🕴️आहट 🕴️कमल भंसाली

शिर्षक: आहट
धरा पर फूल होंगे, नभ में चाँद और सितारे होंगे
कल हम नहीं होंगे, पर चर्चे कहीं हमारे भी होंगे

गुजरा वक्त किसी के साथ, कहीं किस्सा बनेगा
कभी, कहीं, झुकी हुई पलको का हिस्सा बनगा

कहाँ जायेगे कह नही सकते, पर दिलों में रहेंगे
ये सोच के हम मुस्करा लेते, याद हम भी आयेंगे

तमाम उम्र गुम हो गयी, मंजिले तो वहीं ही रही
बहुत कुछ खो गया, फिर भी उम्मीदें हँसती रही

क्या कहता जिंदगी को जिसे रुलाने की आदत रही
था कभी, अब ये बात वक्त की बहती हवाओं में रही

कल कौन रहेगा ? ये सिर्फ अब राहत की बात रही
अफसोस की चौखट पर मृत्यु की आहट बेजुबान रही
✍️ कमल भंसाली

⭐आज⭐ कल😴 आज🎃 कमल भंसाली

सिर्फ, कल की तरफ न झांको
“आज”पर भी जरा नजर करो
कितना सुंदर शुसील लगता
रंग बिरंगी जानी अनजानी
घटनाओं से सज कर खड़ा रहता
सतत प्रयासी शांत स्वभाव
पल की बुनियाद पर जन्मा
“आज” के नाम से जाना जाता
अपनी सीमित आयु से न घबरा
इतिहास बन मुस्कराता
सदा बहार होनें की खुशबू फिजा में बिखेर जाता
कल….

आने वाला कल का दरवाजा
अनिश्चिताओं से भरा
आज में सुनिश्चित सवेरा
बिता कल अफसोस निर्माता
आने वाला कल सिर्फ सपनें दिखाता
आज जब कल में ढलता
सुरमई शाम से पहचान कराता
अपने सब अधूरे काम उसे सौंप देता
सफल रुप रेखा में भविष्य दृष्यत करा जाता
कर्म फल के बीज से फलित होनें का आशीर्वाद दे जाता
कल…

आज ही कल, कल ही आज
न कोई पहेली, न कोई राज
कहती संत कबीर दास की वाणी
पूरी सच और भविष्य सुहानी
“काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में प्रलय होगी, बहुरी करेगा कब”

बन्धु रे
बीत जायेगी जिंदगी, आज नहीं तो फिर कल
जीवन के राही, आज ही पथ, उसी पर चल
सामने खड़ी कल की इन्तजारित इच्छित मंजिल
कब ख्याल बदल जाये, उस से पहले कर हासिल
कल…

✍ रचियता✍🍂कमल भंसाली🍂

निराशिष पतझड़…..कमल भंसाली

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अगर उम्मीदें, मैं रखता, हौसले, वो, दे देता
जीवन, शायद सही, दिशा कि ओर मुड़ जाता
जीत हों या हार, कर रहा, आज सब है, स्वीकार
जान गया, भाग्य, सही कर्म से ही होता तैयार

डरता ही रहा, चाह के जंगल में न भटक जाऊ
मंजिल सामने हो, अर्द्ध ज्ञान से पहचान न पाऊ
यथार्थ की दहलीज पर, कहीं लड़खड़ा न जाऊ
सत्य की शक्ति न मिले, तो शायद संभल न पाऊ

कल को सही समझता, तो आज वीराना न होता
पल की कीमत की पहचान होती, तो महान होता
समस्याओं के रेगिस्तान में, ऊंट की तरह चलता
तो, आज खुशियों के गुलशन के आसपास होता

वो, अगर अपनी हंसी में मेरे आंसू को थोड़ी जगह देते
जीवन पथ पर कोमलता के, महकते फूल बिखर जाते
उस पथ का राही बनता, जहां अमृत ही बरसता रहता
देह का अनुयायी, मन, बून्द बून्द लेकर, हर रोज पीता

पर, ऐसा हो न सका, जीवन गली में रही रात अंधियारी
दिल की उदासियों को, आज भी सवेरे की तलाश है, जारी
कल वक्त बदल जायेगा, सोच, दिलाशों की करता सवारी
पर,आशा की एक बून्द पर, निराशा का पतझड़ लगता भारी

आज जहां खड़ा हूं, वहां कोई राह ही नहीं दिखती
हकीकत यही है, पीछे पर्वत जैसी दुर्लभता दिखती
सामने देखू, तो बिन आरपार पीड़ा की खाई दिखती
दायें, बायें की बात न करो, वहां मुस्कराती मौत हंसती ….कमल भंसाली

स्वर्णिम पल….कमल भंसाली

है, जिन्दगी के चाहे चार दिन
जीना तो पड़ेगा हर ‘पल’, हर क्षण
चाहे, जहर है, या अमृत जीवन
पीना तो पड़ेगा, हर ‘पल’, हर कण

‘पल’, जीवन सफर का एक हि रास्ता
राही को चलना, मंजिल का वास्ता
न यहां आज, न परसों,न ही कोई कल
जो है, वहीं है, यह निष्ठांत अछूता ‘पल’

अपरिचित सा भविष्य, हर ‘पल’ में रहता
मनमोहक, मधुर बन हर ,’पल’ छिन लेता
रातों की नींद में सितारे तक गिनवा देता
बड़ा जालिम, न जीने देता, न मरने देता

बुलन्दियों की गहरी घाटी में विलीन वर्तमान
बहुत कुछ देकर जाता, पर न करता अभिमान
सन्देश ही भेजता, जो आज, वो नहीं होगा कल
देख, समझ कर इंसान चल, आगे है, दूसरा ‘पल’

समझने लायक होता है, ‘पल’ का हर कमाल
हर ‘पल’, करता आशा और निराशा का निर्माण
देखते युग बदल जाता, पर रहता चंचल ‘पल’
उम्र को तराजू में तोल देता, वो ही है, यहीं ‘पल’

वर्तमान का हर लेखा, देता इतिहास को सौंप
जानेवाल ‘पल’, कितना निरहि, बिन संताप
इस ‘पल’ को जानना, यहीं है समय, यही वक्त
काल का निर्माणकर्ता, क्षणिक, पर पूर्ण सत्यत:

‘पल’ से बन्धी, हर सांस की डोर,
इसी से शुरु होती, आभामय भोर
जागों तो आएगा, सुरमई सवेरा
नहीं तो जिंदगी में, रहेगा अंधेरा

सच है, हर ‘पल’ नहीं सुनहरा
हर ‘पल’ में राज छुपा है, गहरा
न कोई इसका नाप, न हीं तौल
मणिमय ‘पल’, बिन मूल्य अनमोल

‘पल’ विश्वास, ‘पल’में समायी आस्था
‘पल’में ही आशा, पल में ही निराशा
पर, ‘पल’ का नहीं , किसी से वास्ता
‘पल’ तो है, प्रभु तक पँहुचने का रास्ता

मैं नहीं कहता, कहता हर ‘पल’
जीवन राही, मेरे साथ चला चल
देख दूर नहीं, तेरी प्रतीक्षित मंजिल
आज नहीं तो कल कहेगा, ‘स्वर्ण पल’
…..कमल भंसाली