🌞उपहारमय⭐ 🎡२०१८ 🎡 आपके लिये ✍कमल भंसाली

यह साल भी हमारे जीवन में अपना अंतिम क्षण तक का सफर तय कर अपनी मंजिल की पूर्णता की ऒर बढ़ रहा है,और एक नये साल का तोहफा हमें देने की तैयारी भी कर रहा है। हमें उसके इस तोहफा का अहसास है, हम भी उसके स्वागत के लिए कई तरह की तैयारी कर रहे है, इस आशा से शायद यह मेहमान हमारे जीवन को आनन्दित और मंगलमय करेगा। मेरी भी यही प्रार्थना हम सबके लिए है, कि हम अपने जीवन को आनेवाले साल में सुखी जीवन का आधार बनाये, और उसे प्रफुल्ल और आनन्दित बनाये। कोई भी मेहमान जीवन भर हमारा साथ नहीं निभाता परन्तु उसके साथ बिताये क्षण जीवन को बहुत कुछ ऐसा अहसास करा देता है, जिससे हमें यह अहसास तो जरुर हो सकता है, कि हम भी यहां मेहमान है, हमारी भी जीवन अवधि है, हमको भी किसी ख़ास जरुरत के अंतर्गत ही यहां मेहमान बन कर आना पड़ा है। अतः हमारा जीवन सदा प्रेरणामय बने, यही अगर हमारा इस साल का अपने आपसे एक पूर्ण वादा रहें और हम अपने इस मकसद को इस साल की उपलिब्धि का प्रेरक लक्ष्य बनाये, निश्चित है, नया साल हमारे लिए मंगलकारी होगा।

“जीवन एक अनबूझ पहेली” पता नहीं किस दार्शनिक ने किस सन्दर्भ में जीवन को इस स्वरुप में परिभाषित किया, हो सकता है जीवन की कुछ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष न समझने वाली घटनाओं ने उस दार्शनिक को मजबूर किया हो, जीवन को इस तरह परिभाषित करने को। परन्तु सभी को जीवन इस तरह का अनुभव नहीं करा सकता क्योंकि जीवन की अपनी कोई विरासत नहीं है, वो तो लयमय ही चलता है। चूँकि निरन्तरता ही उसका स्वभाव है, अतः हर क्षण चलना उसकी मजबूरी है। जीवन की जिम्मेदारी प्राणी के शरीर, मन, और आत्मा अनुमोदित कार्य को सम्पूर्ण करना है। अतः हमारे लिए जरुरी है, हम अपने जीवन का आंकलन सूक्ष्मता और समझदारी से करे, तो जीवन हमें मित्र ही लगेगा l सही जिंदगी स्वभाविक रफ़्तार से प्रेम, स्नेह, और आपसी समझ का सही उपयोग करती है, तो कहना नहीं पड़ सकता की जिंदगी न समझने वाली कोई वस्तु या फिर कोई असामान्य सूत्र है।

जिंदगी का फलसफा उम्र के हिसाब से न चलता, तो सफलता और असफलता का अनुभव कोई प्राणी शायद ही कर पाता और अनुभव की कभी कोई कीमत भी नहीं आंकता। धरती पर जन्म के बाद जब इंसानी शरीर को कपड़े के आवरण से ढका जाता है, तो हकीकत में उसे समझ में आ जाता है, कि उसे एक ऐसा जीवन मिला है, जो संसार के लिए जरुरी है और प्रेम और स्नेह से उसका स्वागत हुआ है, तो निश्चित है, उसे भी अपने कर्मो की जिम्मेदारी धीरे धीरे समझनी होगी और जब किसी की मौत से उसका पहला साक्षात्कार यह समझा देता है कि जीवन मिलना भाग्य की बात है और मृत्यु होना समय की बात है। तब उसकी समझ में यह भी आ जाता है कि दूसरों के दिल में रहना ” अच्छे कर्मो” की बात है। अगर शास्त्रो की बात करे, तो वो भी ऐसे दर्शाते है कि कर्म ही जन्म निर्माण में लम्बी भूमिका निभाते है। इंसानी शरीर काफी विकट होता है, वो जल्द मौत को स्वीकार नहीं करता तभी तो एक आदमी के मरने के बाद भी उसका ह्रदय 10 मिनट, मस्तिष्क 20, आँखे 4 घंटे, त्वचा 5 दिन, हड्डिया 30 दिन तक जीवित रह सकती है। सूक्ष्मता से अवलोकन करने से जीवन स्थिति और आधार को कुछ हद तक हम अपने जीवन उद्देश्यों को सही मार्ग और सन्तोषमय बनाने की कोशिश कर सकते है, जो उचित भी है। एक साधारण मानव का जीवन सिर्फ दो स्थितियों का अनुभव ज्यादा करता है, सुख, और दुःख का उन्हें आप आनन्द, गम या और कोई अनुकूल शब्द दे सकते है पर जीवन यहीं लक्षित करना भी गलत होगा क्योंकि आत्मिक सन्तोष का जब तक जीवन को अनुभव नहीं हो, तो वो अधूरा ही रहता है। भारतीय पूरातन सभी शास्त्र हमारे जीवन को काफी गंभीरता से लेकर उसे श्रेष्ठ बनाने में विश्वास करते है, तभी उन्होंने जीवन को सहज प्रक्रिया के तहत् न रखकर सृष्टिकर्ता का दिया उत्तम उपहार माना।

आज जो संसार का स्वरुप नजर आ रहा है, उसमे शायद मानवता कठिनतम यात्रा के पड़ावों से गुजर रही है। समझदार होती मानवता नासमझी को अपनी बुद्धिमानी समझ उसका उपयोग कर रही है। जीवन की जो न्यूनतम जरुरत होती है, उसमे भोजन, पानी तथा हवा का शुद्ध होना हर एक प्राणी के लिए अत्यंत जरुरी है, नहीं तो जीवन को शारीरिक सुख का अनुभव होना मुश्किल ही लगता है। आज वो इनको ही अर्थ उपार्जन का साधन समझ कर इनका दुरुपयोग करने में नहीं हिचकिचा रहा। नैतिकता के हजारों पाठ पढ़ने वाला इंसान अपनी लालची मन की सीमाओं संयमित करने की जगह उसे बढ़ावा दे रहा है। अच्छी तरह से जानते है हम, सदाबहार नहीं हम परन्तु सुख दुःख की परिभाषाओं के अंतर्गत ही तो जीवन मापते है, और आज हम सबसे ज्यादा तनावग्रस्त जीवन जी रहे है। क्या ये हमारी स्वयं निर्मित मजबूरी है ? आप और हम शायद संकोच वश इस प्रश्न का उत्तर देने में टालमटोल करे, पर हकीकत यही है,इंसान ही इंसान का आज शत्रु ज्यादा मित्र कम नजर आ रहा है। इसका एक ही कारण है, हम अशुद्ध विचारों के मालिक बनते जा रहे है, पवित्रता हमारी सिर्फ जबानी जमा खर्च का हिस्सा बन कर रह गई। इसलिए जीवन एक पहेली बन कर रह गया। हर रोज इसकी हर नई पहेली का उत्तर देना हमारी जिंदगी का अनिवार्य हिस्सा बनता जा रहा है। अपेक्षाओं के संसार में हमारी निरहिता स्पष्ट झलक दे रही है, और हम बेखबर आज भी उस जीने में लगे जो शायद समय गुजारने के अलावा कुछ भी नहीं लगता।

दोस्तों, नये साल की नई सुबह की पहली किरण से अपनी चेतना को अगर स्फूर्ति, आनन्द देना का ध्यान हों तो कुछ नया चिंतन कर आप उसे अपने जीवन को प्रभावकारी बनाने में सफल हो सकते है, एक अंग्रेजी कहावत है “A good begning makes a good end” ।

हमारे जीवन के कुछ क्षेत्र है, हो हमारी दैनिक जीवन को महत्वपूर्ण बनाता है, उन्हें याद कर उनसे निर्मित गुणों के चवनप्राश का रोज उपयोग करे, तो शायद ही हम इस साल में निराशा को अपने आसपास फटकने दे, और गतिमय जीवन की लय बिना रोकटोक अपनी मंजिल की तरफ अग्रसर होती रहेगी।

मुख्य क्षेत्र जो जीवन साधना के हिस्से है, उनमें जो हमें महत्वपूर्ण बना सकते है, उनकी एक संक्षिप्त सूची नीचे तैयार कर, हमें इस साल इन पर गौर करना चाहिए, वो हो सकती है….( मेरे अनुसार)

1. अमूल्य समय की सही उपयोग की समझ
2. व्यवहारिक सन्तुलन हर कार्य और सम्बंधों के निर्वाह में
3. हर रिश्ते की गरिमा पहचान उसका मान बढ़ाना
4. प्रेम और स्नेह का दिल में स्पंदन
5. समझदारी से पूर्ण संवेदनशीलता
6. चारित्रिक सक्षमता को मजबूत रखना
7. ईष्या, द्वेष, लोभ, हिंसा, कपट को रोज जीवन द्वार से बाहर फैंकना
8. स्वास्थ्य और पर्यावरण को स्वस्थ रखना
9. आशा, आस्था, सत्य और विश्वास का जीवन में सदुपयोग करना
10. संघर्ष, संयम, नैतिकता, देश, धर्म, दया समावेश जीवन में रहना
11. हार को जल्दी से स्वीकार न करना, सतत प्रयासी जीवन जीना
12. आर्थिक, सामाजिक जीवन को मजबूत बनाना

नववर्ष के आगमन को अपने जीवन का एक महत्वपूर्ण अंश बनाने के लिए हमें कुछ शक्तिवर्द्धक सिद्धान्तों को समझ कर उनका शुरुवात से ही पालन करने की दृढ़ता होनी चाहिए। इसका प्रभाव आनेवाला वर्ष हमें एक सार्थकता आभास जरुर दे सकता है, जो जीवन को एक अद्धभुत मानसिकता तो देगा ही, साथ में हमें कभी भी किसी चुनोती के सामने लज्जित नहीं होने देगा। शायद यही सफलता का सही मापदण्ड होता है।

कुछ जीवन विशेषज्ञों के अनुसार कुछ स्वयं सिद्ध सिद्धांत हर जीवन को सार्थकता अनुभव करा सकते है, उनमे से कुछ तथ्य उदाहरण स्वरुप प्रस्तुत करने की कोशिश की है। आप भी अपनी जरुरत के अनुसार बना कर उन्हें अपनाने की चेष्टा अगरआनेवाले साल के प्रारंभ से कर सके तो शायद यह सोने में सुहागा जैसा प्रयोग आपके जीवन में माना जा सकता है।

1. आशा किसी से भी नहीं करना।
2. सत्य बहुत सी आफतों को दूर रख सकता है।
3. आलोचना दैनिक जीवन में सिर्फ वैचारिक तो हो पर व्यक्तिगत नहीं।
4. अपनी गलती का मूल्यांकन कर, स्वीकार करना उचित है।
5. सात्विक और पौष्टिक आहार स्वास्थ्य और मन दोनों को दमदार बनाता है।
6. समय के अनुरुप अपना बदलाव उचित होता है
7. मितव्यता और संयम को सच्चे दिल से अपनाना सही है।
8. सही दिनचर्या समय का सही उपयोग करा सकती है।
9. अच्छा साहित्य सही जीवन दर्शन का ज्ञान करा सकता है।
10. सिर्फ सार्थक परिश्रम से जीवन को आर्थिक व सामाजिक महत्व मिलता है।

आप अपने जीवन को जिस तरह दृष्टिमय बनाना चाहते, उसी अनुसार उन क्षेत्रो को और जोड़ हर नये साल को और नवीनतम कर सकते है। सिर्फ ध्यान रखने की बात यही है की ” आप जब तक कुछ हासिल नहीं करोगे, जब तक उसकी शुरुवात नहीं करोगे”।


आशा सहित, मंगलकामनाये, नया साल आप सभी को प्रफुल्लित और आनंदित जीवन का उपहार दे।…….लेखक💐.कमल भंसाली💐

ππ” उपहार “असफलता” का..”सफलता” ***कमल भंसाली***

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“असफलता” वो शब्द है, शायद जो हम कम ही सुनना पसन्द करते है, अपने बारे में, आखिर क्यों ? आज इसी पर हम विचार करने का प्रयास करते है। आखिर इस शब्द के प्रति हमारा रवैया इतना कठोर क्यों है ! क्यों हम इसे महत्वपूर्ण समझते है ! किसी भी प्रयास का सकारत्मक फल की प्राप्ति नहीं होने को ही ज्यादातर असफलता क्यों माना जाता है ! कुछ ऐसे सवाल है, जिनका उत्तर शायद हमें असफलता से प्रेम कराना सीखा दे, तो शायद असफलता का “अ” स्वयं हटकर सफलता का हमको कोई उपहार दे दे। हालांकि असफल इंसान जानता है, कि कई बार प्रयास करने के बावजूद वो सफल अपनी किसी कमजोरी की वजह से नहीं हो रहा और उसका यही चिंतन उसे सफलता के लिए प्रेरित करता है, तथा उसको कुछ ख़ास कमियों के प्रति सही दृष्टिकोण से समझने की प्रेरणा भी देता है।

इस तरह असफलता नफरत करने की नहीं प्यार करने के लायक होती है। हकीकत भी यही कहती है, “असफलता सफलता की कुंजी है”। मानव जगत का एक सक्षम और बुद्धिमान प्राणी है, यह सही है, और वो हर प्रयास से कुछ विलक्षण को पाना चाहता है, शायद यही उसके जीवन का मुख्य उद्देश्य भी होता है। सफलता और असफलता को हम जीवन का पूर्ण उद्धेश्य नहीं कह सकते। सभी धर्म ग्रन्थ भी मानते है, प्रयासः रत जीवन ही जीवन है। जब प्रयासः ही जीवन का लक्ष्य है, तो निश्चित यह भी है, सब प्रयासो में पहली बार हम सफल हो, यह भी जरुरी नहीं है। “सतत प्रयास ही सफलता दे सकता है” यह एक सही गुरुमन्त्र है, इसमें शक की गुंजाइस भी नही होनी चाहिए। हर प्रयास के फल को हम असफलता में रखे, यह कहां तक उचित है ! हर कार्य की एक गरिमा होती है, उसके अनुरुप जब तक हमारा प्रयास नहीं पहुंचता, तब तक सही परिणाम नहीं आ सकते, यह हम अच्छी तरह से जानते है। कोई भी कार्य अपनी विषिस्टता से वंचित नहीं होना चाहता, अतः उसे उचित व्यवहार भी हमसे चाहिए। हमारी कार्य के प्रति आस्था अगर पूर्ण रुप से होती है, तो हमारे पहले प्रयास में सफलता हमारे कदम चूमती है, वरना असफलता आकर हमें समझाती है, अभी प्रयास में सुधार की जरुरत है। यह असफलता की ही खूबसूरती है, कि हम उससे नफरत करने लगते है, पर वो सदा हमारी शुभचिन्तक ही बनी रहती है।

गीता का पूरा दर्शन कर्म की मीमाँसा करता है, पर फल के बारे में इतना ही बताता है, उसकी आशा न करे। इस दर्शन में कुछ तथ्य है, वो कहते है, कर्म प्रमुख जीवन को फल मिलना तय है, परन्तु उसकी चिंता न करो। इस दर्शन में एक चेतावनी है कि चिंता से फल पूरी तरह से अपना सही स्वरुप नहीं ले पायेगा। गौर करने की बात है, कर्म शब्द “कृ ” धातु से बना है, उसका अर्थ ‘ करना, व्यापार, हलचल,’ होता है। इसका इन्ही अर्थो के सन्दर्भ में सामान्य उपयोग गीता में किया गया। वैसे कर्म को “क्रिया’ से भी सम्बंधित करना सार्थक होगा। सफलता और असफलता का केंद्र बिंदु ‘कर्म’ ही है, यह काफी सत्य पूर्ण तथ्य है, जो वास्तिवक भी लगता है। कर्म बिना फल का नहीं होता, ये कर्म की सबसे बड़ी खासियत है, जिससे इंकार भी नहीं किया जा सकता। कर्म मजबूत सा दिखने वाला शब्द जरुर महसूस होता है, पर वास्तव में काफी संवेदन शील है, जीवन की हर लय से यह कभी अछूत भी नहीं रहता है। इसको भाग्य, सत्य, स्नेह, प्रेम, दान, संयम, क्षमा, धर्म, नैतिकता जैसे कई अमृतकारी गुण चमत्कारी बना सकते है, जिसका फल भलाई जैसे पौधों का निर्माण करते है। इसके विपरीत क्रोध, काम, लालच, वासना, ईष्या, द्वेष, जैसे नकारत्मक तत्व कर्म के अस्तित्व तक को नकारत्मक बना कर उसे निष्क्रय कर देते है। सफलता प्रयासः रत होकर ही हासिल की जा सकती है, ऐसा चिंतन हमें कभी उस असफलता का बोध नहीं करा पायेगा, जो जीवन में हमें निराशा या हताशा दे सकती है। हम ही गलत धारणा बना ले, छोटी छोटी अनिर्णायक कोशिशों को अगर असफलता का जामा पहनाकर अशांत हो जाए, तो यह हमारी कमजोर मानसिकता का एक स्वरुप है, इसे बदलने से ही जीवन सुख और शांति का सदा अनुभव करता रहेगा।

असफलता का जीवन मूल्यों के सन्दर्भ में काफी महत्वपूर्ण योगदान होता है। सच बात तो यह है कि सफलता हमें रोमांचित या अस्थायी प्रसिद्धि दे सकती है, परन्तु जीवन की वास्तिविकता से परिचय कराने में संकोच करती है। मसलन आज के सामजिक परिवेश को ही ले, आज का युग आर्थिक युग है, यहां सफलता का मापदण्ड अर्थ की परिपूर्णता से भी आगे है। सफल इंसान जरुर खुशनसीब अपने को कुछ मान सकता है, परन्तु उसकी आत्मा में कहीं न कहीं खालीपन का अहसास होता है, उसे वो जीवन में कभी नहीं भूलना चाहेगा, वो है, उसका संघर्षो भरे अनुभवों का। उसके अनुभव उसे कई कड़वे तथ्यों से उसका परिचय कराते है, उनमे बुरे समय में रिश्तों की भूमिका भी एक है। एक कहावत पर नजर डालते है, ” सुख के सब साथी, दुःख का नहीं कोई”, कम शब्दों में शायद यह बात जीवन को निराशा से बचाने के लिए कही गई हो, पर यह एक यथार्थपूर्ण सच है। कहनेवाले ने, हम सबको जीवन में अकेलेपन को कमजोरी नहीं समझने की हिदायत इसलिए दी की जो वस्तु आपके पास नहीं है, वो कोई दूसरा नही, आपको अपनी क्षमताओं से प्राप्त करनी होगी। हकीकत की तराजू का यह सत्य ही जीवन का मूल मन्त्र है, कि क्षमताओं के सफर की मंजिल प्रयास से कुछ निश्चित को पाना ही होता है, यह दूसरी बात है, इनका मूल्यांकन हम सफलता और असफलता के दायरे में करते है। हम मानवीय गुणों और अवगुणों दोनों के मालिक बन कर इस जग में आते है, फिर एक सामाजिक परिवेश में रहते है, तो कई अपेक्षाओं का निर्माण उसी अनुरुप होता है। अपनी इन्हीं अपेक्षाओं को ही हम जीवन उद्देश्य के रुप में स्वीकार करते है। कुछ पाना, सहज भी होता है, असहज भी होता है। चूँकि हम आर्थिक युग में अपना जीवन बीता रहे है, तो निश्चित है, हमारा प्रथम उद्देशय सम्पन्न होना होता है। समाज से मान और प्रसिद्धि हमारी आकांक्षा होती है, तथा हमारी सफलता और असफलता का मूल्यांकन भी ज्यादातर इसी स्वरुप में किया जा सकता है। हालांकि आर्थिक सम्पन होना ही सबके जीवन का उद्धेश्य नहीं हो सकता, जीवन का मायना हर एक के लिए अलग होता है, पर हर एक के लिए अर्थ की भूमिका जरूरी होती है, इस सत्य से शायद ही कोई इंकार करे।

किसी ने कहा है, ” सफलता हमारा परिचय दुनिया को करवाती है और असफलता हमें दुनिया का परिचय करवाती है “। जग हमारी सांसारिक सफलताओं का मूल्यांकन अपने अनुरुप करता है, क्योंकि इनमें उसकी व्यवस्था के अनुसार ही हमारे सारे प्रयास होते है। हमारे कर्म में उसकी दोनों तरह की भूमिका होती है, सहयोग और असहयोग की और इसी दायरे में हमें अपने परिवार, समाज, और देश के नियमों के अंतर्गत अपने हर प्रयास को अंजाम देना पड़ता है। हमारी अपनी कई कमियों की पूर्ति करने के लिए इनका सहयोग लेना पड़ता है। तय नहीं कि हर कोई हमें सहयोग देगा, क्योंकि उनकी भी अपनी यात्रा इसी प्रयास के अंतर्गत जारी रहती है, जरुरत उन्हें भी हमारी हो सकती है। इसी तरह कि आपसी समझ के अंतर्गत हमारे सम्बंधों में सकारत्मक और नकारत्मक ऊर्जा का प्रवाह बहता रहता है, और उसी रुप को हम संघर्ष के स्वरुप में चिन्हित करते रहते है। हमारे हर उद्धेश्य में कई तरह की जरुरत होती है, उनकी पूर्ति भी हमारे आपसी रिश्तों का मूल्यांकन करते है, जिनमें हम प्रेम, व्यवहार, विश्वास, सत्य तलाशते रहते है । कहना न होगा, सफलता से ज्यादा हमारी नाकामी हमें संसार के प्रति ज्यादा व्यवहारिक ज्ञान देती है। उम्र के हर पड़ाव पर सफलता और असफलता का रुप बिगड़ता रहता है, ऐसे समय हमारा जीवन का सन्तुलन रहना जरुरी होता है, अतः जीवन तराजू के दोनों पलड़ों पर नजर रखना ही उचित होगा। ध्यान यही रहे कि हमारा हर कर्म झरना बने, और इस झरने के नीचे पूरी मानवता स्वच्छ हो.. शायद यही असफलता से सफलता का सही सफर होगा….क्रमशः ..कमल भंसाली

खेल है, प्रेम ..सांप सीढ़ी

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दस्तूर, दिल, “प्यार” का सभी ही निभाता
फिर भी वो कभी उसे नहीं समझ पाता
अढ़ाई अक्षरो की टेढ़ी मेढ़ी पगडण्डिया
लगता है, कोई खेल रहा है, साँप सीढ़िया

प्यार को समझा, जाना क्या चीज है प्यार ?
खेल है, पेचीदा, हर कोई इसे खेले, मेरे यार
प्यार वादों पर ही फलफूलता, करता इकरार
फिर भी नहीं निभता, इसमे भी होता, तकरार

जीवन के साँझ सवेरे, लगते रहते, न्यारे प्यारे
प्यार की नागिन, जब मोह की फुंफकार मारे
तन घबराये, मन फिरे, फिसल कर ढूंढे किनारे
खेल खिलाड़ी, कहते आसमान से चाँद सितारे

प्यार जीवन की पट्टी पर ही फलता फूलता रहता
वक्त के पासो से ही पीछे होता, उसी से बढ़ते रहता
कठिन रास्तों से गुजर कर प्यार मंजिल तलाशता
उस मंजिल पर पंहुचना, ही है, इस खेल का वास्ता

पर हकीकत में, ये खेल नहीं है, है एक उपहार
बन के न बिगड़े, ऐसा रहे सबका अगर व्यवहार
समझलो, जीवन गुलशन उसका रहेगा, सदाबहार
दिल को बहलाने का, ये ऊपरवाले का नायाब उपहार…..

★★★★★कमल भंसाली★★★★★