क्यों कोई

कोई क्यों किसी के लिए जिए
क्यों कोई किसी के लिए मरे
कहने की बातें इस लिए कह देते
सच कहें हकीकत में मरने से डरते

अफसानों से गुजरती जिन्दगी
सच कहने से हर पल डरती
अक्सर झूठ तले पले जिन्दगी
सीमित बार जीतती अनेक बार हारती

असंयमित संभावानाओं की तलाश
गहन स्वार्थ संक्रमण त्रस्तयुक्त प्रयास
विचलित से अनुभव में मुक्ति का तनाव
कृत्रिम अलंकारों के श्रृंगार का मानव
आवरण हीन समाज का यही है स्वभाव

सहज सरल जीवन निर्माण
नव पथ प्रशस्य प्रकरण
अति उतम ज्ञान प्रव्यक्त जीवन
आधुनिक उपकरणों से कहां आसान…….
***कमल भंसाली***