★★ गुलदस्ता ★★कमल भंसाली

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तुम्हारी उन खुशबुओं का पता दे दो
जिनमें बैचेनिया मचलती है
तुम्हारी उन ख्वाइशों का पता दे दो
जिनसे दिल की प्यास जगती है

तुम क्या जानों अपने नैनों की भाषा
वो ही गुनाह करती
अनजान बन कर जगाती कातिल आशा
सरे आम बदनाम करती

प्यार के खेल की दीवानी तेरी अंगड़ाई
न जीने देती, न मरने देती
इंतजार की हद पार कर
मेरे दिल का कत्ल करती

मय्यसर होती,अगर दूसरी जिंदगी
तो, तुम्हारी कसम
न तुम्हारी खुशबुओं का
पूछता, मैं अतापता
न ही तुम्हें देता
शिकायतों भरा
मेरे प्यार का गुलदस्ता…कमल भंसाली