🔴विशिष्ट🔴कमल भंसाली🔘

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बिखरी मंजिले
टूटे सपने
अक्सर मुझे छेड़ते
कहते रहते
आओ हमें
जरा सा भी छू लो

मैं बेदम सा सिपाही
इधर उधर दौड़ता
पर अपनी ही
कमजोरी की
सड़ी गली आदतों की
जंजीरे नहीं तोड़ पाता
निरस्त हो
उनकी और ही झांकता

देख मेरी
मायूसियों की फितरत
फिर भी
उनका स्वभाव नहीं बदलता
आज भी
वो उकसाते
सच मानिए
मेरे पीछे
वैसे ही दौड़ते

गलत न समझिये
मेरी इस हरकत को
उनको
अपनी गिरफ्त में लेना
आज भी
मैं अपना धर्म समझता
नौकरी जिसकी
कर रहा
नमक उसी का
अंदर से बोलता

कर्तव्य की वेदी पर
शहीद होना ही
अपना धर्म है
इतनी सी बात
मैं सही समझता
शपथ मेरी
मुझे समझाती
जो नहीं थकता
प्रयासित रहता
एक दिन
बिखरे सपने समेटता

हर मंजिल को
पकड़ कर
नई राह तलाशता
उन्हीं राहों में
उन्हें खड़ाकर
विशिष्ट कहलाता …..
रचियता….कमल भंसाली

आदतें… बेहतर जीवन शैली… भाग ७……..

आदतें …..बेहतर जीवन शैली…भाग ७…..

आदमी किसी का दास हो या नहीं हो पर अपनी आदतों का गुलाम जल्दी ही हो जाता है, चाहे वो अच्छी हो, बुरी।
बेहतर जीवन शैली के लिए आदतें स्वागत योग्य है, अगर उनसे जीवन बेहतर होता है, परन्तु उनका विरोध भी करती है, जो उसकी यात्रा में बाधा देती हो। दोस्तों जीवन को जीते जीते कुछ असंभाविक आदतें और व्यवहार दैनिक प्रक्रिया में सहजता से अपना स्थान बना लेते है। क्यों नहीं, हम आज इस मजेदार परन्तु मह्त्वपूर्ण विषय पर चिंतन करे।
हमारे राष्ट्रपिता महात्मा ग़ांधी ने भारतीय परिवेश के अनुकूल कथन इस तरह कहा…
Your beliefs become your thoughts,
Your thoughts become your words,
Your words become your actions,
Your actions become your habits,
Your habitats become your values,
Your values become your destiny.

हकीकत में, कितना सही और सटीक कहा उन्होंने, हमारा व्यवहार और आदतें हमारी दिनचर्या का वो हिस्सा है,जिसपर हमारी आस्थाए और सोच का प्रभाव देखा जा सकता है। आदतें, हकीकत में व्यक्तित्व की रुपरेखा तैयार करके हमें दुनिया के सामने प्रस्तुत कर हमारा आंकलन कराती है। हम उदाहरण के लिए यहां फिल्मो में नायक नायिका की दिखाई आदतों पर विश्लेषण करे तो उनकी पहचान सहज ही उनके अभिनय से कर लेते है। फ़िल्म कलाकार राजकुमार अपने संवाद अदायगी और अपनी भाव भंगिमा के कारण प्रसिद्ध हो गए, उनके अदायगी और बोलने के तरीके की नकल आज भी की जाती है।

प्रश्न उठता है, आदतें तो आदतें है, उनसे जीवन शैली क्यों प्रभावित होती है । सूक्ष्मता से अगर हम ध्यान दे, तो शायद हम इस के उत्तर में इतना ही कहेंगे की अगर किसी में चोरी की आदत हो,तो क्या उसका जीवन पर प्रभाव नहीं पड़ता ?
अच्छी आदत को मान मिलता, खराब को नकारा जाता है, यह एक व्यवहारिक प्रक्रिया, इसे हम बच नहीं सकते। कई मनोवैज्ञानिक स्वीकार करते है, की आदत पड़ना अनजाने में ही होता है, जानबूझ कर शारीरिक आदत नहीं बनती। बच्चों में कई आदते विकल्प के रुप में पड़ती है,जैसे अंगूठा चूसना। ख़ैर, हम यहां विश्लेषण यही करेंगे की आदतों से जीवन शैली सिर्फ अच्छी आदतों से प्रभावित कैसे की जा सकती है।

कौनसी आदत अच्छी और कौन।सी बुरी, इसका निर्णय नीतिगत आदतों को छोड़कर ही करना चाहिए। ज्यादातर नीतिगत आदतें आदमी स्वयं अपनाता और छोड़ता है, जैसे कोई आदमी झूठ ज्यादा बोलता है, तो यह आदत उसकी अपनी स्वीकृति से बनी। उसके फल को जानते हुए, उसने अपनाया तो उसका परिणाम भी उसकी नजर में है। वो, ही उस पर प्रशासन करता है, अतः वो चाहे तो बेहतर जीवन शैली के लिए छोड़ सकता है ।

आदतें इन्सान की संकल्प शक्ति कमजोर करती है, बड़े मकसद के लिए अगर हमें किसी आदत को छोड़ना पड़े, तो उसके लिए हमें बहुत संयमित होना होगा। बेहतर जीवन शैली आदतों की विवेचना कर मूल्यांकन करने की सलाह देगी, तय हमें करना होगा की हम आदतों के कभी दास न बने और कभी भी गलत आदतों को फलने फूलने नहीं दे।

आदतें कई तरह की होती है,परन्तु हमारा ज्यादातर जीवन शारीरिक और भावात्मक आदतों से प्रभावित होता है।
अच्छी आदतें संस्कारी, परोपकारी और मानव कल्याण कारी के साथ खुद हितकारी होती है, क्योंकि इनका ताल्लुकात आत्मा सें होता है । कुछ आदतें दिल से जुड़ी बड़ी दिलचस्प और स्नेहकारी होती है, उनमें प्रसन्नता, उल्हास, हास्य, जैसी
सकारत्मक उर्जा का समावेश रहता है, पर जब दिल में नकारत्मक भावनाए हो तो क्रोध, ईष्या आदि का की झलक से दुसरों के दिल पर ठेस पँहुचाती है । कुछ आदतें शरीर से सम्बन्ध रखती है, जिनसे छुटकारा पाना सहज नहीं तो मुश्किल भी नहीं होती, सिर्फ दृढ़ संकल्प शक्ति की जरूरत होती है। नशे, शराब और जुए की आदत जिस इंसान में हो,उनका छुटना सहज नहीं होता, उन्हें मनोवैज्ञानिक तरीके से ही छुड़ाया जा सकता है। सार संक्षेप में यही कहा जा सकता है, इंसानी व्यक्तित्व की बुनियाद में आदतों कि महत्व पूर्ण भूमिका से इन्कार नहीं किया जा सकता।

कुछ आदते जो प्रायः नजर में आती है। ……

1. आज का काम कल पर छोड़ देना

2. नुक्ताचीनी करना

3.समय को गप्पों में गुजारना

4. बहुत बिना सोचे समझे बोलना

5. अधिक खर्च करना

6. गालियों का प्रयोग कर चिल्लाना

7. दूसरों की खिल्ली उड़ाना

8. बात बात पर भड़कना

9. बिना जरूरत झूठ बोलना

10. दूसरों की निंदा करना

ऐसी और भी कई तरह की आदतें है, जो हमें कमजोर व्यक्तित्त्व का इन्सान बनाती है। हमारी जीवन शैली तभी बेहतर हो सकती है, जब हम गन्दी आदतों के शिकार न बने ….यह तय है ।

कबीर दास जी ने कितनी सुंदरता से फरमाते है…..

“कबीर तन पंछी भया, जहां मन तन उडी जाइ
जो जैसी संगत कर, सो तैसा ही फल पाई”……

कमल भंसाली