👒 मुस्करा मन मुस्करा👒कमल भंसाली

मुस्करा मन मेरे जरा मुस्करा
दूर कर आसपास का अँधेरा
आशाओं का दीप जला जरा
आगे तेरे खड़ा है सुनहरा सवेरा
मुस्करा मन…

मन मेरे, जरा सीख ले मुस्कराना
गा जरा कोई उमंगों भरा तराना
क्या परवाह दुनिया के नखरों की
क्यों परवाह करे अपने अधरों की
मुस्करा मन…

सागर की उछलती लहरों संग बह
किनारों से टकराने की चोट सह
सहने में ही जिंदगी की हर लय
न कर भय, तेरी मुस्कराहट अक्षय
मुस्करा मन…

कौन अपना कौन पराया
जिंदगी पर मौत का साया
पल की सांस में कैसा दावा
मुस्करा मन बन बहती हवा
मुस्करा मन…

रंगमंच है यह दुनिया
यहां सब है कलाकार
अभिनय कर मस्त मस्त
न कर तुम इससे इंकार
मुस्करा मन…

अहंकार खलनायकी किरदार
न निभाना इसे एक भी वार
मृदुलता के छेड़ सारे तार
जीवन नहीं मिलता बार बार
मुस्करा मन…

एक मुस्कराहट तेरी करेगी जब स्वर्ण झंकार
मान मेरी, उठेगा, खिलखिलाहटों का ज्वार
हलचल मच जायेगी, धुर्वी फूल खिलेंगे बेशूमार
खुशबूओं में निहित तुम्हे मिलेगा प्यार ही प्यार
मुस्करा मन…..