🌼ठंडे फूलों की चाहत🌼कमल भंसाली

तमस सर्दी का अति गहराया
भास्कर कहीं भी नजर न आया
बर्फीली हवाओ ने रूह को कंपकपाया
अधखिली कलियों की खुशबू ने जताया
देखो, सर्दी का सुहावना मौसम आया

पत्तों ने फूलों से कहा
कल तुम चले जाओगे
किसी गर्म गुलदस्ते में
सहजता से सज जाओगे
किसी खूबसुरत अंगुलियो का
तपिस भरा स्पर्स पाओगे
माहौल की मधुरता में खो जाओगे
हमें तो तुम शायद भूल ही जाओगे

फूल सर्द होकर बोले
भूलना कहां होता आसान
जब तक साथ थे जिंदगी निखरी सी लगती
सुहानी मधुरतम सर्दी प्रतिसंगी प्रेम प्रच्छादन कराती
उष्णता क्षण दो क्षण ही अच्छी लगती
जब सच्ची “दोस्ती”पास होती
सर्द ऋतु तो योंही ठिठुरती अच्छी लगती…..रचियता *कमल भंसाली*

अजनबी चाहत…..कमल भंसाली

कुछ दूर ही, हम चले
साथ कब बैठे
अजनबी राहों में
मिलकर जुदा ही है, होना
एक पल को
तुमको पाकर, है, खोना
दूसरे पल का रहेगा, इंतजार
फिर, कभी, इस राह गुजरना

अजनबी होकर भी
अच्छे लगे
कुछ कशिश है, तुम में
साथ ओर भी चलते
पर, सपने तो
कभी कभी
नयनों की झील में
हंस की तरह
धवल होकर तैर ते
किसी एक की
मुस्कान पर, दिल में
एक साथ, इतने
“कमल”
कभी कभी ही खिलतें

होता कोई, छोटा सा
एक ख्याल
जो, दिल रखता संभाल
फूल अज्ञेय प्यार का
जब खिलकर, कुम्हलाता
तो खुले आसमां को
चमकने की
फरेबी सी सौगात
दे जाता
फिर कभी मिलने की
आहत चाहों की
उलझन, भरी राहें
तय करने, छोड़ जाता
बिछोह के कितने
दर्द फिजा में, बिखेर जाता

एक अजनबी मुस्कान
सुर्ख होठों पर
जब स्पर्श करती
जिंदगी बिन स्पंदन
एक क्षण को
ठहर कर, उस क्षण कों
अनेकश, सलाम करती….

कमल भंसाली