🌷आशा के फूल🌷कमल भंसाली🌵

गुमा नहीं था हवाओं में
इतना जहर फैल जाएगा
जीने का मकसद ही खो जाएगा
जहरीले नस्तर चुभायेगी यों जिंदगी
मखमली चादर पर भी नींद नहीं आएगी

जिनकी उम्मीद के गीत दिल गाता रहा
उनसे ही दिल टूट कर टुकड़े हो जाएगा
मेरे ईमान पर कोई सवाल कर जाएगा
मुझे, मेरे ही दर्पण में नंगा देख जाएगा

काँटों की चुभन से नहीं डरता
तो दर्द का कोई भ्रम नहीं रहता
सुख की एक छांव की कीमत
पीड़ा की किश्तों में नहीं चुकाता

आरजू करता फिर बहार आये
चमन हर तरह से निखर जाए
आशंकाए सारी निरस्त हो जाए
सघन आशा के फूल खिल जाए