♨उस पार♨ कमल भंसाली

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दस्तूर दुनिया के हजारों बार अपनाये
जब जरुरत पड़ी तो एक काम न आये
पता नहीं वो अपने ही थे या कोई पराये
हालांकि वक्त के धागों से ही फूल पिरोये

दावा किया था कभी हाथ उठाकर हमने
सच होंगे एक दिन देखे हुए संजोये सपने
हकीकत आज यह है, नहीं वो अबअपने
ख्याल दुनिया का क्यों देखे बहुरंगी सपने

मुरझा गए फूल सारे, रह गए धागों के किनारे
एक छोर पकड़ के दूसरे को ही तलाशते रहे
जीवन का बदला रुप, कभी छावं कभी धूप
समझ गए हर दिन बदलता दुनिया का स्वरुप

अब पांव जमी पर ही रखते, उड़ने से डरते
बेदर्द ख्याल जब भी आते, सिर्फ मुस्कराते
गैरो की परवाह नहीं, सिर्फ अपनों से डरते
जख्म जितने खाये सब दिल में संभाले रखते

चाह नहीं रही अब दिल को और तड़पाऊ
जिऊ तब तक मर्म जिंदगी का समझ जाऊ
जो शुकुन इस पार न पाया शायद उस पार पाऊ
माफ़ करना, अगर जल्दी में अलविदा न कह पाऊ

**रचियता**कमल भंसाली