🌼ठंडे फूलों की चाहत🌼कमल भंसाली

तमस सर्दी का अति गहराया
भास्कर कहीं भी नजर न आया
बर्फीली हवाओ ने रूह को कंपकपाया
अधखिली कलियों की खुशबू ने जताया
देखो, सर्दी का सुहावना मौसम आया

पत्तों ने फूलों से कहा
कल तुम चले जाओगे
किसी गर्म गुलदस्ते में
सहजता से सज जाओगे
किसी खूबसुरत अंगुलियो का
तपिस भरा स्पर्स पाओगे
माहौल की मधुरता में खो जाओगे
हमें तो तुम शायद भूल ही जाओगे

फूल सर्द होकर बोले
भूलना कहां होता आसान
जब तक साथ थे जिंदगी निखरी सी लगती
सुहानी मधुरतम सर्दी प्रतिसंगी प्रेम प्रच्छादन कराती
उष्णता क्षण दो क्षण ही अच्छी लगती
जब सच्ची “दोस्ती”पास होती
सर्द ऋतु तो योंही ठिठुरती अच्छी लगती…..रचियता *कमल भंसाली*

★★ गुलदस्ता ★★कमल भंसाली

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तुम्हारी उन खुशबुओं का पता दे दो
जिनमें बैचेनिया मचलती है
तुम्हारी उन ख्वाइशों का पता दे दो
जिनसे दिल की प्यास जगती है

तुम क्या जानों अपने नैनों की भाषा
वो ही गुनाह करती
अनजान बन कर जगाती कातिल आशा
सरे आम बदनाम करती

प्यार के खेल की दीवानी तेरी अंगड़ाई
न जीने देती, न मरने देती
इंतजार की हद पार कर
मेरे दिल का कत्ल करती

मय्यसर होती,अगर दूसरी जिंदगी
तो, तुम्हारी कसम
न तुम्हारी खुशबुओं का
पूछता, मैं अतापता
न ही तुम्हें देता
शिकायतों भरा
मेरे प्यार का गुलदस्ता…कमल भंसाली

शायद जिंदगी, यहां, अब कम रहती 🌹कमल भंसाली

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घर तो सजे है,शानदार
निर्जीवता का कर श्रृंगार
पर,सुने से रहते इनके द्वार
जैसे रह रहे,सब इनमें बिन प्यार
इंसानी साये नजर आते,कभी कभार
मन्द अंधेरों में हर तस्वीर धुंधली सी लगती
शायद, जिंदगी, अब यहां कम रहती

दीवारों के हर रंग फीके लगते
घरवालों के सपने बिके लगते
गुलदस्ते के रंग गहन गहरे गहरे
फूलों के हुए, बेगाने चेहरे
घर का सूनापन बयान करते
अपने अब दूर रहते
रिश्ते भी कम ही निभते
मेहमान भगवान नहीं लगते
जज्बातों की यहां बयार नहीं बहती
शायद, जिंदगी, अब यहां कम रहती..

बिन जिंदगी, हर सजावट अधूरी
बिन इंसान, नहीं जीवन की धूरी
घर सजाया, जीवन भगाया
कौन सा बड़ा काम किया ?
अपने ही आशियाने को,श्मशान बनाया
चाहत के गलियारों में,धूप नहीं दिखती
शायद, जिंदगी, अब यहां कम रहती

सुबह, अलसायी सी कटती
दोपहर, भाग दौड़ में गुम हो जाती
शाम, सुस्ती का फूल थमा जाती
बन्द कमरों से, सिर्फ टीवी की आवाज आती
खाने की टेबल पर, अलग अलग प्लेट सजती
बाहर के खाने से जीभ गुराती
शायद, जिंदगी, अब यहां कम रहती

बेटे का फोन, माँ मुस्कराती
प्रणाम पर, आशीर्वाद देती
बहु का हाल सास पूछती
पोते का ख्याल रखने का कहती
बहु मायके में सब कुछ बताती
सिर्फ ससुराल से कतराती
बेटे को गुलाम बनाकर
गुलछरे उड़ाती
न आने के बहाने करती
हतास निराशा से बत्ती गुल हो जाती
शायद, जिंदगी, अब यहां कम रहती

हकीकत अब यही कहती
घर, सिर्फ सजते,
देखने में, शानदार लगते
आँगन में कोई परछाई
नजर नहीं आती
हल्की सी आहट पर
बिल्ली भी दिवार फांद जाती
शायद, जिंदगी, अब यहां कम रहती■■◆
:'(कमल भन्साली 😥

कभी अलविदा न कहना…..

“यह कविता उन नवयुवकों और नवयुवतियो के संदर्भ में लिखी जो जीवन साथी बनकर अपने नए सम्बंधों को समझने में असर्मथ होते है, और गलत मार्ग दर्शन के कारण अपने जीवन पर एक प्रश्न खड़ा कर लेते है । वों नही जानते, क्या कर रहे, जो सम्बंध सोच समझ कर बना, वो थोड़ी सी गलतफ़हमियों और गलत चिंतन के कारण टूट गया । वो, यह भी नहीं जानते, अपने जीवन को असुरिक्षत होने का बोध दे रहे है । गुजारिस है, कविता की भावना को समझे । गलत न ले”…..

जमाना लाख रंग बदले
आ, दुआ करते तेरा मेरा
साथ कभी न बदले
तय है, जीवन पथ नहींआसान
कभी आएगी धूप
कहीं होगा, खुला आसमान
न मुझे होगा, सहने का अभिमान
न हीं, तुम समझना उड़ने में है, शान

सुबह की प्रथम किरण बन
मुझे अपनी मुस्कराहट देंना
बीती रात के सपनों को
अपना गहना समझना
एक हाथ अपना, मेरे कन्धे
पर रख कर इतना ही कहना
पावन प्रेम हम दोनों के
नयनो में सदा बसना

नन्हे फूल और कलिया
कल हमारी बगिया में, महकेंगे
जीवन की सेज पर, सितारे सजेंगे
खुशियों की चांदनी में नहायेंगे
भूल मत जाना, फूल कलियों को
संस्कार के गुलदस्ते में, सजाना
याद रखना, साथ जिंदगी भर निभाना

आ, दुआ करे, न कभी दूर हो
न ही हम कभी मजबूर हो
दूर क्षितिज की तरफ देख
वहां तक खींचते है, अपने
प्रेम मिलन की लम्बी रेख
हम अंतर्मन से न टूटने देंगे
हाँ, हम जिंदगी भर साथ रहेंगे

कभी उदासियों की शाम हों
दिल मेरा, तुम्हारे न पास हों
गमगीन क्षणों में इंतजार को
अपने बीते पलों से सजाना
मुझे याद कर जरा मुस्करा देना
कभी, तुम नाराज मुझसे हो
मेरी मुस्कराहट को, क्षमा समझ लेना
पर, कभी अलविदा न कहना…..

कमल भंसाली