तुम्हारी कसम….

कसम, हाँ तुम्हारी कसम
सच कहता
प्यार से लगता मुझे डर
सुना है, प्यार करता कमजोर
कुछ तो कहते है
प्यार तो है चितचौर
मन के आंगन ऐसे नाचता
जैसे पागल मौर
कसम, हाँ तुम्हारी कसम

प्यार कोइ सौगात नही
प्यार है अहसास
इस अहसास की कीमत
मेरे पास नही
दुनिया में रहना और
प्यार की रस्मे निभाना
कितनी कठिन
सब यही है कहते
प्यार सिर्फ नही रंगीन
इसका खेल बड़ा संगीन
कसम, हाँ तुम्हारी कसम

फिर भी पता नही
क्या प्यार में है कशिश
फुसलाता
सपनों में आता
नयनो में लहराता
गीत सावन में
मिलन के गाता
रिम झिम बरसात में
मधुरस की बूंदों से
प्यासे होठों को ललचाता
कसम, हाँ तुम्हारी कसम
हा, अब कह देता हू
सनम, प्यार तुम्ही से करता
फिर भी, प्यार से डरता
कसम, हाँ तुम्हारी कसम

★☆◆कमल भंसाली ◆☆★

Posted from WordPress for Android