फटी एडिया

रहनुमा थे, वो मेरे
अपने थे, वो मेरे
कहते थे, जब
कंधे तक आ जायेंगे
एक चमन बना देंगे
जिन रास्तों से गुजरूं
उन पर गुल बिछा देंगे
जग में रौशनी
मेरे नाम की फेला देंगे

कितना खुश रहता
आँखों में कुछ सपने
आकर सजने लगे
वक्त बीतता गया
इंतजार भी खत्म हुआ
उनके कंधे चौड़े होने लगे
मेरे सिकुड़ने लगे
उनके दिल में
अब कोई और रहने लगे

वो भूल गये
मैं उन्हें याद करने लगा
आज चमन उनके पास
मेंरे पास तो जिस्मे खाक
गुल की जगह फटी एडिया
चुभती है ऊंचाई की वो सीढ़िया
शुक्र है, अब उनपे चढ़ता नहीं जाता
अब अपने कंधे ही सहला कर, रह जाता
देखते ही देखते, वक्त कितना बदल जाता…
【कमल भंसाली】

कमल भंसाली