🐲ईश्वर की सन्तान🐲….🐤…कमल भंसाली🐤

सितारे, कितने ही गर्दिश में, क्यों न हो ?
आसमान, अपनी चादर में समेट रखता
सन्तान, कितनी ही नालायक, क्यों न हो ?
माता-पिता का प्यार, कभी कम नहीं होता

हकीकत, यही है कहती
सन्तान के लिए ही, वो जीती
उसी सन्तान को, सही राह दिखाते
दुनिया के, हजारों जहर पीती

भूल करे “वो”, सब अपने सर लेती
खुद को गलत, मार्ग दर्शक समझती
अफ़सोस की, कितनी बेबस करवटे
रात की तन्हाई में, इधर उधर बदलती

सन्तान गलत हो, तो नजर झुक जाती
उम्र की सारी रेखाएं, एक साथआ जाती
वो, कुछ नही बोले, पर चेहरा बता जाता
उनकी, सन्तान को सही राह चलना न आता

दुनिया के सुख न मिले, गम नहीं
पर, “सन्तान” किसी की न राह भूले
फूल खिलने की ख़ुशी, चाहे न मिले
हे, प्रभु, खिल कर, “जहर” जग में न फैले

बेजान दिल की, नासमझ सन्तान
कितना ही कर ले, उम्र का अभिमान
कितनी ही प्रगति की, सीढ़ियां चढ़ ले
पर उससे पहले, यह पाठ जरुर पढ़ले

जो जैसा, और जितना, सुख दुःख देता
वो उस से दुगना, उतना ही वैसा पाता
यही सत्य है, यही है, सार्थक जीवन तत्व
माँ बाप से बड़ा, इस जग में कोई नहीं होता

भ्रम में जो रहते, वो धरती का बोझ कहलाते
अपने अस्तित्व जनक को, शर्मिंदगी दिलाते
जो माता पिता के चरणों में, स्नेह से झुक जाते
वों, ही सच्चे, शुद्ध, “ईश्वर” की सन्तान कहलाते………

कमल भंसाली