😜पर्यावरण🤑 कमल भंसाली

वक्त बेवक्त
बड़ी बेवजह
जिंदगी मुझसे
अपने होने की वजह पूछती
मेरे अंदर के
कलुषित रक्त को
तंग करती
तमतमा कर
उससे यही कहता
मेरी होकर
वो ये सब क्यों पूछती ?
मुझमे अपने होने की
विश्वास की कमी
अक्सर
क्यों ढूंढती ?

सहम सी जाती
थोड़ी धीमी हो जाती
पर बुदबुदाती
अपने ही गैरों जैसे होते
नाजुक रिश्तों को भूल जाते
वजूद मेरा भी
तिलमिला जाता
जिंदगी मेरी ही है
ये मैं भी भूल जाता

पर जब कभी
बाद में शांति से सोचता
सन्दर्भ जब रिश्तों का आता
तो सही से मन में
उनका अस्तित्व क्यों धुंधला जाता
प्यार में
कभी कभी
शक के धुंए का
फूल कैसे उग जाता !

तब यही समझ में आता
हक और अधिकार की रफ्तार में
दिल का पर्यावरण बिगड़ जाता
मैल कहीं तरह से
दिल पर शक की घनेरी कालिख छोड़ जाता
जिंदगी का सवाल
उत्तर की वजह दे जाता
अपने अस्तित्व को
एक नया आयाम दे जाता

रचियता कमल भंसाली

●●●नया साल, तलाशते आयाम●●● 【कमल भंसाली 】

आज, हर पल को हम नव पल्लवित करेंगे
नये साल में इनको ही, चारों ओर उन्नत करेंगे
नई आशाओं से जीवन को नया आयाम देंगे
ह्र्दय से देश को सुख, शान्ति का पैगाम देंगे

देश है हमारा, इस जीवन का आशियाना प्यारा
अपने ही घर में हमसे ही न उछले कोई चिंगारी
स्वस्थ माहौल में रहकर हम यह विचार करेंगे
सुखी रहे हम देशवासी, इसका इंतजाम करेंगे

छोटी छोटी बातों से न हो दिल हमारा, ह्र्दयघाती
न ही करेंगे ऐसे कर्म जिससे दुनिया कहे,जज्बाती
देशप्रेमी बन, इसकी सुखी समृद्धि की बात करेंगे
किसी भी बात पर मतभेद हो हजारों, पर न बटेंगे

माँ भारती की हम सन्तान, संस्कारो का दूध पीया
तब खून खराबे क्यों करे, अहिंसा का अमृत पिये
मेहरवानी उसकी, देश को हर संसाधन से सजाया
मन से इसको समझ, गरीबी का भूत दिल से भगाये

साल जितने भी आये, अब इस पल में सम्मलित हो जाए
इस पल की खेती करे, जीवन हमारा महक महक जाए
हम इस देश के वासी, आओं, आज प्रण एक एक कर जाए
वतन हमारा पल पल में निखर, एक सत्य शिखर बन जाए

★★★★■

कामना भी एक, मनोकामना भी है, एक
जन्मों जन्मों रहे, देश हमारा, यही एक
★★★★★
हर जन्म में राष्ट्र गीत गाये, तिरंगा को सदा लहराये
देश प्रेम का धर्म ही, कर्म बन चारों और बिखर जाए

( आनेवाले नये साल की मंगलकामनाओं सहित…..कमल भंसाली )