😜पर्यावरण🤑 कमल भंसाली

वक्त बेवक्त
बड़ी बेवजह
जिंदगी मुझसे
अपने होने की वजह पूछती
मेरे अंदर के
कलुषित रक्त को
तंग करती
तमतमा कर
उससे यही कहता
मेरी होकर
वो ये सब क्यों पूछती ?
मुझमे अपने होने की
विश्वास की कमी
अक्सर
क्यों ढूंढती ?

सहम सी जाती
थोड़ी धीमी हो जाती
पर बुदबुदाती
अपने ही गैरों जैसे होते
नाजुक रिश्तों को भूल जाते
वजूद मेरा भी
तिलमिला जाता
जिंदगी मेरी ही है
ये मैं भी भूल जाता

पर जब कभी
बाद में शांति से सोचता
सन्दर्भ जब रिश्तों का आता
तो सही से मन में
उनका अस्तित्व क्यों धुंधला जाता
प्यार में
कभी कभी
शक के धुंए का
फूल कैसे उग जाता !

तब यही समझ में आता
हक और अधिकार की रफ्तार में
दिल का पर्यावरण बिगड़ जाता
मैल कहीं तरह से
दिल पर शक की घनेरी कालिख छोड़ जाता
जिंदगी का सवाल
उत्तर की वजह दे जाता
अपने अस्तित्व को
एक नया आयाम दे जाता

रचियता कमल भंसाली

😁जरा मुस्कराइये😀 कमल भंसाली

“मुस्कराहटों” की अगर वजह होती
तो यकीन कीजिये
“जिंदगी” दिल की दुनिया
से दूर ही रहती
फिर शायद
अजनबी राह में स्वयं चलने को
बिन मकसद मजबूर होती
कुछ नहीं कहती
चुपचाप
बेवजह साँसों का साथ निभाती
इसलिए जरा दिल की भी सुनिये
मुस्कराने की वजह मत ढूंढिये
सिर्फ
“मुस्कराइए”
🌹
कुछ लम्हें बहुत खूबसूरत होते
उनमें जीने के अंदाज निराले होते
निगाहों में हजारों हसीन सपने तैरते
आस्थाओं के “कमल” चाहे उनमें कुछ ही खिलते
मुस्कान मुखरित गुल हो
चमन को गुलिस्तां बना देते
जरा धड़कते दिल से सोचिये
बेवजह भी कभी
सिर्फ
“मुस्कराइये”
🌹

माना हर चुभन से दिल घबराता
जब कभी
जहां की चट्टानों से टकराता
“प्यार” की ख्वाईस रखने वाला क
नाजुक दिल
अपनी ही उदासियों में बिखर जाता
यकीन मानिये
एक मुस्कान से उभर भी जाता
जरा अपने दिल की सुनिये
मुस्कराने की आदत पैदा कीजिये
सदा मुस्कराइये
सिर्फ
“मुस्कराइये”
रचियता✍ कमल भंसाली

🍸सफर है प्यार भरा जिंदगी का🍻 कमल भंसाली

बयां नहीं करते वो कभी दिल की दास्तां
सफर जो करते देकर प्यार का वास्ता
कितना कुछ राह में बिखर निखर जाता
फिर भी दिल तो प्यार के नगमें ही गाता
💕💘💕
जिंदगी के दर्पण में मौहब्बत को निहारिये
दर्द को सौगात समझ कर दिल से अपनाइये
मुस्कराहट को सुर्ख लबो पर पनाह दीजिये
महफ़िल को सिर्फ नग्मों की सौगात दीजिये
🎷🎷🎷
गुजारिश है मायूसी से वफ़ा न कीजिये
अति अधिकार जिंदगी को कतई न दीजिये
कांटो को चुन गुलों को इल्जाम न दीजिये
पांव तो नाजुक होते दर्द को अहसास न दीजिये
🏇🏇🏇
सिर्फ हसरतों से ही मौहब्बत कब फलती फूलती
खुदगर्जी की चाह में अपनी नजर भी पराई दिखती
दस्तूरों का भी एक इतिहास है उस पर नजर डालिए
जिंदगी साँसों का तराना हवाओं को सलाम कीजिये
⛹⛹⛹
जुदा होना आज नहीं तो कल की होगी हकीकत
सच्ची मौहब्बत ही होगी खुदा से की पाक इबादत
फलसफा है जहां का सिर्फ जीने की होती है जरुरत
वफ़ा की इंतहा कुछ और पर जिस्म की चाह है मौत
🎎🎎🎎
चाहे इतनी क्यों मगरुर हो जाये मशहूर हो जाये
इतने क्यों गिर जाए कि वफ़ा भी दागदर हो जाये
बदबख्त बदन बिन जन्नत के ही बेनाम हो जाये
बदनसीबी तमाम उम्र को दोजख की सैर कराये
♨♨♨
रुखसत हो जाएंगे कल खुली पलको को बंद कर
चंद दिन का जीना क्या करेंगे खुदगर्ज बन कर
पैगाम प्यार का देकर जाना याद करेगा जमाना
क्या पता फिर कभी किसी रुप में फिर हो आना
🎨🎨🎨
ये जिंदगी किस तरह जीना जिसने भी सही से जाना
इतिहास गवाह न होकर भी लगता जाना पहचाना
धरा के चाँद सितारे न बने कोई शिकवा नहीं करना
इंसान बन आये इसलिए शैतान बन कर नहीं जीना
🔪🔪🔪
रचियता✍ कमल भंसाली

💕जिंदगी का मन💕 ✍कमल भंसाली

एक किताब है “जिंदगी”
लबालब आस्थाओं से भरी
पर अपने ही मन से
रहती सहमी और डरी
कर्म पथ की जब भी करती अवलोकन
सामने आकर खड़ा हो जाता मन
मंजिल की चाहत में
सब कुछ दाव पर लगाती
पर मन की करतूतों से हार जाती
पर अपनी हार पर जिंदगी कभी अफ़सोस नहीं करती
मन ही थक हार जाता
वो तो सदा प्रयास ही करती
ऐ जिंदगी तुझे सलाम

कब रुकी वो कब झुकी कभी
वो याद नहीं करती
राह है कैसी भी हो
सदा उसी पर ही चलती
किस पर कैसे चलना
यह मन तय करता
इसलिए वो जीने मरने से भय करता
ऐ जिंदगी…

किसने प्यार किया !
किसने इंकार किया !
किसने दिल को दर्द दिया
किसने गहरा घाव दिया !
किसने दिल को प्रेम दिया!
फर्क कभी वो नहीं करती
सब कुछ सहन करती
विद्रोह तो मन ही करता
ऐ जिंदगी ….

आश निराश दोनों के जल को पीती
फर्क नहीं अपने आंसुओं का करती
ख़ुशी और गम दोनों से ही
अपनी पलके सींचती
सुख दुःख दोनों धूपछांव में जीती
सत्य के दायरे में रहकर
कभी कभी झूठ को भी गले लगाती
अस्वीकार की राजनीति तो मन करता
ऐ जिंदगी…

भली भांति
वो सब कुछ जानती
जीना है इस जहां के दस्तूरों में
रहना है अतृप्ति भरे अंधेरो में
मुस्कराहट अधरों पर रहे
प्राणों भरी देह सदा संस्कारित रहे
जिंदगी, अपने जीने के हर अंदाज पर गर्व करती
समय आने पर मृत्यु का भी स्वागत करती
मन ही हार कर
अपने अफ़सोस को समृद्धि समझता
अपने ही बनाये अतृप्त सरोवर में डूब जाता
फलसफा इतना ही समझ में आता
जिंदगी को तो सदा जीना ही आता
मन ही विचलित हो राह भूल जाता
ऐ जिंदगी…

रचियता✍ कमल भंसाली

💖प्रेमसत्यम💖 कमल भंसाली

दर्द ऐ दास्तां
बहुत कुछ कहती
जिंदगी
गमगीन गेरो से नहीं
अपनों से होती
मोह के चक्रव्यूह में
प्रेम को ढाल समझ
चुप, छुप सब कुछ सहती
जग ने जाने
इसी ख्याल में
तमाम उम्र की पीड़िता बन जाती
मानसिक विक्षप्ता से त्रस्त हो
स्वयं में स्वयं को तलाशती
अफ़सोस से कहती
काश उसे
“अपनों के अपनेपन की समझ होती ” !

समझ अगर
इतनी ही रखे जिंदगी
कोई किसी का कुछ नहीं
किसी की “साँसों” पर,
कोई भी सम्बन्ध न्यौछावर नहीं
शब्दों का खेल है
“प्रेम”
इसमें उलझे नहीं
दस्तूर स्वार्थ के
सब हंस के निभाये
ताकि तीर निशाने पर लग जाये
इसलिए सब “प्रेम” “प्रेम” की रट लगाये

सार यही समझ में आया
दर्द के पहलू में
अपनों का दिया जब गम समाता
प्रत्यमित्र जिंदगी को बना देता
अफ़सोस से
भीतर भीतर ही जिंदगी कुलबुलाती
शायद बुदबुदा कर कहती
काश ” सच्चे प्रेम” और ” मोह” का अंतर समझती
तो प्रेम को प्रदूषित नहीं बनाती
जग में “प्रेम” को परिभाषित कर पाती
।।प्रेम ही “सत्यम, सुंदरम”।।

रचियता कमल भंसाली

🍃सफलता सूत्रम🍃 जीवन उपयोगी मुक्तक कविता ✍कमल भंसाली✍

अफसोस न कर जिंदगी अपनी नाकामियों का
ये नाप नहीं अपनी छिपी हुई हर क्षमताओं का
ये तो सिर्फ एहसास अपने कम किये प्रयासों का
हार नहीं स्वीकार फलसफ़ा है हर सफलता का

अनैतिकता से अर्जित हर सफलता होती अधूरी
सत्यता की कसौटी पर खरी नहीं उतरती कभी पूरी
हर मंजिल तक पंहुचने के अपने अपने होते दस्तूर
जो स्वयं की क्षमताओं से अनजान वो ही उतना दूर

कल की गलती कभी आज न दोहराना
हर गलती में हो सुधार, यह पाठ अपनाना
छिपी हुई गलतिया की चाल को समझना
इज्जत के नाम पर उन्हें कभी न छिपाना

दृढ़ता संकल्पों में सदा उद्धेश्य बनाये रखना
आलस्य की गहराई से स्वयं को दूर ही रखना
मेहनत ही दवा, हर घायल कर्म को समझाना
आश्रित न हो हर कर्म को खुद्दारी से सजाना

मंजिले नहीं होती उतनी दूर जितनी तुम्हें दिखती
बैठे बैठे कोई भी यात्रा संपूर्णता नहीं प्राप्त करती
चलने वाली राही बन, तेरी सांसों को गति मिलती
ठहर जो जाता उसे कर्म की निर्मलता नहीं मिलती

कल कल बहते वक्त के धारे करते ही रहते इशारे
जो न समंझे उनसे दूर हो जाते मंजिल के किनारे
इतना ही तेरे भाग्य काअफसाना कहते ग्रह सितारे
सफल वही जो ढूंढ ले आने के अदृश्य मकसद सारे

दास्तन ऐ जिंदगी मेरी दोस्त ये ही दर्शाती
हर कर्म से तय होती तेरी मेरी जहां में हस्ती
सफलता-असफलता पथ के है चंचल पथिक
चलते चलते जब जो मिले वो ही अस्तित्व के प्रतीक

रचियता🍂✍ कमल भंसाली

👤जिंदगी रुठती रही🙏कमल भंसाली

जिंदगी रूठती रही, मैं मुस्कराता रहा
ख्बाबों के टूटने का सिलसिला जारी रहा
फिर भी रूठी जिंदगी को प्रयासों से मनाता रहा
कभी कभी उसके न मानने की वजह तलाशता रहा
जिंदगी….

दर्पण में सूरत ने भी मुस्कराने से इंकार कर दिया
दिल की देहरी पर थकावट ने अपना डेरा डाल दिया
प्यार के दस्तूरों ने जज्बातों से सदा मजाक ही किया
हूनर सारे भूलकर फिर भी जीवन पथ पर चलता रहा
जिंदगी…

हर जायज ख्वाइस निराशा के जाम में डूब इतराने लगी
ख़ुशी के कदमों की आहट से जिंदगी डर कर भागने लगी
स्वयं को मूल्यांकित किया तो कीमते भी बगले झांकने लगी
उलझनों के दौर में फिर भी नन्ही खुशहाली को तलाशता रहा
जिंदगी…

जब सब कुछ लूट गया तो वक्त के कदम ठहर गये
अजनबी हसरतो के काले साये भी अदृश्यत् हो गये
झलक मुस्कराहट की दर्पण के टूटे शीशे में समा गई
रूठी जिंदगी , बन्द नैनों की एक बूंद से निरुत्तर हो गई

अब मैं रूठ गया, जिंदगी मुस्करा कर ठहर गई
प्रतीक्षित हो, अपने अनुराग का परिचय दे गई
तुमसे ही है मेरा जहां, कान में धीमे से बोल गई
न नाराज होगी मुझसे वो फिर कभी, ये सन्देश दे गई

रचियता: कमल भंसाली

😂”अफसोस” 😯आत्महत्या😢 के चिंतन से पहले की कविता ✍कमल भंसाली

दोस्तों, जिंदगी कभी कभी विषम परिस्थितियों से गुजरते हुऐ नकारत्मक्ता के चंगुल में फंस जाती है तथा सम्बंधों और रिश्तों के ऊपरी व्यवहार के कारण तन्हा ही सारे दर्द का अनुभव संचित करती है। जब विपरीतता से निकलने में असमर्थ हो जाती है तो उसे अपने वजूद पर अफ़सोस होता है। वो इसी “अफ़सोस” की गिरफ्त में आते ही स्वयं को समाप्त करने की सोचती है। “अफ़सोस” जिंदगी की आखरी खव्वाहिस मौत के चिंतन को मजबूती प्रदान कर सकारत्मक चिंतन से पीड़ित को दूर ले जाती है। अफ़सोस से पीड़ित आदमी “आत्महत्या” को अपनी सारी समस्याओं का समाधान मान कर उसे अपना लेता है। इस कविता का उद्धेश्य सिर्फ इतना ही बताना है, कि जिंदगी बड़ी कीमत और हिम्मत वाली होती है वैसे भी हर परेशानी की उम्र भी ज्यादा नहीं होती।अतः सकारात्मक व आशावादी रहकर ही जीवन को सक्षम रखना उचित होता है। सही चिंतन यही है, परिस्थिति कितनी ही विषम हो, सम्बंधों और रिश्तों का भ्रम टूट चूका हो पर अपनी हिम्मत और सक्षमता पर भरोसा रखना ही सही और उचित है। आप सभी से अनुरोध है कि कविता के उद्देश्य पर गौर करे और अच्छी कोशिश लगे तो सन्देश के रुप में सभी अपनों से शेयर करे। शुभकामनाओं सहित***कमल भंसाली

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उपासित हुआ जीवन जब लड़खड़ाया
तो तथ्यों ने उसे कुछ इस तरह समझाया
*****
“अफसोस” न कर जिंदगी
जो मिला उसी पर सन्तोष कर
वक्त की मेहरबानियों की
कुछ तो कद्र कर
जरा अपनी काबिलयत पर भी
एक बार तो गौर कर
नाजायज उदासियों से
यों स्वयं को बर्बाद न कर
अफ़सोस…..

💔

वक्त के पन्नों पर लिखे
अपने ही अनुभवों पर एक नजर डाल
फिर बता जरा
क्या सब वक्त ने ही नाजायज किया
तेरा गिरना
खुद की नजरों से
तो नहीं था कहीं कोई कमाल
उलहाना न समझ इसे
सही समय पर
पहले अपने को संभाल
अफ़सोस……

दोस्त
हवाओं का रुख
सदा एक ओर नहीं रहता
अंदाज न बदल
विपरीतता में “सच” सामने रहता
पहले भद्दा दिखता
पर अपन्नाने से सच्ची दोस्ती निभाता
कर इसकी पहचान
मौसम
कितना ही बदले
पर ये साथ कभी न छोड़ता
जग की क्या परवाह
वो तो सदा दूसरे पर हंसता
दूसरों के
दरवाजों के शीशे में ही झांकता
अफ़सोस…

💘

मानता
अफ़सोस
जब तुम गलतियों का करती
जग से डरती
आहें भर सारी रात रोती
अपनों के
आँचल में राहत ढूंढती
न मिलनें पर
बैचनियों की शिकार हो जाती
भूल जाती
हर कोई अपनी साँसों का दीवाना
सीमितता का यही अफ़साना
अब और न घबराना
जीना ही सही रास्ता
“मौत” जहरीला फूल
इसे अपने गुलशन में न पनाह देना
अफ़सोस…..

👀

जब तेरा सब कुछ तेरा
तो बता
कैसे होगा तेरा दुःख
किसी का मेरा
दर्द की पहचान को भूलना
अपनी तुच्छ उपलब्धियों पर
शेर की तरह दहाड़ना
और
जब शिकार खुद हो जाये
तो
स्वयं से ही घबराना
बता क्या मूल्य ?
बचा तेरा
अफ़सोस ……

👓

कर अहसास
धूप छावं में
हर दिन का निवास
सब कुछ बदलना तय
फिर क्यों करती भय
आज नहीं
तो कल होगा तेरा
इसी चिंतन में रख विश्वास गहरा
हर समय नहीं रहता
काला कलूटा अंधियारा
आशा की पो फटने दे
देखेगी तूं सफलता का सवेरा
अफ़सोस….

👚

बिखरना न
जिंदगी
हर गम छोटा ही होता
नकारत्मक्ता से
पोषित हो बड़ा हो जाता
उदासियों के फूलों सें
आँगन भर देता
समझ जरा
हर कोई अपना नहीं
पर दिल तो तेरा दीवाना
उसे कभी जुदा न करना
बेवफाई का
कोई गलत किस्सा
इस जग में छोड़ न जाना
स्वयं की
इस बदनामी को समझना
हर समस्या का
एक दूसरा खूबसूरत पहलू
“समाधान”
उस और ही अंगड़ाई लेना
प्यार से
सदा मुस्करा आगे बढ़ते जाना
अफ़सोस…

💢💢💢
✍रचियता॥ कमल भंसाली॥

🍸शराबी जिंदगी🍹✍ कमल भंसाली

अरमानों के मदिरालय में
खब्बाबों के पैमाने
जज्बातों की मदिरा में
गुजर गई तमाम उम्र
फिर, भी फिक्र नहीं करती, जिंदगी
बता, क्या तू संसारिक नशे में डूब गई
है, किसी को जबाब देना
शायद, यह बात तुम भूल गई

कुछ तो ख्याल कर अपनी औकात का
लड़खड़ाते पैर तेरे
गुणगान कर रहे, तेरी ताकत का
क्या थी क्या, हो गई
रिश्ते, बन्धनों के अंधेरो में
तूं, गिरकर बदनाम हो गई
लोग कहते है, किस्से तेरे बदनामी के
इज्जत की कमीज पर
नशे में कितने दाग लगा गई

मोह, मौहब्बत, प्यार
दुश्मन है, मेरे यार
नशा जितना भी होता मादक
उतना ही है, घातक
संभल जा, कुछ वक्त के लिए
दोष जमाने को न देना
जमाने को वक्त नहीं, तेरे लिए
मान मेरी बात
पीना है, तो पी,
पर जब जग में तूं आई
तो, कुछ अपनी
आत्मा के लिये, जी
तोड़ नशे के सारे बन्धन
पकड़ मेरा हाथ
आ, फिर,
एक बार चलते
कोई नए, उज्ज्वल पथ पर
तुम और मैं, साथ, साथ…..कमल भंसाली

रचियता ✍कमल भंसाली

नाराज सी रहती, जिंदगी कमल भंसाली

नाराज सी रहती
हर रोज जिंदगी
आनेवाला है , कोई तूफ़ान
कहती रहती, आजकल जिंदगी
समझाने पर भी नहीं मानती
वक्त के दरिया से
आनेवाले छोटे छोटे झोंकों से
सहम सी जाती, आज कल जिंदगी

🌹

असहमति के हजारों
पहलू बदल कर
सारी रात करवटे
बदलती रहती, आजकल जिंदगी

🌻

असहाय सी खड़ी
विश्वास की जमीन पर भी
आगे चलने से पहले
अविश्वास से,
सहारे को तलाशती, आजकल जिंदगी

🍁

है, जो, उसको नहीं मानती
दुनिया को ही
अपनी हर हार का
जिम्मेदार मानती, आजकल जिंदगी

🌺

उम्र के दर्द
सहन कर लेती
बिन रौशनी
अंधेरों में शुकुन तलाशती
अपनी ही चुप्पी में
अपनी सीमा रेखा
पहचान लेती, आजकल जिंदगी

😙🚶😙

नासमझ को कैसे समझाऊं

सही से कैसे

उसे दूर हटाऊँ

बेदर्द दुनिया में
उसका हश्र यही, होना
सही समझती, आजकल जिंदगी ….

रचियता ✍कमल भंसाली

02/12/2017