💃क्षण भर🕴️✍️कमल भंसाली

बदली सी तेरी सूरत बहुत कुछ कहती
इन आँखों में अब छवि दूसरे की सजती
तेरे गुमशुदा ख्यालों में अब बेवफाई रहती

मुखरित हुआ जब भी छुपा हुआ प्यार तुम्हारा
सच कहता ह्रदय विश्वास से कहता ये नहीं मेरा
उसांस भर न कहना ये सिर्फ अहसास ही मेरा

माना स्वल्प जीवन बहुत सारे अरमान रखता
पर बेरुखी की कंपकंपी से जिगर ठहर जाता
एक अदृष्यत स्वप्न पलकों तले छिप सा जाता

सबकुछ समझ कर ही मै सदा मुस्कराता
असहज न हो प्रिय प्यार में ऐसा भी होता
क्षण के लिए मन का समर्पण भटक जाता

प्यार का प्यार ही रहने दो अब इसका इम्तहां न दो
तुम न समझो कसक प्यार की सिर्फ मुझे विश्वास दो
तौहफा है प्यार बिन कसम का जुनून इसमें बहने दो

कदम भटके दिल कहीं और तेरा भटके
दिलवर बेगानी हसरतों के न लगे झटके
लौट आ कई तूफानों में कश्ती न अटके

प्रिय सांझ सवेरे में कितना कुछ घट बढ़ जाता
उम्मीद नाउम्मीद से वर्तमान का पन्ना भर जाता
शुकून ही मिलता प्रियतम लौट कर घर आ जाता
क्षण भर का भटका प्यार आलिंगन में समा जाता

अछूता जीवन…..कमल भंसाली

जीवन कब रहता,अछूता
हर कोई इस को छूता
सरे राह, चलते, चलते
ये, सब कुछ भूल जाता

एक जीवन, कितना कुछ सहता
अपनेपन के द्वार पर बैठ जाता
भीख स्नेह की जब भी माँगता
कंगला, कमजोर समझा जाता

भाषा का अनुरागी बन पछताता
कडुवा सत्य बोल नहीं पाता
झूठ बिना कुछ तौल नहीं पाता
सत्य हिसाब कभी रख नहीं पाता

गुमां था, जिंदगी योंही चलेगी
सदा खुशियों की नदी बहेगी
गम की तरकश का एक, तीर
कितना बहा देता, नयनों से नीर

फूलों सा जीवन जब काँटों पर सोयेगा
तभी तो फूलों का अहसास कर पायेगा
बाती जब जलेगी, तो तैल साथ निभाएगा
पराये दर्द देख, अपना दर्द कम ही पायेगा

अंहकार का दरवाजा, खोलने से पहले
साँसों को तो पूछलो, कब तक आएगी
अभिमान किसका करना, ये तो जानलो
काया की माया, आत्म दर्पण में निहारलो

दूर रोशनदान से आती, किरणों से जानना
जीवन हकीकत है, कितने क्षण की, पूछना
अपनी नश्वरता को समझना, यहीं है, प्रार्थना
एक सांस के बाद, दूसरी की कीमत आंकना……..कमल भंसाली