💓परीक्षा💓कमल भंसाली

कल की करनी
आज भरनी
आज की कब ?
अनजानी
इस जन्म के
कष्टों की कहानी
न पड़े कभी फिर दोहरानी
तो न बन
आत्मा
अज्ञानी अभिमानी
तेरी व्यथा
तूने अभी तक ?
क्यों न पहचानी
जग मुआ कैसा ही हो
पर तेरा व्यवहार तो अच्छा हो
कहते ज्ञानी
जीवन कुछ भी नहीं
सिवाय पानी का एक बुलबुला
एक दिन फुसफ्सा जाएगा
अस्तित्व
इसी मिट्टी में मिल जाएगा
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तेरा रूप ही
परीक्षाफल
हर कर्म
प्रश्न बन
एक दिन सामने आएगा
तब सर तेरा झुक जाएगा
संसार की इतनी फिक्र क्यों ?
दूसरे के गलत कर्मों का जिक्र क्यों
पहचान कर अपनी
ये तेरी परीक्षा स्थली
सब प्रश्नों के उत्तर लिख
समय संक्षिप्त
नकल की चेष्टा न करना
सब खाली स्थानों को
सच्चे कर्मो से है,भरना
अच्छे कर्मों को याद कर
न आये, तो मेरे दोस्त
अब सिर्फ प्रभु को ही याद कर
प्रश्न पहला है,जरूरी
सत्य क्यों बना तेरी मजबूरी ?
क्यों बनाई उससे दूरी
उतर आसान नहीं
तो फिर
साथी
भूल जा ये दुनियादारी
भूल जा रिश्तों की दुकानदारी
पवित्र विचारों को दे जिम्मेदारी
स्वादि सांसारिक चाहते
जब तक दिल मे रहेगी
प्रश्नों की जटिलता बढ़ती जाएगी
मोक्ष की परीक्षा
तूं जन्मों जन्मों तक
पास न कर पायेगी
बता
आखिर कब तक
तूं यह जलालत
सहन कर पायेगी…..

…..रचियता…कमल भंसाली

ये कैसी बयार…..कमल भंसाली…

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ये, कैसी हवा, आज फिजा में बह रही
सांस लेने पर, थोड़ी घुटन सी हो रही
वक्त का दरिया, शायद धीरे से सूख रहा
हर कोई, वक्त के लिए परेशां, तरस रहा

समय बदल रहा, या फिर, इंसान बहक रहा
कुछ बात तो है, जो कोई, भी, नहीं समझ रहा
पूर्ण, परिवार का गुलदस्ता टूट कर बिखर रहा
हर फूल, अपना अलग अस्तित्व तलाश रहा

अर्थ की धरा पर, स्वार्थ के फूल उगाए जा रहे
मकसद की पूजा कर, उसी पर चढ़ाये जा रहे
दिखावटी प्रेम के लिए, हर कोई गले मिल रहा
बुरे, समय पर मिलने से, कतरा कर निकल रहा

ये कैसी बयार है, समय से पहले दिशा बदल रही
जवानी आने से , पहले बुढ़ापा का संकेत दे रही
आशाओं के बादल छितरा, शंकित तमस बिछा रही
प्यार के नाम पर, सूखे फूलों को हरा भरा बता रही

कथनी और करनी के फर्क का नहीं रहा,अफ़सोस
जहर पी रहे या अमृत, क्या फर्क,? बुझ रही प्यास
आडंबरों से सजा धर्म, सत्य, में नहीं करता विश्वास
अंहिसा के दामन से निकल रहा, हिंसा का प्रकाश

बागवां की बदनसीबी देखों, लगाया चमन बदल गया
खुशियों का पैमाना, बदनसीबी के आंसुओं से भर गया
कल तक की जिसकी निगरानी, वही फल दगा दे गया
जिंदगी के सारे अनुभवों को शर्मिंदगी का अहसास दे गया……कमल भंसाली