🔔उस पार का मोक्ष 🔔 कमल भंसाली

कल की ख़ुशी के लिए,जो आज नहीं जीते
वो भूल जाते, पेड़ों पर फल यूँहीं नहीं उगते
मकसद बिना तो बहार भी चमन नहीं ढूंढती
छोटी सी जिंदगी थोड़े में बहुत समझ जाती

मकसद से बना है, इस संसार का ताना बाना
एक राह पर ही हम सब को है, आना जाना
तिनकों से बनाआशियाना, कर्म से पड़ता सजाना
पंछी बन रहना, छिनभंग जीवन ही है, आखिर जीना

छायांकित विचारों में कितना कुछ आ जाता
आज के पन्नें पर आगत इतिहास रचा जाता
सुख दुःख की परछाई से धूप भी घबरा जाती
पल की दहशत से चलती सांस भी ठहर जाती

धरोहर नहीं जीवन, फिर भी कहलाता अनमोल
एक बार का यह उपहार, पर्यवदात और बेमिसाल
मन चंचल चकोर करता रहता कामनाओं का श्रृंगार
देह धर्म को निभाते, आत्मा न भूले सत्य का आहार

पावन जीवन साथ निभाता, बन्धनों से हो निराकार
बंधु, सृष्टि की दृष्टि में निशब्द मंजिल करती इंतजार
निरंतरता में तैर कर ही करना पार कर्मो का महासागर
सुन, मान सरोवर के हंस, मोक्ष हंसिनी खड़ी उस पार

रचियता : कमल भंसाली

आना पड़ेगा बार बार

मत साबित कीजिये, दुनियांअहसासों से बनती
मेरा तो मानना यह ही है, यह प्रयासों से चलती
मत मानिए, भाग्य जीवन निर्माता हो सकता
आंकलन कहता, मनुष्य स्वयं ही भाग्य निर्माता

अच्छाईयों का गुणगान करते सदा, सच्चे इंसान
देह धर्म तो इकठ्ठा करता,रोजमर्रा का सामान
आत्मा की पुष्टि से ही तैयार होती, अच्छी नीति
प्रकृति तो गुण और अवगुण दोनों को देती, सहमती

सम्पन्नता का सार दान और जन कल्याण
मानव तो होता चंद दिनों का, तय मेहमान
जीवन को सही सलीके से जीना है, ज्ञान
हमारे ह्रदय की धड़कन में ही बसते,भगवान

अंहकार, चालाकी और झूठ है, मीठा जहर
पीने के बाद घूमते ही रहते, हमारे अंदर, बाहर
सत्य ही एक औषध, एक मात्र पूर्ण समाधान
मंथन कर अपनी आलोचना खुद करे, वही इन्सान

संयम और मृदुलता मन की, है आत्मिक पवित्र वन्दन
अनाम शक्ति की पहचान ही, सात्विक जीवन स्पंदन
जागकर अपने को पहचाने, यही है जीवन अभीसार
सच, है जीवन-नैया चलेगी, हमारे दिशा निर्देशानुसार
सही तो उस पार, नही आना पड़ेगा वापस बार बार…
【कमल भंसाली】

कमल भंसाली