🕺बगावत 🕺 कमल भंसाली

बगावत कमल भंसाली
आजकल रात के सायों में, धूप का अहसास हो रहा
अपने ही खून में, बगावत का बवंडर, कहर ढा रहा

मंजर ये जिंदगी का, अफसोस का जहर उगल रहा
रिश्तों के संसार में, सच्ची चाहत का पैर फिसल रहा

जीवन,  बिन जल की मछली की, तरह तड़प रहा
विषाक्त, साँसों की घुटन से, दिल टूट कर बिखर रहा

कैसे कह दे ? सब कुछ ठीक सा ही चल रहा
आनेवाले तूफां को, कोई तो नहीं रोक पा रहा

अब तो साँसों में भी, जलन का अहसास हो रहा
आरजुएं हजारों, पर दामन में विश्वास तो न रहा

अरमानों का गला, मानों कोई बेदर्दी से घोट रहा
जीने के मकसद में, कोई स्वयं ही, जहर पी, जी रहा

“कमल” कल के सुनहरेपन में कालिख का रंग गहराया
टूटा हुआ इंसान, कब सहजता का हाथ पकड़ पाया ?
✍️ कमल भंसाली