⭐आज⭐ कल😴 आज🎃 कमल भंसाली

सिर्फ, कल की तरफ न झांको
“आज”पर भी जरा नजर करो
कितना सुंदर शुसील लगता
रंग बिरंगी जानी अनजानी
घटनाओं से सज कर खड़ा रहता
सतत प्रयासी शांत स्वभाव
पल की बुनियाद पर जन्मा
“आज” के नाम से जाना जाता
अपनी सीमित आयु से न घबरा
इतिहास बन मुस्कराता
सदा बहार होनें की खुशबू फिजा में बिखेर जाता
कल….

आने वाला कल का दरवाजा
अनिश्चिताओं से भरा
आज में सुनिश्चित सवेरा
बिता कल अफसोस निर्माता
आने वाला कल सिर्फ सपनें दिखाता
आज जब कल में ढलता
सुरमई शाम से पहचान कराता
अपने सब अधूरे काम उसे सौंप देता
सफल रुप रेखा में भविष्य दृष्यत करा जाता
कर्म फल के बीज से फलित होनें का आशीर्वाद दे जाता
कल…

आज ही कल, कल ही आज
न कोई पहेली, न कोई राज
कहती संत कबीर दास की वाणी
पूरी सच और भविष्य सुहानी
“काल करे सो आज कर, आज करे सो अब
पल में प्रलय होगी, बहुरी करेगा कब”

बन्धु रे
बीत जायेगी जिंदगी, आज नहीं तो फिर कल
जीवन के राही, आज ही पथ, उसी पर चल
सामने खड़ी कल की इन्तजारित इच्छित मंजिल
कब ख्याल बदल जाये, उस से पहले कर हासिल
कल…

✍ रचियता✍🍂कमल भंसाली🍂

स्वर्णिम पल….कमल भंसाली

है, जिन्दगी के चाहे चार दिन
जीना तो पड़ेगा हर ‘पल’, हर क्षण
चाहे, जहर है, या अमृत जीवन
पीना तो पड़ेगा, हर ‘पल’, हर कण

‘पल’, जीवन सफर का एक हि रास्ता
राही को चलना, मंजिल का वास्ता
न यहां आज, न परसों,न ही कोई कल
जो है, वहीं है, यह निष्ठांत अछूता ‘पल’

अपरिचित सा भविष्य, हर ‘पल’ में रहता
मनमोहक, मधुर बन हर ,’पल’ छिन लेता
रातों की नींद में सितारे तक गिनवा देता
बड़ा जालिम, न जीने देता, न मरने देता

बुलन्दियों की गहरी घाटी में विलीन वर्तमान
बहुत कुछ देकर जाता, पर न करता अभिमान
सन्देश ही भेजता, जो आज, वो नहीं होगा कल
देख, समझ कर इंसान चल, आगे है, दूसरा ‘पल’

समझने लायक होता है, ‘पल’ का हर कमाल
हर ‘पल’, करता आशा और निराशा का निर्माण
देखते युग बदल जाता, पर रहता चंचल ‘पल’
उम्र को तराजू में तोल देता, वो ही है, यहीं ‘पल’

वर्तमान का हर लेखा, देता इतिहास को सौंप
जानेवाल ‘पल’, कितना निरहि, बिन संताप
इस ‘पल’ को जानना, यहीं है समय, यही वक्त
काल का निर्माणकर्ता, क्षणिक, पर पूर्ण सत्यत:

‘पल’ से बन्धी, हर सांस की डोर,
इसी से शुरु होती, आभामय भोर
जागों तो आएगा, सुरमई सवेरा
नहीं तो जिंदगी में, रहेगा अंधेरा

सच है, हर ‘पल’ नहीं सुनहरा
हर ‘पल’ में राज छुपा है, गहरा
न कोई इसका नाप, न हीं तौल
मणिमय ‘पल’, बिन मूल्य अनमोल

‘पल’ विश्वास, ‘पल’में समायी आस्था
‘पल’में ही आशा, पल में ही निराशा
पर, ‘पल’ का नहीं , किसी से वास्ता
‘पल’ तो है, प्रभु तक पँहुचने का रास्ता

मैं नहीं कहता, कहता हर ‘पल’
जीवन राही, मेरे साथ चला चल
देख दूर नहीं, तेरी प्रतीक्षित मंजिल
आज नहीं तो कल कहेगा, ‘स्वर्ण पल’
…..कमल भंसाली

आज का संसार

जमाने का है, दस्तूर
गढ़े में गिरा इंसान
न काम का, न काज का
उसे निकालना है, बेकार
मानव, मानव से, कितना मजबूर
मानवता हुुुई
अब हम से, दूर
सच मानों यही है
आज का संसार

देखो तो, चारों तरफ
बिखरा, प्यार ही प्यार
समय आये,
तो नजर न आये
एक भी, रिश्तेदार
एक भी, यार
सिर्फ होता
गिरने पर विचार
पर, निकालने को
कहां कोई, तैयार
सच मानो, यही है
आज का संसार

सत्य यही
रश्मों से बंधे हाथ
कब दोनों बढ़ते
साथ, साथ
एक देता
दूसरा लेता
लेन देन
जो जान जाता
कहते है, कभी नहीं गिरता
भावनओं के समुद्र में
हर रिश्ते का
राज है, गहरा
गिरने वाले कि किस्मत में
यही है, लिखा
कहकर, दुनिया
कर लेती किनारा
पर दे, नहीं सकती
हल्का सा सहारा
कितनी मजबूर
सच मानों, यही है
आज का संसार

तथ्य यही, कहते
जो है, वो सच नहीं
जो सच है,
वो है, ही नहीं
गिरने वाले की हिम्मत
ही उसकी
अपनी तदबीर
जो जीता
वो ही सिकन्दर
बाकी, गिरने वाले का
अपना मुकद्दर
अपनों की दुनिया में
देखों, कितने होते मंजर
सच मानों, यही है
आज का संसार

वक्त, बदले
गिरने वाला
उठ जाता
न, सहारा देने
वाले हाथ
दोनों जुड़ जाते
अभिनय से भरपूर
हर मानव
रंगमच का कलाकार
अभिनय करता,
सहज, साकार
अंत सही,सब सही
नहीं तो

सच, मानों, यही है

आज का संसार

कमल भंसाली