🕺बगावत 🕺 कमल भंसाली

बगावत कमल भंसाली
आजकल रात के सायों में, धूप का अहसास हो रहा
अपने ही खून में, बगावत का बवंडर, कहर ढा रहा

मंजर ये जिंदगी का, अफसोस का जहर उगल रहा
रिश्तों के संसार में, सच्ची चाहत का पैर फिसल रहा

जीवन,  बिन जल की मछली की, तरह तड़प रहा
विषाक्त, साँसों की घुटन से, दिल टूट कर बिखर रहा

कैसे कह दे ? सब कुछ ठीक सा ही चल रहा
आनेवाले तूफां को, कोई तो नहीं रोक पा रहा

अब तो साँसों में भी, जलन का अहसास हो रहा
आरजुएं हजारों, पर दामन में विश्वास तो न रहा

अरमानों का गला, मानों कोई बेदर्दी से घोट रहा
जीने के मकसद में, कोई स्वयं ही, जहर पी, जी रहा

“कमल” कल के सुनहरेपन में कालिख का रंग गहराया
टूटा हुआ इंसान, कब सहजता का हाथ पकड़ पाया ?
✍️ कमल भंसाली

💑👉साथी मेरे, योंही मेरे साथ साथ चल 💑👈 शादी की शुभ वर्षगांठ पर जीवन संगिनी शायर को सप्रेम, सह-अस्तित्व पूर्ण भेंट ✍🙏कमल भंसाली

दोस्तों,
जीवन की कई विचित्रताओं में शादी का बन्धन एक अलग तरह की उपलब्धि होती है, खासकर उस समय जब जीवन यौवन से भरपूर प्रेममय होने लगता। खूबसूरती उस समय जिस्म के हर अंग पर बिखरी रहती है। इस माहौल में नारी और पुरुष दोनों को एक सुंदर पर समझदार साथी की जरुरत होती है। हमारे देश की संस्कृति में हर माता – पिता अपनी सन्तान की इस चाह को सामाजिक संस्कारों और रस्मों के अंतर्गत पूर्ण करना, अपना धर्म और कर्तव्य आज भी मानते है। माना समय परिवर्तन शील होता है, पर हकीकत यह भी है, शरीर व मन के स्वरुप में भी बदलाव हर दिन आता रहता है, जिंदगी की इस समझ को अगर दो जीवन साथी समझदारी से आगे बढ़ाते है, तो निश्चित है, दाम्पत्य जीवन एक सुखद अनुभव की सैर करता है। “42”, साल का सफर “शायर” के साथ हमसफ़र के रुप निश्चित ही मेरे जीवन को सक्षमता प्रदान करने वाला रहा। प्रेम व स्नेह की इस यात्रा जीवन संगिनी के रुप में उसने हर कर्तव्य का सही पालन किया । फर्ज बनता है मेरा, जीवन को प्राप्त इस सक्षम उपहार के लिए विधाता का शुक्रिया अदा करू और उसके स्वस्थ स्वास्थ्य की प्रार्थना करता रहूं।इतने साल के दाम्पत्य जीवन में उतार चढाव आना स्वभाविक है, पर आपसी तालमेल जीवन मनमोहक रहता है, यही हमारी आपसी उपलब्धि है।

“प्राभृत प्रामाण्य ” के रुप में यह कविता सफल दाम्पत्य जीवन को समर्पित है।आपका आशीर्वाद और मंगलकामनाओं से हमारा इस धरा पर तय जीवन गतिमय रहे, यही कामना है।

अगर चाँद और सितारों के भी होते जज्बात
“हमराही” जीवन के मेरे
देख हमें
शायद यही वे कहते
क्या ऐसी होती बेमिसाल मौहब्बत
एक ही सांस में दो दिल धड़कते
और
हर रोज कहते
चलो साथ साथ चलते
जमाने के गुलशन में
सदाबहार दिल के आशियना में
मौहब्बत के आँगन में
हम
“कमल” यी “कमल” खिलाते
इस पथ को
इस साल फिर नये आयामों से सजाते

💖

जिस्मों की क्या परवाह
प्रेम का बना रहें प्रवाह
ये ही करते आज प्रार्थना
प्रभु,साथ हमारा निभाना

💔

साथ तेरे
गुजारा, “साथी”
समय भी निखरा, “साथी”
पर यादों में
आज भी वो दिन बिखरा
जब चांदनी बन
तुम मेरे जीवन-नभ में छायी
दूर हुआ आशंकाओं का अन्धेरा
सच कहता
जिंदगी आज भी मुस्कराती
प्रेम वन्दना के
नये नये गीत गाती
हर उलझन का समाधान
साथ साथ ढूंढती
देख, तेरी मासूम सूरत
जीने की आज भी वजह बताती
कल को किसने देखा
पर आज का विश्वास अपना बनाये रखना
जन्मों का बन्धन होता
“प्यार”
उसे यों ही अपनाये रखना

💗

जीवन साथी मेरे
कल रास्ता
कहीं रुक जाये
हम में से एक आगे पीछे हो जाये
जीवन के जंगल में
हम सदा के लिए भटक जाये
अफ़सोस के गीत न गाना
फिर कभी
जब धरती पर आये
तो फिर एक बार फिर
हमराही बन गले लगा लेना
अगर….

🌹

कल भी फूल खिलेंगे
कलिया महकेगी
चाँद भी होगा
सितारे भी होंगे
सूर्य भी चमकेगा
सभी
शायद ये दुआयें देंगे
जन्मों तक
ये बन्धन बना रहे
“कमल”
“शायर”
के जीवन का गुलशन
आत्मिक प्यार से
सुरमई सुरभि
बन सदा हरा भरा रहें
अपने पथ की तय मंजिल तक
“प्रेमाश्रयी” से सजाते रहे

सम्पूर्ण प्रेम सहित : कमल भंसाली ( रचियता)

🐓 मुक्तक🐔 कमल भंसाली🐰

प्रशंसा का भूखा संसार, भूल गया सत्य का प्रकार
अभिमान की वेदी पर स्वाहा,आत्मा कर रही चीत्कार
पन्थों में उलझा धर्म तलाश रहा, अपना स्थायी आधार
अभिमान में गिरा इंसान,भूल गया मानवता का सत्कार
😢😢😢
बात बड़ी हो या छोटी हर एक होती है, मूल्यवान
इनकी कीमत से ही होती हर इन्सान की पहचान
जिसके पास अपने वचन का सही मोल नहीं होता
कितना ही कुछ न हो पास, वो सही इंसान नहीं होता
🐳🐳🐳

स्वार्थ की गगरी कितनी ही भरले कोई भी इंसान
तख्त ताज की दुनिया में सब के सब रहते फकीर
राजा हो या रंक, लेकर आते आधी अधूरी तकदीर
रुप रंग सब बिगड़ जाते, जब आते अति बुरे दिन
🐤🐤🐤
जग के रुप अनेक, कौन सही, कौन गलत
समय ही करता तय, कौन शत्रु, कौन भगत
रिश्तों से अच्छी होती, प्यार भरी सच्ची दोस्ती
निभ गई तो जिंदगी तन्हाई का दर्द नहीं भोगती
🐢🐢🐢

पुत्र हो पुत्री, जो माता पिता को नहीं मानते
वो पिछले जन्म के शत्रु, बदला लेने ही आते
सुख की बूंद में, कितना दुःख समाया रहता
चाहत की दुनिया में, प्रेम सदा पराया ही रहता
🐍🐍🐍

भले का ही भला होता, सत्य ही रहता सिर्फ अचल
जिसने मर्म जीवन का समझा, वो कहलाता इंसान
दूसरे के लिए जीना ही है, एक सही सच्चा जीवन
विश्वास में जो खरा, वो जग के कीचड़ मे “कमल”

रचियता**🌺कमल भंसाली🌺

₹₹** पहचान**₹₹ कमल भंसाली

image

वक्त न बदला, मैं ही बदल गया
कल तक सब के साथ ही चला
आज अकेला ही राही रह गया
पथ मेरा, कितना खुदगर्ज हो गया

कल तक जो अपनेपन का दंभ भरते
मेरे साथ ही अपने हर कदम बढ़ाते
नाज था उन्हें मुझपर , हमराही कहते
आज वही चेहरे, मुझे भीड़ समझते

छोटी सी “अर्थ” की एक हल्की बून्द
रिश्तों की परिभाषा का सच समझाती
भ्रमित नीर से निपजी सम्बंधों की खेती
क्यों जिंदगी, बेवजह अपनी पीठ पर ढ़ोती

कल के लिए, नभ् को मैंने कितना संवारा
फिर भी आज, डूब गया मेरा हर सितारा
देखो, भाग्य का खेल होता कितना गहरा
अपनों से ही मन को नहीं मिलता सहारा

कहने को सब है, आज भी मेरे अपने
पर दिल नहीं देखता, अब उनके सपने
उनकी निगाहों में शक ही झिलमिलाता
प्यार तो अब उनके बहानों में बह जाता

सच तो यह है, कोई किसी का नहीं होता
कपड़े उतारों, तो हर इंसान नंगा ही होता
जीवन एक रंग का सदाबहार सपना नहीं
दूसरों की मजबूरी पर हंसना गुनाह नहीं

मेरी यह कविता, नहीं एक स्वस्थ सन्देश ही समझो
जीवन में अर्थ के अनर्थ की जहरीली संभावना समझो
कल तक जिस “कमल” के फूल ने सबको महकाया
आज, मुरझा गया, तो उसका उपयोग कम नहीं समझो

रिश्तों की कमजोर दीवारे जब गिरती
जीवन के प्रांगण में जगह बढ़ जाती
शिकायत नहीं, अब ख़ुशी ही मिलती
खुद को पहचान, अब, खुद से ही मिलती……..कमल भंसाली

★★आस्था का फूल★★कमल भंसाली

image

अपनी ही मंजिल का हूँ, दीवाना
उसी राह का मस्त सा हूं, परवाना
सही राह पर मुझे चलते ही जाना
क्या फर्क पड़ेगा, दुश्मन बने जमाना

एकपथ की कठिनता से नये रास्ते बनते
आलोचना से ही गंभीर पुष्प जन्म लेते
मासूमियत से ही आता हर रोज सवेरा
कैसा भी हो अन्धेरा ? सपना है, सुनहरा

जो दुनिया की करते परवाह, वो ठहर जाते
न वो जीते, न वो मरते, बुत बनकर रह जाते
कौन किसका ? सम्बंधों में प्यार जो तलाशते
हकीकत में वो दर्द के काँटों से ही दामन भरते

कल के अफ़साने, आज काम नहीं आ सकते
शीशे के घर में रहकर पत्थर नहीं फैंक सकते
निर्लोभ, निर्लेप को डर भी ख़ौफ़ नहीं दे सकते
अस्तित्व के भय से, कभी मंजिल नहीं पा सकते

कहते है, बिगड़ी हुई चाहते जब सुधर जाती
जिंदगी कुछ विशेष पूरक पहचान बन जाती
दीप के लिए बाती, तैल में डूब मगन हो जाती
उजाला बन अंधेरो को कुछ अहसास दे जाती

मस्त मस्त मुसाफिर, मैं अपनी ही राहों का
क्यों परवाह करु, खुदगर्ज दुनिया की बाहों का
सफर मेरा है यह है, कर्मफलों से पराग पाने का
समझ गया खेल है, जिंदगी, शमा और परवाने का

चल रहा आज, कल तक हद दुनिया की पार कर जाऊंगा
जाने से पहले, यकीन कर दुनिया, तुझे क्षमा कर के जाऊँगा
इतनी सी राय मेरी, गैर की खिड़कियों में न करे तेरे नैन प्रवेश
फूल ही चुनना है, “कमल” का, तो फिर अंदर का कीचड़ ही तलाश…..कमल भंसाली

बेरुखी सनम तुम्हारी….कमल भंसाली

तेरी बेरुखी से, दिल हुआ परेशान
उदासियों में छिपा, थोड़ा लगता हैरान
हर आहट पर, करता तेरा इन्तजार
अपने कदम रख, दिल दहलीज पर
कुछ तो हाल जानले जरा, सितमगर

तुम अपनी वफ़ा पर, कर हजार बार यकीन
पथ प्यार का होता नहीं, जरा भी नहीं कठिन
प्यार ही सब कुछ, जीवन प्यास बुझाने के लिए
जबाब और भी देने होते, दस्तूर निभाने के लिए

खा कसम, कहता प्यार, हर रस्म वो निभाता
सच्चा हूं, इसलिए जन्मों तक संग संग चलता
जूनून है शिकवा करने का, पर नाराजगी न रख
आरजुओं का भी दिल होता, जरा ध्यान इनका रख

प्रियवर, प्रेम पुष्प होता बड़ा निर्मल, जैसे “कमल”
कीचड़ में रहकर भी, खिलता बिन कोई स्पंदन
काया मिलन से ज्यादा सुंदर होता, आत्म मिलन
बता, बरसात की बेरुखी से, कब सुखा नदी जल

दिल की नादानी ठहरी, महबूब की अदा लगी अनजानी
बेसब्री तुम्हारी प्यार में लगती, कितनी जानी पहचानी
झील सी तेरी आँखों में, आज भी तस्वीर कोई अरमानी
आ, दर्पण निहार, मुस्करा, पता नहीं कब रुठ जाये, जिंदगानी ……कमल भंसाली

जवानी, दीवानी..बेवफा रानी….♥ कमल भंसाली ♥

चंचल चितवन के मालिक, नैन तुम्हारे
जिधर भी घूम जाए, उतने आशिक तेरे
जवानी, प्यार मेरा न समझे तूं, न नैन तेरे
समय की बात है,आशिक हम भी थे, तेरे

मानते है, खुशबुओं की हसीन मलिका हो
जन्नत की देवी जैसे, कई नामों से मशूहर हो
कोई के लिए परी, कोई के लिए चश्मे बददूर हो
जरा,बताओ, क्यों,अब हमारे दिल से दूर हो

सजकर रहती हो, मादक अंगड़ाई भी लेती हो
सच कहें,गुस्से में तो और भी हसीन लगती हो
कयामत ही आ जाती, जब खिलखिलाती हो
जख्म देकर, कितनी संजीदगी से सहम जाती हो

होठों में तेरे “कमल” खिलते, गालों पर उसकी लाली
कभी संगीत की देवी, कभी लगती हो महाकाली
सच कहे, सादगी में तो बहुत ही सुंदर दिखती हो
रंगो के छंदों में , पथिक को रस्ते से भटका देती हो

क्या है तुम में ऐसा प्रिय, लोग तेरा नाम ही गुनगुनाते
सोते, जगते, तुम्हे और जवान, हसीन देखना चाहते
ख्याल, तेरे हजारों होंगे उनकी निगाहों में तुम्हारे लिए
तभी तो तुम्हे, वो एक बार आगोश में भर लेना चाहते

खुदा भी होगा हैरान, शायद थोड़ा होगा परेशान
उसकी चाहत में, सब कशीदे तेरे प्यार के करते गान
पता नही,समय के पंख पर बैठ, तुम कब उड़ जाओगी
अपनी बेवफाई के, हजारों कारण का उपहार दे जाओगी

सच ही कहते है, सही भी कहते है, सब ज्ञानी
पहचानों, संभलो, जानों तुम्हारा नाम है जवानी
एक झलक से फुसलाती रहती, ख्बाब दिखाती
अरमानों को दंश कर, नागिन वापिस नहीं आती

चाहत जगत में जितनी, उतनी ही तू बदनाम
जितने तेरे आशिक, उतने ही है तेरे नाम
कोई कहे दीवानी, कोई चार दिनों की चांदनी
कोई कहे, बिन वफ़ा की प्रमदा, अजीब मस्तानी

सबकी हो प्रियतमा, कुछ की हो, प्रमत्त दाता
निम्नतम उम्र की तुम हो, मधुरतम उत्तमता
उतेजना के चर्मबिन्दु की, हो बिन मधु मधुशाला
तुम बिन जीवन, बन जाता धर्म की धर्मशाला

कोई कुछ भी कहे, तू , हर उम्र में अच्छी लगती
बिन तुम्हारे, जिंदगी गंभीर नि:संबल विधवा लगती
निराकुल राते सवेरे को, शाम से तलाशने में लग जाती
प्रेम की प्यासी जिंदगानी, लाचार बंजर बाँझ कहलाती

रूप, नाज, नखरे, रंग बदल, ढंग बदलते रहेंगे तेरे
चंचल चितवन के मालिक, नैन जो ठहरे, तेरे
जवानी जिंदाबाद, जवानी जिंदाबाद
मैं नहीं, दीवाने कह रहे, सारे…….. तेरे…..कमल भंसाली

कमल भंसाली