💃क्षण भर🕴️✍️कमल भंसाली

बदली सी तेरी सूरत बहुत कुछ कहती
इन आँखों में अब छवि दूसरे की सजती
तेरे गुमशुदा ख्यालों में अब बेवफाई रहती

मुखरित हुआ जब भी छुपा हुआ प्यार तुम्हारा
सच कहता ह्रदय विश्वास से कहता ये नहीं मेरा
उसांस भर न कहना ये सिर्फ अहसास ही मेरा

माना स्वल्प जीवन बहुत सारे अरमान रखता
पर बेरुखी की कंपकंपी से जिगर ठहर जाता
एक अदृष्यत स्वप्न पलकों तले छिप सा जाता

सबकुछ समझ कर ही मै सदा मुस्कराता
असहज न हो प्रिय प्यार में ऐसा भी होता
क्षण के लिए मन का समर्पण भटक जाता

प्यार का प्यार ही रहने दो अब इसका इम्तहां न दो
तुम न समझो कसक प्यार की सिर्फ मुझे विश्वास दो
तौहफा है प्यार बिन कसम का जुनून इसमें बहने दो

कदम भटके दिल कहीं और तेरा भटके
दिलवर बेगानी हसरतों के न लगे झटके
लौट आ कई तूफानों में कश्ती न अटके

प्रिय सांझ सवेरे में कितना कुछ घट बढ़ जाता
उम्मीद नाउम्मीद से वर्तमान का पन्ना भर जाता
शुकून ही मिलता प्रियतम लौट कर घर आ जाता
क्षण भर का भटका प्यार आलिंगन में समा जाता

***”सपने” तो सपने *** हकीकत या ख्याल ?★★कमल भंसाली★★

image

सपने तो है, सपने
न ये गैर, न ही अपने
जब भी आते, कुछ संकेत
जीवन को दे जाते
इनके है, कई प्रकार
हम न समझे, ये बात कुछ और..

सच यही लगता,
सपना ही, ख्बाब बन जाता
खुली आँख
मार्गदर्शक बन जाता
बंद पलकों में
तैरता ही रहता
जब तक
आशा, निराशा की
दुनिया का अवलोकन
नहीं कर लेता
न, इसकी मंजिल
न ही, इसका ठौर
हम न समझे, ये बात कुछ और….

सपनों के कई प्रकार
बनते मन अनुसार
चाहतों के फूल खिलाते
हर एक के रंग
दिखते, बेशुमार
सहमा सा दिल
कभी हो जाता, बेजार
तब, ख़ौफ़ इन में छा जाता
मन दहशत से
डर जाता
किसी से कुछ
नहीं कहता
पसीने की बूंदों से
तन, नहा जाता
सपने, ऐसे ही करते सफर
हम न समझे, ये बात कुछ और…

सपनों का भी होता, स्वास्थ्य
विचारों से बनता, इनका आकार
दबे हुए, मन के होते, पहरेदार
रौनक नींद की
करती इनका सत्कार
खुली, आँख
आने से कर देते, इंकार
शुद्ध, सच्चे जब भी आते
मन को विचलित कर जाते
सही रास्ते, की तरफ मोड़ जाते
रंगीन सपने, धीरे से खिसक जाते
ये ही है, सपनों की तस्वीर
हम न समझे, ये बात कुछ और….

” यौवन”…नाम ही तुम्हारा……कमल भंसाली

मन मुस्कराये
दिल घबराये
कभी रुलाये
कभी हंसाये
“यौवन” नाम ही तुम्हारा
कैसे, कैसे ख्याल लाये

एक झलक
एक मुस्कराहट
एक कटाक्ष
नयनों में
कितने, सपने जगाये
अनुशासित मन, बागी कहलाये
“यौवन” नाम ही तुम्हारा…

एक फूल के
अहसास से
महकना, तुम्हारा
चिड़ियों की
तरह फुदकना, तुम्हारा
एक स्पर्श से
चहकना, तुम्हारा
कितनी रंग रैलियां मनाये
दिल तुम्हारा
“यौवन”, नाम ही तुम्हारा…

कुछ कुछ को
बहुत कुछ समझ लेना
अनजानी दुनियां में
सब कुछ खो देना
उपहारों में बसा प्यार
आज नकद, कल उधार
शंकित, प्रेम की नाव
कभी किनारा, कभी मझधार
ऐसे कितने दस्तूर निभाता
पता नहीं कब आता
बिना कहें कब चला जाता
“यौवन”, नाम ही तुम्हारा…

…..कमल भंसाली

कमल भंसाली