों, सफलता और सम्बंधों को कुछ क्षणों के लिए और बढ़ाते है, तो निसन्देह इसे हम सोने पर सुहागा ही कहेंगे। चलिए जानते है, कैसे कुछ अतरिक्त क्षणों को जिससे इन्हें हम हासिल करने का प्रयास कर सकते है।

यहां स्वयं के लिए यह मानना उचित होता है कि हम दुनिया में अच्छे और बुरे दोनों ही रुप से मूल्यांकित होते है, अतः गलत भी स्थिति वश हमारा कोई मूल्यांकन करता है, तो वो हमारे लिए निराशा का कारण न होकर स्वयं को अवलोकन करने का आधार मानना चाहिए। इस तरह हमारी भावनाओं में उत्साह और उमंग भरे तत्वों का आवागमन होता रहेगा और सही समय पर हमारे प्रति नकारत्मक चिंतन रखने वाले अपने गलत चिंतन की दिशा भी बदल देंगे।

जिंदगी को अगर हम सिर्फ साँसों की आवाजाही का साधन न मान उसे कुछ अतिरिक्त प्रयासों से उसे मान देते है, तो निश्चित है, ऐसे सही प्रयास, सही राह की सैर करने वाले लोगों की राह में खुशियों के फूल बिखरेने का काम कर सकते है। इन प्रयासों में साँसों और मस्तिष्क का तालमेल का रहस्य इंग्लिस फिल्मों के कलाकार Allisan Janney के इस कथन में निहित है, गौर जरूर कीजिये ” I do the best I can. Everything is everybody else’s problem. संसार में अपने सीमित अस्तित्व की पहचान ही सक्षमता निर्माण के योग्य होती है। कुछ लोग सस्ती प्रसिद्धि के चक्कर में इस तथ्य को नजरअंदाज कर देते है, ये एक मानसिक कमजोरी के अलावा कुछ नहीं है।

जब अवस्थाये कभी विपरीतता का सन्देश दे तो हमें तीन तत्वों पर सदा ध्यान देना चाहिए वो है समझ, समय और संयम इनका सही अनुपात में उपयोग आत्मिक और मानसिक स्वास्थ्य को सम्बल प्रदान कर सकता है। ऐसी अवस्था में परिवार में मुख्य अनुभवी माता पिता और बुजर्ग लोगों के सुझावों पर जरूर प्रध्यान करना चाहिए क्योंकि वक्त की कसोटी पर उनका ज्ञान काफी सार्थक होता है। परिवार के हो रहे विभाजन से जीवन को काफी क्षति पंहुच रही है, ये इन दिनों में घट रही आत्महत्या की घटनाओं से समझा जा सकता है। माना जा सकता है, परिवर्तन एक सांसारिक नियम है, साथ में साधनों के विकास अनुरूप मानव स्वभाव भी बदलता रहता है। पर परिवर्तन और बदलाव अगर जीवन को आनन्दमय होने का अहसास दे, तो सही लगते है, नहीं तो गलत परिणाम का खामियाजा जिंदगी को ही भुगतान करना है। ये ही सोच अगर हम परिवर्तनमय होते है, तो सही दिशा की ओर हम अपनी जिंदगी का रुख कर रहे है, यकीन कीजिये। सारगर्भित जीवन हमारी आंतरिक मानसिक दशा का सम्पन्न मूल्यांकन तो करता ही है, साथ में हमें इस जहां में आने का मकसद भी बताता है।
जीवन को सारगर्भित करने वाले कुछ इंसानों के इन कथनों पर एक नजर इनायत की डालिये, कहना न होगा जीवन के गुलशन में आनन्द की बहार छा जायेगी, अगर इनसे हम अपने जीवन में कुछ परिवर्तन करते है, तो।

1. शेक्सपियर के अनुसार हमें किसी की भावनाओं से इसलिये कभी खिलवाड़ नहीं करना चाहिए कि हम उससे आगे बढ़ जाये। हो सकता है हम कुछ क्षण के लिए जीत जाये पर ऐसे सक्षम इंसान का सानिध्य हम जिंदगी भर के लिए खो देंगे।
2.नेपोलियन के अनुसार संसार को खराब आदमियों से फैलायी हिंसा उतना डर नहीं है, जितना कि अच्छे लोगों की चुप्पी से।
3.आइंस्टीन ने अपनी सफलताओं के लिए उन लोगों को धन्यवाद दिया जिन्होनें उन्हें किसी भी तरह के सहयोग से इंकार किया। इससे उन्हें स्वयं हर कार्य करने की प्रेरणा मिली।
4. अब्राहम लिंकन ने दोस्ती की परिभाषा कुछ इस तरह की ” अगर दोस्ती आपकी कमजोरी है तो यकीन कीजिये आप दुनिया के सबसे मजबूत आदमी है।
5. किसी को हर समय खिलखिलाते देख कभी इस बात का अंदाज नहीं लगाना चाहिए कि उनके जीवन में दुःख है ही नहीं, हां, यह हो सकता उन्होंने दुःख को संयम से आत्मसात करना सीख लिया होगा..शेक्सपियर
6. मौका मिलना सूर्य उदय के समान है अगर आप देर से जागरुक होते है तो हो सकता है आप उसे खो दे। ..विलियम आर्थर
7. सत्य है, जब हम सफल होते है तो शायद बहुत से लोग हमें प्रेरणा के लायक समझे परन्तु जब कभी हम असफलता के अन्धकार में प्रवेश करते है तो हमारी छाया भी हमारा साथ नहीं निभाती। हिटलर
8. खुदरा रेजगी सदा शोर करती है, परन्तु नोट सदा शांत रहते है, यानी जब हमारा सफलताओं मूल्य बढ़ता है, तो हम गंभीर हो जाते है ..शेक्सपियर
9. मैदान में हारा हुआ इंसान फिर से जीत सकता है पर मन से हारा इंसान कभी नहीं जीत सकता।
लेख समापन से पहले अर्नाल्ड श्र्वाजनगेर के इस कथन पर ध्यान देना सही होगा कि ताकत जीतने से नही आती, आपके संघर्ष आपकी ताकत पैदा करते है। जब आप मुसीबतों से गुजरते है और हार नहीं मानते है, वही ताकत है, शायद वह आपके जीवन की सारगर्भिता भी हो। सारांश में जीवन में सही मौलिक परिवर्तन अपनाइये, जीवन आपसे प्यार करेगा। लेखक: कमल भंसाली